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यूपी का एक ऐसा जिला जहां मुर्दे करते हैं टॉयलेट का प्रयोग



यूपी का एक ऐसा जिला जहां मुर्दे करते हैं टॉयलेट का प्रयोग

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बाराबंकी -स्वच्छता के लिए बाराबंकी के अधिकारियों ने इस तरह से स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाई की जिंदा इंसान क्या मुर्दे भी अब शौचालय का प्रयोग करने लगे हैं ।अधिकारियों ने यह कारनामा कर दिखाया बाराबंकी में जहां कागजों में हेराफेरी करने में इतने व्यस्त हुए की उन्हें यह भी नही दिखा की जिसके नाम पर वह शौचालय बना रहे हैं वह जिंदा भी है मर गया ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने में लगे हुए है कि वह शौच के बाहर न जाकर अपने शौचालय में जाएं इससे देश भी स्वच्छ बनेगा और लोगों में बीमारियां भी कम आयेंगी । प्रधानमंत्री की इस अपील का असर आज पूरे देश में पड़ रहा है और उनके इस अभियान में जहां देश के नागरिक बढ़ -चढ़ कर हिस्सा ले रहे है वहीं भूत -प्रेत भी अब शौंच के लिए बाहर न जाकर अपने शौचालय में जा रहे है । यह अनोखा कारनामा हुआ है बाराबंकी में । जहाँ अधिकारियों ने जिन्दा इन्सानो के नाम शौचालय दिए ही है बल्कि उन लोगों को भी शौचालय दिए है जो इस दुनिया मे हैं ही नही ।इनको सिर्फ शौचालय की पात्रता सूची में रखा ही नही गया बल्कि शौचालय का पैसा भी निकाल लिया गया । खास बात यह है कि शौचालय उन लोगों भी दिया गया जो सरकारी सेवा में है और इसके पात्र है ही नही जबकि उन लोगों को शौचालय दिया ही नही गया जो वास्तव में इसके पात्र है । इससे साफ है कि बाराबंकी के अधिकारी प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान का पलीता लगाने में जुटे हुए है ।



हम बात कर रहे है बाराबंकी जनपद के ग्राम कुरौली की । जहाँ प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के तहत गाँव में शौचालय निर्माण का काम तेजी से चल रहा है । मगर यहाँ अधिकारियों का कमाई वाला खेल सामने आ गया है । यहाँ शौचालय निर्माण के लिए सरकारी पात्रता सूची में उन लोगों के नाम जोड़े गए है जो इसके पात्र है ही नही ।कई साधन सम्पन्न सरकारी कर्मचारियों के नाम सिर्फ पात्रता सूची में नही रखे गए बल्कि शौचालय का पैसा भी निकाल लिया गया । सरकारी कर्मचारियों को शौचालय का पैसा मिलने की सूचना जब हमें मिली तब इसकी वास्तविकता की जाँच के लिए कुरौली गांव पहुँचे ।



यहाँ पहुँच कर हमारे होश यह सुनकर उड़ गए कि यहाँ भूत -प्रेतों को भी शौचालय दे दिए गए है और उन्होंने उसका पैसा भी निकल लिया है । यह सब देख कर मन यह सोंचने को मजबूर हो गया कि क्या मोदी राज में भूत -प्रेत भी शौंच के लिए बाहर न जाकर अपने शौचालय में जा रहे है । आखिर यह सब देख कर हम कह सकते हैं कि आखिर अब और कितना सफल होगा यह अभियान जब भूत भी शौचालय।में जाने लगे है ।


इस गांव में ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने अपने खर्च पर शौचालय का निर्माण करवाया है मगर पात्रता सूची में उनका नाम है इस बारे में उन्हें जानकारी ही नही है । कुछ सरकारी अधिकारियों के नाम भी पात्रता सूची में है । इस सूची में शामिल एक न्यायाधीश का नाम भी है ।जब उनके घर वालों से इस बारे में पूँछा गया तो उन्होंने इस बारे में जानकारी से ही इनकार कर दिया । उन लोगों ने बताया कि उनके यहाँ जो शौचालय है वह उनके अपने खर्च पर बनवाया गया है । अब अधिकारियों ने कैसे क्या खेल किया है इसकी जानकारी उन्हें नही है ।


200 से ज्यादा शौचालय निर्माण में धांधली की खबर के बारे में जब ग्राम प्रधान से पूँछा गया तो उन्होंने बताया कि 200 नही बल्कि 50 शौचालय के निर्माण का पैसा आया था जो बनवा दिया गया है । सूची में गड़बड़ी के बारे में जब प्रधान से पूँछा गया तो उन्होंने बताया कि कमी कहाँ से है यह उन्हें नही पता या कौन कर रहा है यह भी उन्हें नही पता । इस गाँव में वह लोग भी हमें मिले जो वास्तव में इसके हकदार है मगर उन्हें सूची में स्थान नही मिला । साफ है कि शौचालय निर्माण की पात्रता सूची में पहुंच वालों का ध्यान रखा गया है और उन लोगों का ध्यान रखा गया है जिनके नाम पर इसकी रकम अधिकारियों की जेबों में पहुंच सके ।


शौचालय निर्माण में इस धांधली के बारे में हम बाराबंकी की मुख्य विकास अधिकारी अंजनी कुमार सिंह से जब बात की तो उन्होंने बताया कि अभी तक ऐसा मामला उनके संज्ञान में नही आया है और पात्रता सूची की जाँच के लिए कमेटी भी बनाई जाती है लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो जाँच करवा कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाई की जाएगी ।


 


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