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दो साल के मासूम के साथ खेलते हैं 20 बन्दर ,परिवार करता है खाने का इंतजाम

दो साल के मासूम के साथ खेलते हैं 20 बन्दर ,परिवार करता है खाने का इंतजाम
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धारवाड़ (कर्णाटक ) -प्रेम ऐसी चीज है जो कब और कहाँ किससे हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है | एक तरफ जहाँ मनुष्य ही मनुष्य से दूरी बना रहा है वहीँ एक बच्चे और बन्दर का प्रेम लोगों के लिए बहुत ही इंटरेस्टिंग स्टोरी बनकर उभर रहा है | बंदरों को जहाँ देखते ही जहाँ बच्चे भाग खड़े होते है वहीँ बन्दर एक बच्चे को इतना पसंद करते हैं कि उसके साथ खेलने के लिए आते हैं | पहले तो परिवार बहुत ही परेशान होता था की बच्चे को लंगूरों द्वारा कोई नुक्सान न पहुचाया जाए लेकिन अब वे खुद ही अपने बच्चे के साथ ही लंगूरों के लिए खाने का इंतजाम करते हैं और 100 रोटियां केवल लंगुरु लोगों के लिए बनाया जाता है |

बन्दर और बच्चे के बीच प्रेम का मामला कर्णाटक के धारवाड़ जिले के अल्लापुर गांव में दो साल के समर्थ बंगारी का है यहाँ हर रोज सुबह 6 बजे लगभग 20 बंदर घर के बाहर समर्थ के साथ खेलने के लिए जमा हो जाते हैं और वह बच्चे के सिवाय घर के किसी दूसरे सदस्य के करीब नहीं जाते.

  • समर्थ का गांव राजधानी बंगलुरु से उत्तर पश्चिम में 400 किलोमीटर दूर स्थित है जहाँ हर रोज समर्थ के घर के नजदीक के खेतों के बंदर गांव में उसके घर के बाहर जमा हो जाते हैं.
  • बंदर हर दिन दो बार, सुबह व शाम बच्चे को देखने के लिए आते हैं, बच्चा भी अपना खाना उन्हें खिलाता है. रेड्डी ने कहा कि कई दिन ऐसे होते हैं जब समर्थ अपने छह महीने के छोटे भाई के बजाय बंदरों के साथ ज्यादा समय बिताता है.
  • भगवान् हनुमान का आशीर्वाद मानते हैं लोग
  • बच्चे के जानवरों के प्रति लगाव के अहसास से अब परिवार भी बंदरों के लिए खाना बनाने लगा है.
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