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फलाना ढिमका की कलम से - ढ़ेड किलोमीटर



फलाना ढिमका की कलम से - ढ़ेड किलोमीटर

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सर्दी की शाम थी , धुंध सी शुरू हो गयी थी,  वो जो रिंग रोड  पर उजाला अपार्टमेन्ट  के पीछे वाला रास्ता है ना , बस वहीँ से वो लौट रहा था ,,  वो सड़क काफी सन्नाटेदार है वहां से  सूरज  ढलने के बाद जल्दी कोई नहीं आता जाता था,,  एक्सीलेटर वाले हैंडल में एक प्लास्टिक का थैला था शायद किसी बड़ी मिठाई की दूकान वाला थैला था।  उस प्लास्टिक की थैले से पानी की बोत्तल का ऊपरी हिस्सा  दिख रहा था , थोड़ा सा आगे चला ही था की पांच फुट छह इंच का एक लड़का जो की अपने उलटे हाथ में सब्ज़ी से भरा थैला पकडे था उसने हाथ दिखाकर लिफ्ट मांगी उससे । . और  बोला 'भाईसाहब' थोड़ा आगे तक छोड़ देंगे ?, ये सुनकर उसकी गाडी का ब्रेक लगता है और वो गाडी रोकता है और पलट के देखता है और कहता है बैठो , और फर्स्ट गियर में गाडी को लेकर चल देता है। थोड़ा आगे चलकर वो उससे पूछता है "कहाँ तक जाओगे ? "




बस सर ये पास वाले बंधे तक,,,
वो खोपड़ी हाँ में हिलाते हुए कहता है हम्म्म …
अचानक गाडी स्लो कर लेता है क्योंकि आगे की कुछ रोड टूटी-फूटी और गन्दगी से भरी पड़ी होती है, वो दोनों धीरे धीरे उस जगह को पार करते है …।
 फिर से वो पूछता है,,,
क्या नाम है तुम्हारा?
राकेश सर ,,
फिर दोनों में बात शुरू हो जाती है।
क्या करते हो?
ड्राइवर हूँ सर ,,
अच्छा ,,क्या चलाते हो ,,, हेलीकाप्टर??
नहीं सर ,,, वैन चलाते हैं ,,,
हम्म्म्म  कौन सी वैन?
स्कूल वाली सर ,,,
अचानक से सामने से कार आ जाती है और वो बाइक को धीरे कर के रोक लेता है ,
तभी पीछे बैठा ड्राइवर बोलता है ,,, क्या हुआ सर? वो उसका पहला सवाल था ,,,. गाडी गुजरने के बाद उसने उस ड्राइवर के सवाल का जवाब देते हुए बोला " अरे ये साले हाई बीम में गाडी चलाने वाले,,,,, एक तो इस रोड पर लाइट नहीं है ऊपर से ये ढक्कन लोग हाई बीम पर गाडी चला रहे है बताओ ,,, ये रोड भी पतली है अगला आदमी तो लाइट की चमक से हड़बड़ा जाता  है, कहीं किसी दिन कोई गाडी ले कर नाले में न उत्तर जायेगा देखना ,, बेवकूफ कहीं के  !!

वो फिर गाडी का गियर लगाता है और अपने पीछे बैठे ड्राइवर से कहता है ,,,,
हाँ तो तुम क्या बता रहे थे ?हाँ ,,  कौन से स्कूल की वैन चलाते हैं ???
ड्राइवर बोला - सर टेंडर हार्ट ,,,
कौन सा गोमतीनगर वाला ??
नहीं सर महानगर वाला ,,
ओह्ह अच्छा ,,,वो दयानंद स्कूल के सामने वाला ना ,,,
हाँ  हाँ  सर वही ,,
तो कितने बच्चे बैठाते हो वैन??
सर ,,, सत्रह  बच्चे ,,,
सत्रह बच्चे ?? क्या मानक हैं मालूम है ??
सर मानक तो बारह बच्चो का है पर मालिक जबरदस्ती करवाते  हैं ज्यादा पैसे के लालच में।

तो कभी पुलिस ने नहीं रोका??
सर वो आरटीओ वाली जब होती है तब ही दिक्कत होती है वरना पुलिस वाले तो  मोबिलाईज़ हो जाते है,,
कितना पढ़े हो?
पोस्ट ग्रेजुएशन का फाइनल ईयर है सर ,,
और ड्राइवरी में कितना पा रहे हो ??
सर साढ़े सात हज़ार ,,,
हैं ?? इतना कम ,, यहाँ कहाँ रहते हो ?? मतबल अपना घर है या किराए पर ?
सर किराए पर ,यहीं आगे बंधे के नज़दीक ,,
और किराया कितना दे रहे हो?/
पंद्रह सौ रुपये सर
ये सुन कर वो शांत हो गया ,शायद कुछ सोचने लगा था,बाइक थोड़ी दूरी पर दिखती रोशनी की तरफ बढ़ रही थी धीरे धीरे ,,
वो दोनों शांत थे ,बाइक के एक्सीलेटर वाले हैंडल पर लटकी थैली की फर्र-फ़र्राहट सुनाई दे रही थी ,,,,
थोड़ा आगे जाकर वो फिर से बोला ,,
टाइपिंग सीखो टाइपिंग ,,,
टाइपिंग ? क्यों सर ??
अरे यार एक तो पढ़े लिखे हो ,दूसरा एक ऐसे इंसान के नीचे काम कर रहे हो जो थोड़े से पैसे के लालच में बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है ,,,, क्या तुम्हारे मन ये बात नहीं आई कभी ? . '

सर ये मेरा दुर्भाग्य कह लीजिये या इस देश का ,पता नहीं पर मुझे इतना मालूम है की मैं पढ़ लिख कर ड्राइवर जरूर बन गया ,,,
अरे यार तुम टाइपिंग सीखो और कहीं किसी ठीक-ठाक वक़ील  के चैम्बर में लग जाओ ,साढ़े सात हज़ार से ज्यादा ही मिल जायेगा और सरकारी नौकरी का ट्राई  करते रहना ,,,

सर राय के लिए शुक्रिया , हमारे बड़े भाई शहर के माने हुए वकील है , उन्होंने ही तो बेदख़ल किया और कहा है की अपने पावं पर खड़े हो कर दिखाओ तब घर आना ,,,
उसकी बात काटते हुए वो बोला - अच्छा ,, क्या नाम है बड़े भाई का ?
सवाल को अनसुना करते हुए वो बोला , सर घर भी गया था ड्राइवर बनने के बाद , बाकायदा मिठाई ले कर गया था , खुश था पर जब बताया की ड्राइवर बन गया हूँ तो बढे भैया ज्यादा बात नहीं बोले , मैं समझ गया और वापस आ गया , पावं पर तो खड़ा हो गया था पर उनकी उम्मीदों पर  नहीं।
सर ने फिर से वही सवाल पुछा " क्या नाम है बड़े भाई का?

बाइक ढलान की रोड लाइट में आ चुकी थी , उसने उनसे कहा सर बस यही ढलान पर उतार दीजिये ,
उसने  ढलान पर बाइक रोक दी ,वो जब तक आगे कुछ बोलते , राकेश ने कहा " सर "क्या रखा है कुरेदने में ,किसी का चक्रव्यूह  भेदने में"
भैया का नाम बता कर मैं उनकी बराबरी नहीं कर सकता , कुछ अंतर है मुझमे सर ,
आपके साथ ढ़ेड किलोमीटर के सफर में ज्ञान बहुत मिला , लिफ्ट के लिए भी शुक्रिया।
और वो उत्तर कर  सब्ज़ी का थैला  हिलाते हुए निकल गया।


लेखक : फलाना ढिमका

 

 


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