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योगी कैसे बने अरबपति



 योगी कैसे बने अरबपति

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लखनऊ--सौरभ  शुक्ला--आज हम आपको एक ऐसे योगी के बारे में बताने जा रहे है जिसने योग से उद्योग खड़ा कर दिया .. रामदेव जिन्हें लोग योगगुरु के नाम से जानते है  उन्होंने दुनिया भर में योग का ऐसा डंका बजाया कि वो घर-घर तक पहुंच गया। जो योग आम लोगों से दूर हुआ करता था बाबा ने उसकी रीपैकेजिंग कर टीवी और इंटनेट के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाया। धीरे-धीरे बाबा रामदेव खुद योग के एक बड़े ब्रांड बन गए लेकिन आजकल बाबा योग से ज्यादा अपने कारोबार को लेकर चर्चा में है बाबा के बनाए हुए प्रोडक्ट धीरे-धीरे घर-घर में पहुंच रहे हैं और बाबा खुद ब्रांड एंबेसडकर बनकर हर चैनल पर अपने प्रोडक्ट का प्रचार करते दिख रहे हैं आखिर एक योगी कैसे बन गए अरबपति कारोबारी.. 


बाबा रामदेव का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ में 26 दिसंबर 1965 को हुआ था। रामदेव का वास्तविक नाम रामकृष्ण था उनकी मां का नाम गुलाबो देवी और पिता का नाम रामनिवास यादव है। उनके माता-पिता अनपढ थे और बेहद गरीब भी। रामदेव का बचपन गरीबी में गुजरा  हालात ऐसे थे कि एक ही पैजामे में 2-3 साल तक काम चलाना पड़ता था। दूसरे से किताबें मांगकर पढ़ाई करते थे। मां-बाप की हालात का एहसास उन्हें छोटी सी उम्र में ही हो गया था  इसलिए वो घंटों खेत में काम करते। रामदेव ने शहजादपुर के सरकारी स्कूल से आठवीं तक पढाई की लेकिन उस उम्र में ही उनका मन सांसारिक मोह माया से उबने लगा और घर से भागकर खानपुर के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न और योगाचार्य बलदेव जी से संस्कृत एवं योग की शिक्षा लेने जा पहुंचे।


 रामदेव का ये फैसला उनके घरवालों को पसंद नहीं आया और उनके पिता गुरुकुल में जाकर उन्हें वापस लेकर आए। माता-पिता ने यहां तक कहा कि दोबारा गुरुकुल गए तो टांग तोड़ दूंगा, लेकिन कुछ दिन साथ रहने के बाद रामदेव दोबारा घर छोड़कर भाग गए और फिर गुरुकुल पहुंचे। उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 13 साल थी, इतनी कच्ची उम्र में गुरुकुल के सख्त नियमों का पालन करते-करते रामदेव धीरे-धीरे फौलाद बनते गए।


 


रामदेव के योगी बनने की कहानी शुरू होती है 1990 के करीब जब रामदेव खानपुर के गुरुकुल से जींद कलवा गुरुकुल में आ गए थे कलवा गुरुकुल में रहने के दौरान ही उन्होंने पास के गांवों के लोगों को योग सिखाना शुरू कर दिया था रामदेव ने कलवा गुरुकुल को भी छोड़ दिया और हिमालय चले गए। पांच सालों तक वो हिमालय की पहाड़ियों में घूमते रहे और उसके बाद हरिद्वार आए हरिद्वार आने के बाद उन्होंने सन्यास लेने का फैसला किया और वो रामकृष्ण से बाबा रामदेव बन गए। रामदेव हरिद्वार अपने गुरु शंकरदेव महाराज के आश्रम में रहा करते थे और वहीं से लोगों को योग की शिक्षा देनी शुरू कर दी।


 


रामदेव ने अपने दो दोस्तों बालकृष्ण और कर्मवीर के साथ मिलकर दिव्य योग ट्रस्ट की स्थापना की थी। दिव्य योग ट्रस्ट हरियाणा और राजस्थान के अलग-अलग शहरों में हर साल करीब पचास योग कैंप लगाता था उन दिनों बाबा रामदेव अक्सर हरिद्वार की सड़कों पर स्कूटर दिख जाते थे 2002 में गुरु शंकरदेव की सेहत खराब होने के बाद बाबा रामदेव ने खुद दिव्य योग ट्रस्ट कि जिम्मेदारी संभाली और अपने दोस्त बालकृष्ण को ट्रस्ट के फाइनेंस का जिम्मा संभालने को दिया। उनके दूसरे दोस्त कर्मवीर को ट्रस्ट का प्रशासक बनाया। इन तीनों ने साथ मिलकर पतंजलि योगपीठ इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया।


 


हरियाणा राजस्थान और गुजरात में रामदेव अपने शिविर लगाने लगे जिसमें मुश्किल से 200 से 300 लोग आया करते थे। धीरे-धीरे बाबा ने दिल्ली का रुख किया और दिल्ली के छत्रशाल स्टेडियम में योग शिविर लगाया जिसमें मुरली मनोहर जोशी और साहिब सिंह वर्मा जैसे कई नेता भी पहुंचे दिल्ली का दिल जीतने के बाद बाबा ने मायानगरी का रुख किया, उन्होंने सोचा भी नहीं था कि मुंबई में उन्हें लोगों का इतना प्यार मिलेगा। एक वो वक्त था जब महज सौ दो सौ लोग रामदेव के शिविर में आते थे लेकिन धीरे-धीरे ये संख्या हजारों और लाखों तक पहुंच गई।


 


 मुंबई में धीरे-धीरे कई फिल्मीं हस्तियां भी बाबा से योग के गुर सीखने आने लगीं जिसमें अमिताभ बच्चन से लेकर शिल्पा शेट्टी तक शामिल है बाबा का योग अब फिल्मी सितारों को फिट रखने का सहारा बनने लगे योग के साथ बाबा ने अपने आश्रम में आर्युवेदिक दवाईयां भी बनानी शुरु कर दीं। रामदेव के ट्रस्ट का मकसद आम लोगों के बीच योग और आयुर्वेद के प्रयोग को लोकप्रिय बनाना था। खुद बाबा रामदेव भी कई बार बता चुके हैं कि पहली बार उनको जो पचास हजार रुपये का दान मिला था उसी से उन्होंने आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का कारोबार शुरू किया था जो आज हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।


 


दिव्य योग ट्रस्ट 2006 में दूसरा पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट बना। पतंजलि योगपीठ की संपत्ति ही करीब एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बताई जाती है। हरिद्वार में बाबा रामदेव का ये आर्थिक साम्राज्य करीब 6 सौ एकड़ के इलाके में फैला हुआ है  इसमें तीन सौ बैड का मल्टी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल योग रिसर्च सेंटर यूनीवर्सिटी और आयुर्वेदिक फार्मेसी के अलावा फूड पार्क और कॉस्मेटिक मेन्युफैक्चरिंग यूनिट शामिल है 2009 से आस्था टीवी चैनल के अधिकार भी रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के पास है।


पहले योग फिर आर्युवेदिक दवाईयां और अब बाबा रोजमर्रा की जरूरत की हर चीजें बनाने लगे हैं। साबुन शैंपू से लेकर आटा चावल हर प्रोडक्ट मौजूद है। रामदेव खुद अपने प्रोडक्ट की गारंटी देते हुए लोगों को उनके प्रोडक्ट को खरीदने के लिए कहते हैं पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के 2015-16 के कामकाज का ब्योरा देते हुये रामदेव ने खुद बताया है कि 31 मार्च 2016 को समाप्त वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने 150 प्रतिशत वृद्धि हासिल करते हुये 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया। वित्त वर्ष में भी वृद्धि की यह गति बनी रहेगी और वर्ष के दौरान पतंजलि का कारोबार दोगुने से अधिक बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच जायेगा... 


 बाबा का विवादों से भी पुराना नाता रहा है अपनी दवाईयों को बाबा कई बार विवादों में भी घिरे बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ और दिव्य फार्मेसी पर आरोप लगे कि ट्रस्ट की दुकानों पर लड़का पैदा करने में मदद करने वाली दवा बेची जा रही है। लेकिन रामदेव के आश्रम ने दावा किया कि पुत्रबीजक दवा महिलाओं में बांझपन जैसे विकार दूर करने के लिए हैं।


 


2006 में रामदेव की दिव्य फार्मेसी की दवाओं में हड्डियों का चूरा होने का आरोप लगा था। दवाओं में गड़बडी का ये पूरा मामला भी बाद में विवादों में फंस कर रह गया था लेकिन साल 2012 में रामदेव के कनखल आश्रम से खाद्य विभाग ने दिव्य फॉर्मेसी के कई उत्पादों के नमूने लिए जिन्हें रुद्रपुर लैब की जांच में खरा नहीं पाया गया था लेकिन इन तमाम विवादों के बावजूद भी देश भर में बाबा रामदेव के पतंजलि योग ट्रस्ट के सेंटरों में आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए रोजाना लंबी कतारे लगी रहती हैं। काले धन और भ्रष्टाचार के विरोध में बाबा रामदेव ने 2011 में रामलीला मैदान पर अपना आंदोलन शुरू किया था जिसमें उनके साथ सैकड़ों लोग अनशन पर बैठे थे लेकिन आधी रात तो अनशन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और बाबा खुद भेष बदलकर वहां से चले गए जिसको लेकर उनकी काफी आलोचना की गई थी...


 


 


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