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सामने आया हनिप्रीत का एक और धोखा कोर्ट ने भी नही दी राहत

सामने आया हनिप्रीत का एक और धोखा कोर्ट ने भी नही दी राहत
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नई दिल्ली:आपके लिए सबसे आसान तरीका आत्मसमर्पण करना है कहते हुए कोर्ट ने हनिप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका रद्द कद्द कर दी । राम रहीम के बलात्कार में दोषी पाए जाने के बाद हनिप्रीत लगातार गायब है पुलिस ने इसके गिरफ्तारी के लिए लुक आउट नोटिस जारी किया हुआ है तबसे गिरफ्तारी से बचने के लिए हनिप्रीत इधर उधर छुपती -छुपाती फिर रही है लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि उसके ऊपर दबाव लगातार बढ़ गया है ।

हनिप्रीत द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी । अदालत ने यह भी कहा कि हनिप्रीत लगातार गायब रहकर गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रही है । बलात्कार के दो मामलों में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की दोषसिद्धि के बाद हिंसा भड़काने और देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रही हनीप्रीत इंसां की मंगलवार को ट्रांजिट अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि वह किसी भी तरह के विवेकाधिकार वाली राहत पाने की हकदार नहीं हैं क्योंकि वह डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की 25 अगस्त को दोषसिद्धि के बाद फैली हिंसा के बाद से ही गिरफ्तारी से बच रही हैं.

न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की कोर्ट ने कहा कि हनिप्रीत ने जांच में सहयोग करने के लिए कोई भी प्रयास नही किया है । अग्रिम जमानत याचिका केवल जांच को और भी घसीटने के लिए किया गया है इसलिए इसे राहत नही दी जा सकती है ।हनीप्रीत का आवेदन सही नहीं है और इसे समय हासिल करने और हरियाणा के पंचकूला की अदालत में चल रही सुनवाई को विलंबित करने के लिये दाखिल किया गया है. अदालत ने गौर किया कि हनीप्रीत ने जांच में शामिल होने या आत्मसमर्पण करने को लेकर प्रतिबद्धता नहीं जताई. वह गुरमीत राम रहीम की दोषसिद्धि के बाद से ही फरार है. अदालत ने कहा कि राहत के लिये पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने में सक्षम होने के लिए गिरफ्तारी से बचाव के लिए उनकी याचिका में दम नहीं है.

अदालत ने कहा कि हनीप्रीत के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने के बावजूद उसे गिरफ्तार करने के पुलिस के प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकला है. न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत देना अदालत का न्यायिक विशेषाधिकार है और इसका इस्तेमाल एहतियात के साथ किया जाना चाहिये और अदालत को संतुष्ट होना है कि आवेदन सही आधार पर दायर किया गया है और अदालत का कृत्रिम तौर पर अधिकार क्षेत्र तैयार करने के लिये आवेदक की तरफ से कोई हेराफेरी नहीं की गई है.

नही काम आया दिल्ली का पता
हनिप्रीत की याचिका का जम कर विरोध हुआ और यह भी कहा गया कि हनिप्रीत हरियाणा की रहने वाली है और दिल्ली का पता देकर उसने अदालत को गुमराह करने का काम किया है ।

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