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जानिए कब और कैसे मनाएं मकर संक्रांति वर्ष 2018 में 



जानिए कब और कैसे मनाएं मकर संक्रांति वर्ष 2018 में 

मकर संक्रांति










 












आपकी खबर डेस्क -मकर संक्रांति भारत के प्रमुख हिन्दू त्योहारों में से एक है। जिसे हर साल जनवरी माह में मनाया जाता है। इस पर्व को पुरे भारत में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। कोई इसे मकर संक्रांति के रूप में मनाता है तो कोई इसे तिल संक्रांति और Pongal के नाम से जानते है।

 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की  इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है जबकि उत्तरी गोलार्ध सूर्य की और मुड़ जाता है। परंपरा के अनुसार यह माना जाता है की इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जिसके कारण इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इस दिन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। और साथ ही गुड़, तिल, रेवड़ी, गजक आदि का प्रसाद भी बांटा जाता है। इस त्यौहार का संबंध प्रकृति, ऋतू परिवर्तन और कृषि से है।

 

प्रकृति के कारक के रूप में इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है, जिन्हे शास्त्रों में भौतिक और अभौतिक तत्वों की आत्मा कहा गया है। इन्ही की स्थिति के अनुसार ऋतू परिवर्तन होता है और धरती अनाज उत्पन्न करती है। जिससे जिव समुदाय का भरण पोषण होता है।

 

 

यह हैं मकर संक्रांति का महत्व ----

 

मकर संक्रांति के पर्व पर गंगा स्नान और गंगा तट पर दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इस पर्व को प्रयाग और गंगासागर में स्नान को महास्नान के नाम से जाना जाता है। वैसे तो सूर्य सभी राशियों में प्रवेश करतें है लेकिन कर्क और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश धार्मिक रूप से बहुत फलदायी होता है। यह प्रवेश छः माह के अंतराल पर होता है। व् सामान्यतः भारतीय पंचांग पद्धिति की सभी तिथियां चंद्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती है लेकिन मकर संक्रांति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। इसलिए यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है।

 

जानिए कैसे मानती हैं भारत में मकर संक्रांति ----

 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की  उत्तरी भारत में इसे मकर संक्रांति के नाम से मनाते है। जबकि हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। तमिलनाडु में यह पोंगल पर्व है जबकि कर्नाटक, केरल व् आंध्र प्रदेश में इसे संक्रांति कहते है। इलाहबाद और उत्तर प्रदेश में इस दिन गंगा स्नान का खास महत्व होता है। बिहार में संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में इस दिन स्नान के बाद तिल दान करने की प्रथा है। महाराष्ट्र में विवाहित महिलाएं अपन पहली संक्रांति पर कपास, तेल व् नमक सुहागिन महिलाओं को दान करती है। असम में इसे माघ बिहू या भोगली बिहू के नाम से मनाते है।

 

यह रहेगा 2018 में मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त ---

व्व र्ष 2018 में मकर संक्रांति 14 जनवरी 2018, रविवार के दिन मनाई जाएगी।

 

जानिए मकर संक्रांन्ति पुण्य काल मुहूर्त---

 

पुण्य काल मुहूर्त = 14:00 से 17:41 

मुहूर्त की अवधि = 3 घंटा 41 मिनट

संक्रांति समय = 14:00

 

महापुण्य काल मुहूर्त = 14:00 से 14:24 

मुहूर्त की अवधि = 23 मिनट

 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की उत्तर भारत में इसे खिचड़ी आदि खाकर मनाया जाता है जबकि गुजरात में यह पर्व पतंगोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह मुहूर्त दान आदि करने के लिए बेहद शुभ है इसमें आप गरीबो ब्राह्मणो और जरूरतमंदों को भोजन आदि दान करें। भगवान का आशीर्वाद आपके साथ रहेगा।

पंडित दयानंद शास्त्री 



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