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दीप्शी की कलम से कश्मीर पर नज़र



दीप्शी की कलम से कश्मीर पर नज़र

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हाल ही में देश के कुछ शहरों में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ बढ़ रहे उग्र माहौल पर जल्द से जल्द रोक लगाने की ज़रूरत है।

 कश्मीरी छात्रों पर हो रहे हमलों को लेकर ग्रहमंत्री राजनाथ सिंह काफी गंभीर नज़र आये। इस मामले पर उन्होंने सभी राज्यों से कहा है की वे देश के सभी कश्मीरियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करे "वे लोग भी भारत के ही नागरिक है।" ऐसी घटनाये पिछले दो-तीन वर्षों से सुनने को मिल रही है। इसलिए हाल में कश्मीरी छात्रों के साथ मारपीट के बाद ग्रहमंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान सामने आया। पिछले दिनों एक तरफ मेरठ और देहरादून हाईवे पर होर्डिंग लगाए गए थे, जिसमे उत्तर प्रदेश में पढ़ रहे छात्रों को प्रदेश छोड़ कर जाने की चेतावनी दी गयी। वहीँ दूसरी तरफ राजस्थान के चित्तौरड़ में कश्मीरी छात्रों से मारपीट की घटना सामने आयी। इसके साथ ही ३० अप्रैल के बाद उत्तर प्रदेश में कश्मीरियों के खिलाफ हल्ला बोलने को भी कहा गया। इस तरह की चीज़ो पर रुझान सिर्फ अखबारों तक ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया के फैलाव के साथ समाज में इसकी प्रवत्ति बढ़ी है।

इस तरह की होने वाली घटनाओ को ,न जाने क्यों कुछ राज्यों के लोग खुद से जोड़ कर देखने लगते है। इसके साथ ही इन घटनाओ से सम्बंधित भड़काऊ टिप्पड़ियां कर, सोशल मीडिया पर सोये लोगो को जगाकर नफरत के वायरस इस कदर फैलाते है कि उनका असर सबकी स्टेटस वॉल पर नजर आने लगता  है। तभी तो जम्मू कश्मीर को लेकर इस तरह का प्रचार प्रसार चल रहा है। वहां पर किसी भी घटना का सच्चा झूठा वीडियो पूरे देश के स्वाभिमान के साथ जुड़ जाता है। उग्र राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाले ऐसा माहौल बनाने में कुछ ज़्यादा ही मुस्तैद है। यह सब किसी कैंपेन से कम नहीं लगता है कि कश्मीर के तमाम नौजवान अलगाववादियों के निर्देश से ही सेना पर पत्थरबाजी कर रहे है। इस बात को एक मिसाइल की तरह छोड़ा जा रहा है, कि जैसे सारे कश्मीरी युवा मिलकर राष्ट्र राज्य के खिलाफ कोई अभियान चला रहे है। इस तरह की उत्तेजक मिसाइल  का असर कश्मीरी छात्रों के साथ हो रही मारपीट, भड़काऊ टिप्पणी और प्रदेश छोड़ कर जाने की धमकी से लगाया जा सकता है। इस तरह की घटनाओं का जारी रहना हमारे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।अलगाववादियों का तो यही मकसद ही है। उनका यह सोचना की कश्मीर के शेष भारत से अलग है और कश्मीरियों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है। इनकी इस कोशिश में वे आज तक नाकाम होते आए है। लेकिन अलगाववादियों की इस मंशा पर देश के कुछ लोग खरे उतरते नजर आ रहे है क्यूंकि पिछले ७०सालों में जो वो नहीं कर पाए वो हमारे देश के लोग, कश्मीरी छात्रों को अपनी नफरत का शिकार बना कर पूरा कर देंगे।  शायद यही इनकी ज़ुबान में देश की सेवा है। फिर अलगाववादी और हम में क्या फर्क रह गया। नफरत, घृणा से हम लोग इतने भर चुके है कि अपने ही हिस्से को खुद से अलग करने के लिए गड्ढे खोद रहे है।इस वक़्त हमें जरूरत है हर नौजवानो, युवाओं में यह एहसास कराने की , कि पूरा देश उनके साथ है, हर कदम पर हम है उन्हें सहियोग करने के लिए, प्यार देने के लिए।

राष्ट्रीय सेवा, गौरव के नाम पर कश्मीरियों पर हमला करने वाले ही असल में राष्ट्रीय की मजबूत जड़ों को उखाड़ रहे है। लेकिन वो भूल गए कि देश के किसी भी कोने, राज्य से पढ़कर निकलने वाला हर कश्मीरी नौजवान कश्मीर में भारत की ही वाकालत करेगा।

लेखक दीप्शी साहू


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