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150 देशों पर साइबर अटैक का सबसे बड़ा हमला विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कंप्यूटर बने इस हमले का शिकार

150 देशों पर साइबर अटैक का सबसे बड़ा हमला विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कंप्यूटर बने इस हमले का शिकार
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डेस्क: साइबर हमले के चलते भारत समेत दुनियाभर के 150 देशों में 2 लाख से ज़्यादा कम्पूटरों पर हमला हुआ है.जिसके चलते रिसर्व बैंक ने पुराने सॉफ्टवेर पर चलने वाले सभी एटीएम को बंद करवा दिया है. इस वायरस को रैनसमवेयर अटैक बताया जा रहा जिसके चलते लोगों के कंप्यूटर को लॉक कर फिरौतो की मांग की जा रही हैं. वहीँ एक भारतीय गूगल सिक्योरिटी के अफसर नील मेहता का मानना है कि इस अटैक के पीछे उत्तर कोरिया का हाथ हो सकता है.

कहाँ से हुई साइबर अटैक की शुरुआत--

इसकी वायरस की शुरुआत शुक्रवार को यूके के नेशनल हेल्थ सर्विस से हुई। यूके के कई हॉस्पिटल्स में कम्प्यूटर्स और फोन बंद हो गए। इसके बाद कई देशों के अस्पतालों, बड़ी कंपनियों और सरकारी दफ्तरों की वेबसाइट्स पर भी अटैक हुआ। और अब भारत में भी इस वायरस का असर आंध्र प्रदेश के पुलिस नेटवर्क पर पड़ा है। आंध्र पुलिस का 25% इंटरनेट नेटवर्क शनिवार सुबह ठप्प पड़ गया.

वायरस अटैक किसने और कैसे फैलाया--

14 अप्रैल को अमेरिका के एक ग्रुप (शैडो ब्रोकर्स) ने इस सॉफ्टवेयर को बनाया और इसे ऑनलाइन ब्रोडकास्ट कर दिया। बताया जा रहा है कि साइबर वायरस के हथियारों को अमेरिका की नेशनल सिक्युरिटी एजेंसी (NSA) से चोरी किया गया। हालांकि अभी तक ये ज़ाहिर नहीं हुआ है की ये ग्रुप इसे कितना फैलाएगा.

क्या है ये रैनसमवेयर वायरस --

रैनसमवेयर एक ऐसा प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर की किसी फ़ाइल को लॉक कर देता है और फिर बिना फ़िरौती अदा किए मुश्किलों को दूर नहीं करता इस अटैक के लिए WannaCry या WannaCry डिक्रिप्टर का इस्तेमाल किया गया। ये माइक्रोसॉफ्ट विंडोज सिस्टम के लिए खतरा है। रैनसमवेयर तब ज्यादा असर करता है जब उसे आउटडेटेड सॉफ्टवेयर पर छोड़ा जाता है। माइक्रोसॉफ्ट की स्पोक्सपर्सन का कहना है कि हम हालात पर नजर रखे हुए हैं। जल्द ही कोई हल निकाल लिया जाएगा।

वायरस का असर सबसे ज़्यादा किस देश में हुआ--

इस अटैक का असर ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस पर सबसे ज़्यादा पड़ा. जिसके बाद हॉस्पिटल के कंप्यूटर्स और फोन बंद हो गए। जिसके चलते गंभीर हालत वाले पेशेंट्स को दूसरे हॉस्पिटल्स में शिफ्ट करना पड़ा। NHS ने कहा है कि पेशेंट्स तभी हॉस्पिटल आएं, जब इमरजेंसी हो।
यूके की वेबसाइट डेली मेल के मुताबिक, कम्प्यूटर स्क्रीन पर दिखने वाले पॉपअप मैसेज में एक काउंटडाउन भी शो हो रहा है। इसमें फिरौती देने के लिए हैकर्स ने अगले शुक्रवार तक का वक्त दिया है।
कैसे हो रही है फिरौती--

रैनसमवेयर फ़िरौती की रकम वसूलने के लिए जो ई-वॉलेट बनाया गया है, उसमें वर्चुअल करेंसी में 30,000 डॉलर की रकम अभी तक जमा हो पाई है. हर शिकार कम्प्यूटर के लिए वायरस के ज़रिए लोगों से वर्चुअल करेंसी बिटक्वॉयन में 300 डॉलर की रकम मांगी जा रही है. इससे पता चलता है कि रैनसमवेयर के शिकार हुए ज़्यादातर लोगों ने फ़िरौती की रकम नहीं चुकाई है.

कौनसे कंप्यूटर बन रहे हैं इस वायरस का शिकार--

'वानाक्राइ' वायरस केवल उन्हीं कम्प्यूटरों को अपना शिकार बना रहा है जो विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं. अगर आपने अपना विंडोज़ अपडेट नहीं किया है तो ई-मेल खोलते या पढ़ते वक्त एहतियात बरते और अनजान लिंक को ओपन न करें अन्यथा आपका कंप्यूटर भी इस्सकी चपेट में आ सकता है.

क्या हमला टल चूका है--

इस हमले के चलते ब्रिटेन के 22 साल रिसर्चर मलवेयरटेक ने जांच के दौरान मलिसस सॉफ्टवेयर में एक 'किल स्विच' पाया जिससे रैनसमवेयर को फैलने से रोकने में मदद मिली. उन्होंने बताया की ये सब एक संयोगवश हुआ. उन्होंने कहा कि रात में जांच के दौरान उनकी पलकें तक नहीं झपकीं. साथ ये भी चेतावनी दी कि 'हमलोगों ने इसे रोक दिया, लेकिन दूसरा फिर से आएगा और हम इसे रोक नहीं पाएंगे. इसमें काफ़ी पैसा है और इसे रोकने की कोई वजह नहीं है क्योंकि इसके कोड बदलने की पर्याप्त कोशिश नहीं की गई है.'' जिसके चलते ये कह पाना मुश्किल होगा कि हमला अभी टल चूका है.

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