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सिर्फ नाम ही नहीं काम भी बजरंगी जैसा



सिर्फ नाम ही नहीं काम भी बजरंगी जैसा

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स्पेशल डेस्क - सौरभ शुक्लसमाज-कार्य  या समाजसेवा एक शैक्षिक एवं व्यावसायिक विधा है जो सामुदायिक सगठन एवं अन्य विधियों द्वारा लोगों एवं समूहों के जीवन-स्तर को उन्नत बनाने का प्रयत्न करता है। सामाजिक कार्य का अर्थ है सकारात्मक, और सक्रिय हस्तक्षेप के माध्यम से लोगों और उनके सामाजिक माहौल के बीच अन्तःक्रिया प्रोत्साहित करके व्यक्तियों की क्षमताओं को बेहतर करना ताकि वे अपनी ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी करते हुए अपनी तकलीफ़ों को कम कर सकें। इस प्रक्रिया में समाज-कार्य लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने और उन्हें अपने ही मूल्यों की कसौटी पर खरे उतरने में सहायक होता है।


           



  • कुछ ऐसी ही कहानी विश्व हिन्दू परिषद् की एक विंग बजरंज दल से जुड़े "आकाश अग्रवाल (बजरंगी)" की है जो की मूलतः अलीगढ में जन्में और उत्तर प्रदेश के काफी जिलों में रहकर अपनी इंटरमीडिएट परीक्षा पूरी कर अपने चाचा के वहां सीतापुर पहुचे महज़ 13 साल की उम्र में हाई स्कूल पास करने के बाद अचानक उनका मन RSS की ओर चला गया पड़ोस में रहने वाले अजय मिश्र की छाया का इतना प्रभाव पड़ा की कानपुर में हनुमान नगर के नगर सयोजक बना दिए गए और ५ साल तक इसी पद पर बने रहे. 


  • कारवां कुछ यु आगे चला की बजरंग दल से कदम RSS की ओर बढे अपनी कट्टर छवि के कारण जहाँ हिन्दुओं में इन्होने उनके दिलों पर अमिट छाप छोड़ी वहीँ सपा बसपा सरकारों में कई मुकदमें इनपर दर्ज हुए लेकिन फिर भी कदम पीछे नहीं खीचे चाहे कश्मीर की बात हो या राम सेतु की समय समय पर सरकारों का विरोध ये अपने संघटन के माध्यम से करते रहे.


  • सीतापुर शहर की काली पड़ चुकी सरायन नदी की साफ़ सफाई कारसेवा के माध्यम से करते रहे वहीँ दीपावली के बाद लोगों द्वारा इधर उधर फेकी गयी मूर्तियों को नगर सीतापुर से एकत्र कराकर उनका भूमि विसर्जन करवाते है कई सालों से काली पड़ी भगत सिंह की मूर्ति को साफ़ करना हो या शहर में कहीं गंदगी हो उसको कार सेवा के माध्यम से समय समय पर साफ़ कराते रहे.

  •  सन २०११ में "प्रवीण तोगड़िया" द्वारा पूरे देश में रक्त दान कोष स्तापना कराने की बात कही गयी जिसमें इन्होने आगे आ कर सीतापुर में ब्लड बैंक की इथापना की और अब तक करीब ५०० लोगों को लखनऊ सीतापुर दिल्ली समेत लखीमपुर के लोगों को कराया और सबसे बड़ी बात ये शुरुवात इन्होने अपने आप से और समय समय पर अपनी पत्नी शीतल अग्रवाल से भी कराया, इस ब्लड बैंक की स्थापना के बाद हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सबके लिए यह ब्लड बैंक हमेशा खुली रहती है और इस ब्लड बैंक के लिए सीतापुर CMS द्वारा इन्हें सम्मानित किया गया.


           


 


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