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कैसा रहेगा गणतंत्र दिवस 2018 का ज्योतिषीय आंकलन



कैसा रहेगा गणतंत्र दिवस 2018 का ज्योतिषीय आंकलन

२६ जनवरी गणतंत्र दिवस

डेस्क - हम सभी जानते हैं जनवरी 26, 1950 को हमारे देश का गणतंत्र यानी भारत का संविधान, अस्तित्व में आया और भारत वास्तव में एक संप्रभु देश बना। 



 

इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतान्त्रिक देश बन गया, यही कारण है कि भारतीय इतिहास में यह दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में गणतंत्र दिवस पूरे भारत देश में बहुत उत्साह से मनाया जाता है। विशेषकर देश की राजधानी दिल्ली में यह इतने विशिष्ट रूप में मनाया जाता है कि महीनों पहले से ही इसकी तैयारियां होने लगती हैं। शायद यही परम्परा है कि गणतंत्र दिवस मनाना ही गणतंत्र की रक्षा के लिए पर्याप्त है। क्योंकि गणतंत्र बनने से पहले देश में समाज का जो हाल था उसमें जो बदलाव आया है, हमे तो वह स्वाभाविक बदलाव ही नजर आता है। क्योंकि समय कुछ मामलों में स्वयं बदलाव कर लेता है और कुछ बदलाव किए जाते हैं। हमारे देश के की आत्मा समाज है और समाज में गणतंत्र के कारण जो बदलाव आने चाहिए वो आये तो नहीं।

 

गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटा भारत का संविधान लागू किया गया था।एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए, 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा इस संविधान को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो स्‍वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती हैं।

 

पहले राजतंत्र था अब गणतंत्र है, यानी बदला है तो “राज” और “गण” समाज और तंत्र तो वही नजर आ रहे हैं। देश का गणतंत्र ऐसा है कि नौकरी के लिए योग्यता की परख नहीं की जाती बल्कि धर्म, जाति और मजहब ही सर्वोपरि होता है। हर व्यक्ति के लिए उसकी जाति और धर्म के अलग-अलग कानून हैं। कानून को बकरी के कान की तरह, नेतागण अपने स्वार्थ की आपूर्ति के लिए मरोड़ देते हैं। कुछ सीटों के लिए तुष्टीकरण के खेल में देश की व्यवस्था की बलि चढ़ा दी जाती है।

 

आज भी देश की नारी को किसी गैर जाति से प्रेम करने पर सजा दी जाती है। गणतंत्र के रखवाले नेताओं के द्वारा जन शोषण का कार्य प्रगति पर है। करोड़ों नवजात शिशु और गर्भवती माताएं कुपोषण की शिकार है। नकली दवा के साथ साथ मानव अंग का भी व्यापार निरंतर पुष्पपल्लवित हो रहा है। एक तो आतंकवादी पकड़े नहीं जाते लेकिन यदि किसी तरह पकड़े भी गए तो उन्हें मेहमानों की तरह वर्षों पालते पोसते हैं। पड़ोसी मुल्क के लोग फ़ौजियों का सिर काट के ले जा रहे हैं और हम उनके नेताओं का स्वागत कर रहे हैं। 

 

इतना ही नहीं, अनेकों अपराध करने के बाद यहाँ का “गण” जाति-पाति और धर्म के नाम पर किसी अपराधी को भी “तंत्र” से जोड़ देते हैं और गणतंत्र का रक्षक नियुक्त कर देते हैं। 

 

ज्योतिषी पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार  यह सब जल्दी बदलने वाला नहीं है क्योंकि गणतंत्र की कुण्डली में लग्नेश और कर्मेश बृहस्पति नीच का है। जब हम नीच प्रवृत्ति के व्यक्ति से किसी अच्छे काम की आशा नहीं करते तो फ़िर किसी नीच ग्रह से हम कोई विशेष आशा क्यों करें। 

 

बृहस्पति अस्त भी है, साथ ही षष्ठेश सूर्य और अष्टमेश शुक्र के प्रभाव में है। चन्द्रमा मूल संज्ञक नक्षत्र यानी कि अश्वनी नक्षत्र में है। 

 

लग्न पर राहु, केतु और मंगल का प्रभाव है। यानी कि कहीं से भी कोई शुभ संकेत नहीं है। तो ऐसे में हम देश के कर्णधारों से कोई विशेष आशा न रखें तो ही ठीक है। जो भी इस देश या प्रदेश की कुर्सी पर बैठेगा उसके ज्ञान को ग्रहण लगेगा ही लगेगा। अत: आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी होगी साथ ही समय समय पर जनजागरण करके देश के कर्णधारों को यह एहसास दिलाते रहना होगा कि वे निरंकुश नहीं है, वे हमसे हैं हम उनसे नहीं हैं। 

 

आइये अब बात करें कि भारत के लिये साल 2018 कैसा रहेगा तो नव वर्ष का आरंभ कन्या लग्न में हो रहा है जो कि भारत की राशि से देखा जाये तो तीसरा स्थान है। वर्ष लग्न स्वामी बुध हैं जो भारत की कुंडली के अनुसार पंचम घर के कारक हैं। कुल मिलाकर साल 2018 शिक्षा और नई तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी रह सकता है या अपना विशेष मुकाम हासिल कर सकता है। वर्ष लग्न के अनुसार लग्न स्वामी बुध पराक्रम भाव में विचरण करने से भारत अपने पराक्रम एवं मेहनत के बल पर विश्व में भी अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हो सकता है।

 

जैसे किसी व्यक्ति का भविष्य उसकी जन्म तिथि  से आंका जाता है, ठीक उसी प्रकार किसी भी देश का भविष्य उसकी स्वतंत्रता प्राप्ति की तिथि और उसके संविधान लागू होने के समय के दृष्टिगत ही आंका जाता है। भारत का भविष्यफल भी ज्योतिषीय आधार पर 15 अगस्त 1947, रात्रि 23 बजकर 59 मिनट और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी,1950, 10.19 बजे नई दिल्ली के अनुसार ही देखा जाता है। इसके अलावा  उस वर्ष के दोनों दिनों अर्थात स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की कुंडली भी साथ में बनाई जाती है। 

 

भारत की राशि के स्वामी चंद्रमा वर्ष कुंडली में भाग्य स्थान में उच्च के होकर गोचर कर रहे हैं। यह संकेत कर रहे हैं कि भारत को 2018 में भाग्य का भी पूरा साथ मिलने के आसार हैं। वर्ष कुंडली में चंद्रमा मृगशिरा नक्षत्र में हैं तो लग्न स्वामी बुध ज्येष्ठा नक्षत्र में यह संकेत करते हैं कि विश्व के अलग-अलग देशों में भारत की पहचान बढ़ेगी। किसी विशेष क्षेत्र में भारत विश्व का नेतृत्व भी कर सकता है।

 

सर्वप्रथम हम अंकों के आधार पर देश का भविष्य फल आंकेंगे। यदि हम 15-8- 1947 के अंकों का योग करें तो 8 आता है और इस साल के गणतंत्र दिवस की तिथि 26-1-2018 को जोड़ा जाए तो भी अंक 2 ही आता है। साल 2018 का योग भी 1 ही है। इसके अलावा यदि वर्तमान प्रधानमंत्री की जन्म तिथि देखें तो 17 सितम्बर का मूलांक भी 8 ही आता है। उनकी अपनी कुंडली में लग्न का अंक भी 8 ही है। 

 

2018 की शुरुआत में जनवरी माह के मध्य में मंगल भारत की राशि से पांचवे स्थान में प्रवेश करेंगें यह समय शिक्षा क्षेत्र के लिये काफी अच्छा रह सकता है। देश के कुछ हिस्सों में शिक्षा क्षेत्र में रोजगारों का सृजन हो सकता है। स्वव्यवसायी जातकों को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।

 

मार्च में भारत को शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता रहेगी। इस समय मंगल व शनि का एक साथ गोचर करेंगें जिससे देश को बाह्य एवं आंतरिक दुश्मनों से सचेत रहने की आवश्यकता रहेगी। निर्यात के मामले में भी भारत को प्रतिद्वंदी देशों से चुनौतियों का सामना इस समय करना पड़ सकता है।

 

इस समय देश के खर्चे पर कुछ नेता विदेशी यात्रा पर भी जा सकते हैं जिसमें लाभ कम फिजूल खर्ची ज्यादा होने के आसार रहेंगें। मार्च माह के दूसरे सप्ताह के मध्य में बृहस्पति भी वक्री हो रहे हैं। आर्थिक तौर पर इस समय उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। विकसित देशों द्वारा संचालित कुछ संस्थाओं द्वारा भारत पर दबाव भी बनाने के प्रयास भी किये जा सकता है।

 

अप्रैल में भारत की राशि से छठे स्थान पर शनि वक्री हो रहे हैं। इस समय कुछ पुराने मुद्दे विश्व स्तर पर उठाये जा सकते हैं। शत्रुता की भावना रखने वाले देशों द्वारा भी कोई साजिश रची जा सकती है। मई में मंगल का राशि से सप्तम भाव में आना फिर से भारत के विकास कार्यों में तेजी ला सकता है। लेकिन जून के लगभग अंत में मंगल का वक्री होना कई मोर्चों पर परेशानी भी खड़ी कर सकता है। देश के कुछ हिस्सों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी उत्पन्न होने के आसार भी बन सकते हैं।

 

कुल मिलाकर वर्ष के पूर्वाध में भारत के लिये समय मिले जुले परिणाम लेकर आने वाला रह सकता है।

 

जुलाई के दूसरे सप्ताह के मध्य में चतुर्थ स्थान में गोचररत बृहस्पति की उल्टी चाल सीधी हो जायेगी। इस समय देश में राजनीतिक तौर पर काफी सक्रियता देखने को मिल सकती है। अगस्त के अंतिम दिनों में मंगल भी मार्गी हो जायेंगें। जिससे कुछ रूके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। हो सकता है को लंबित कानून, विधेयक या प्रस्ताव इस समय पास हो जाये। सितंबर माह के पहले सप्ताहांत पर छठे भाव में वक्री होकर गोचर कर रहे शनि भी मार्गी हो जायेंगें। इस समय शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है।

 

अक्तूबर माह के दूसरे सप्ताहांत के नजदीक बृहस्पति चौथे स्थान से परिवर्तन कर पंचम भाव में आ जायेंगें। इस समय भारत का नाम रोशन हो सकता है। किसी विशेष क्षेत्र में कोई भारत का परचम लहरा सकता है। निर्यात में वृद्धि के अवसर भी भारत को मिल सकते हैं। नवंबर में मंगल अष्टम भाव में आ जायेंगें। इस समय भी भारत नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह के आरंभ में मंगल भारत की राशि से नवम भाव यानि भाग्य स्थान में प्रवेश करेंगें। यह समय सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रियता वाला समय रहने के आसार हैं। इसी समय भारत की राशि में चंद्र मंगल की युति से राज योग का निर्माण भी हो रहा है वैश्विक स्तर पर भारत को किसी विशेष क्षेत्र में, किसी विशेष अंतर्राष्ट्रीय संस्था अथवा किसी अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे या मंच पर नेतृत्वकारी भूमिका मिल सकती है। 

 

2018 में क्या कहती है भारत की कुंडली आइये जानते हैं।

 

15 अगस्त 1947 मध्यरात्रि के समय जब देश की आज़ादी का परचम लहराया तब पुष्य नक्षत्र में भारत की कुंडली वृष लग्न की बनी। इसके अनुसार भारत की राशि कर्क है। इस समय भारत पर राशि स्वामी चंद्रमा की महादशा चल रही है जोकि 2025 तक रहेगी। साल 2018 की शुरुआत के समय भारत की कुंडली के अनुसार भारत पर राहू की अतंर्दशा तो केतु प्रत्यतंर दशा में गोचर करेंगें।प्रशासनिक भाव पर सूर्य- मंगल-शुक्र- शनि की दृष्टियां होने से प्रधानमंत्री कई जगह विवश दिखेंगे। भ्रष्टाचार के भी कई मामले सामने आएंगे। कई महत्वपूर्ण योजनाएं विपक्ष के कारण लागू नहीं हो पाएंगी। धर्म संबंधी विवादित बयानों से सत्ता पक्ष परेशान रहेगा। आतंकवाद , जातीय हिंसा, आंतरिक  विरोध भी परेशान रखेगा। परंतु सकारात्मक बात यह रहेगी कि देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ेगा।  अर्थव्यस्था मजबूत होगी। वित्तीय व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन आएंगे जिससे आम आदमी लाभान्वित होगा। कई महत्वपूर्ण योजनाएं विपक्ष के कारण लागू नहीं हो पाएंगी। कारण धार्मिक उन्माद, तीर्थ स्थलों का नवीनीकरण, सौंदर्यीकरण, रेल से जुड़ाव मुख्य मुद्दा रहेगा । अग्निकांड, अस्त्र-शस्त्र का खुला प्रयोग रहेगा। सीमा पर तनाव, घुसपैठ, दल बदल, राजनीतिक पाॢटयों के नवीन समीकरण, प्राकृतिक प्रकोप, हवाई दुर्घटना या हाईजैकिंग जैैसे विषय देश के सामने पूरा वर्ष छाए रहेंगे। 

 

वर्षा सामान्य रहेगी। आम जनता को कष्ट। अनाज की उत्पत्ति कम होगी। सरकार को राज करने में तकलीफ आएगी। राजनीतिक उथल-पुथल रहेगी। आतंक, चोर, पाखंडी, अपराधी एवं लुटेरों का प्रभाव अधिक दिखाई देगा। शनि के प्रभाव से वर्षा कम होगी। आर्थिक समृद्धि में रुकावट आएगी, परंतु शुक्र के प्रभाव से उत्पादन अच्छा होने के योग हैं। साथ ही राज्यकोष में वृद्धि होगी तथा शासन द्वारा जनकल्याण के कार्य होंगे। बड़े मंत्री तथा प्रशासनिक अधिकारी के लिए यह वर्ष लाभदायी रहेगा। दलहन व तिलहन में तेजी रहेगी। बोया हुआ धान सड़ेगा। दुबारा बोवनी करना पड़ेगी। फूलों का उत्पादन श्रेष्ठ होगा। देश में शासन की लोकप्रियता बढ़ेगी। लोगों का नीति-धर्म के अनुकूल आचरण बढ़ेगा।

 

मंगल के प्रभाव से पशुओं को कष्ट रहेगा एवं फसलों को नुकसान होगा। चन्द्र के प्रभाव से पेय पदार्थ मिठाई, कपड़ा, चावल, घी, चांदी, मोती व तेल के व्यापारी को अच्छा लाभ मिलेगा अर्थात इनके भाव बढ़ेंगे। कानून-व्यवस्था में सुधार होगा। विश्व में हिंसा, संघर्ष, सैन्य-संचलन, विमान दुर्घटनाएं, राजनीतिक दलों में अंदरुनी विवाद उभरकर सामने आएंगे जिससे सरकार व आम जनता परेशान होगी। धरने व विद्रोह प्रदर्शन होंगे। गुरु के प्रभाव से जनता को सुख-शांति प्राप्त होगी। जनता शारीरिक रूप से सुखी रहेगी। ब्राह्मण व संत-विद्वानों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा।

 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भारत की कुंडली की यदि बात की जाए तो वह कन्या लग्न की कुंडली बनती है जिसका स्वामी बुध ग्रह है, बुध ग्रह पंचम भाव का कारक ग्रह होता है । पंचम भाव शिक्षा से सम्बंधित है इसलिए भारत शिक्षा व तकनीक के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल करेगा ।लग्न का स्वामी बुध ग्रह इस समय गोचर में तृतीय भाव में है, तृतीय भाव पराक्रम तथा मेहनत का भाव है, इसका तात्पर्य यह है कि भारत जो भी हासिल करेगा वह अपनी मेहनत के बल पर ही करेगा ।

 

भारत की राशि 2018 में कर्क है, कर्क राशि के स्वामी चन्द्रमा है जो कि भाग्य स्थान में है तथा मृगराशि नक्षत्र में स्थित है जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत विश्व में अपनी पहचान बनाने के साथ - साथ उभर कर सामने आएगा ।

 

देश को फिजूलखर्ची से बचना चाहिए तथा शत्रुओ से भी सावधान रहना चाहिए, यह साल भारत के लिए मिले - जुले परिणाम लेकर आएगा । कुछ पुराने मुद्दे विश्व स्तर पर उठाये जा सकते हैं, भारत निर्यात में अच्छे अवसर प्राप्त कर सकता है, वही कुछ राज्यों में स्वास्थ सम्बन्धी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती है । 2018 भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान व नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है ।

 

इस वर्ष की कुंडली को मौसम की नजर से देखें तो गर्मी की अधिकता के कारण फसलों व सब्जियों के उत्पादन में कमी आएगी। मई-जून के महीनों में गरम व तेज हवाएं चलेंगी जिससे शारीरिक पीड़ा (लू) रहेगी। यह वर्ष विज्ञान के क्षेत्र में नए आविष्कार वाला रहेगा। भारत विश्व में विज्ञान के आविष्कार व तकनीक के मामले में सराहनीय रूप से अग्रणी रहेगा व विश्व के उच्च स्थानों में जगह पाएगा। महिला वर्ग के लिए यह वर्ष उन्नति वाला रहेगा। रोजगार में महिलाओं को उन्नति मिलेगी। राजनीति एवं नौकरी में वर्ष महिला वर्ग लिए अत्यधिक लाभ वाला रहेगा।

 

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की इस वर्ष 2018 में एक नहीं कई नामचीन हस्तियां काल कलवित हो जायेंगी। आत्ममुग्धता बढ़ेगी। सही ग़लत के मध्य की पतली लकीर सुविधानुसार पूरे साल स्वयं में बदलाव करती रहेगी। धोखाधड़ी बढ़ेगी। डकैती, छिनैती और लूटपाट जैसी घटनाओं में सहसा इज़ाफ़ा होगा। मीडियाकर्मियों को कष्ट प्राप्त होगा। ईमानदार पत्रकारों की ईमानदारी स्वयं उन्हें और उनके लक्ष्य दोनों को बेचैन करेंगी। किसी भरोसेमंद पत्रकार के किसी बयान या व्यवहार पर हैरानी होगी। राज नेता अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग कर दूसरों पर कीचड़ उछालेंगे। कई नए और मध्यम दर्जे के नेता आगे आयेंगे। पुराने दिग्गज हाशिए पर जायेंगे। एक या कई मंत्रियों की कुर्सी जाएगी। जनता राजनैतिक चाल बाज़ियों की शिकार बनती नज़र आएगी। तू तू मैं मैं स्तरहीनता की निचली पायदान पर होगी। इस साल कई पुराने दोस्त दोस्ती भूल जायेंगे और दूसरी तरफ़ आश्चर्य जनक रूप से कई पुराने राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी गलबहियां करते नज़र आयेंगे। 2018 राजनीतिक अहसानफ़रामोशी और वादाखिलाफ़ी का गवाह बनेगा। इस बरस किसी बड़े राज़ नेता का दंभ चकनाचूर हो जाएगा।

 

इस वर्ष शनि के प्रभाव से वर्षा कम होगी। आर्थिक समृद्धि में रुकावट आएगी, परंतु शुक्र के प्रभाव से उत्पादन अच्छा होने के योग हैं। साथ ही राज्यकोष में वृद्धि होगी तथा शासन द्वारा जनकल्याण के कार्य होंगे। बड़े मंत्री तथा प्रशासनिक अधिकारी के लिए यह वर्ष लाभदायी रहेगा। दलहन व तिलहन में तेजी रहेगी। बोया हुआ धान सड़ेगा। दुबारा बोवनी करना पड़ेगी। फूलों का उत्पादन श्रेष्ठ होगा। देश में शासन की लोकप्रियता बढ़ेगी। लोगों का नीति-धर्म के अनुकूल आचरण बढ़ेगा।

 

मंगल के प्रभाव से पशुओं को कष्ट रहेगा एवं फसलों को नुकसान होगा। चन्द्र के प्रभाव से पेय पदार्थ मिठाई, कपड़ा, चावल, घी, चांदी, मोती व तेल के व्यापारी को अच्छा लाभ मिलेगा अर्थात इनके भाव बढ़ेंगे। कानून-व्यवस्था में सुधार होगा। विश्व में हिंसा, संघर्ष, सैन्य-संचलन, विमान दुर्घटनाएं, राजनीतिक दलों में अंदरुनी विवाद उभरकर सामने आएंगे जिससे सरकार व आम जनता परेशान होगी। धरने व विद्रोह प्रदर्शन होंगे। गुरु के प्रभाव से जनता को सुख-शांति प्राप्त होगी। जनता शारीरिक रूप से सुखी रहेगी। ब्राह्मण व संत-विद्वानों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा।

 

पण्डित दयानन्द शास्त्री के ज्योतिष विश्लेषण के अनुसार अगस्त 2018-19 में चीन एवं पाकिस्तान से भारत को संकटों व चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। आक्रमण का भय रहेगा।नव वर्ष की प्रवेश कुंडली तथा चौथे भाव में शनि मंगल की युति व सप्तम भाव में चतुर ग्रह योग बन रहा है, जो लग्न को पूर्ण रूप से प्रभावित कर रहे हैं। जिस कारण भारत को पाकिस्तान व मुस्लिम देशों की चुनौती मिलेगी। इसके साथ साथ तुला राशि में बृहस्पति का गोचर होने के कारण राम मंदिर का निर्माण होगा संभावित हैं।

 

भारत में आंतरिक शांति की स्थिति में सुधार होगा। डालर के मुकाबले रुपए की कीमत भी बेहतर होगी। लेकिन महंगाई कम करने का वादा कर सरकार बनाने वाले दलों की परेशानी में कमी आती नजर नहीं आ रही क्योंकि हाल फ़िलहाल महंगाई पर नियंत्रण होता तो नजर नहीं आ रहा। हालांकि देश में कई बेहतर नीतियों के लागू होने के योग हैं। विदेशों के साथ कुछ समझौतों के कारण भी देश की स्थिति में सुधार होगा।

 

कुल मिलाकर इस वर्ष की गणतंत्र कुण्डली, देश में बेहतरी का संकेत तो कर रही है, लेकिन कई तरह की परेशानियां भी दर्शा रही है। वर्ष का प्रथम भाग अपेक्षाकृत अधिक उठापटक वाला रहेगा। इसके बाद थोड़ी सी शांति की उम्मीद हम कर सकते हैं। जैसा कि लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि चुनाव बाद देश में कोई बड़ा चमत्कार होने वाला है तो ऐसा संकेत तो गणतंत्र कुण्डली नहीं दर्शा रही है

 

 भारत की कुंडली में तीसरे घर में सूर्य-बुध-शुक्र-शनि व चंद्रमा पांच ग्रहों की युति तथा कालसर्प दोष होने के कारण भारत को पड़ोसी देशों से विश्वासघात का सामना करना पड़ेगा। भारत को पड़ोसी देशों से समस्याएं आती रहेंगी। 

 

भारत की कुंडली में केतु सप्तम भाव में होने के कारण अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद को जन्म देता है। पाकिस्तान को लेकर सतर्क रहना होगा क्योंकि युद्ध की पहल उसकी तरफ से हो सकती है। 

 

किसी विशेष क्षेत्र में भारत विश्व का नेतृत्व भी कर सकता है। सीमा पर गीदड़ भभकी की भौंक और उस पर नेताओं के कड़वे वचनों की छौंक मन उदास करेगी। उत्तर, पूर्व और उत्तर पूर्व क्षेत्रों में भूकम्प से नुकसान होगा। पूर्व व दक्षिणी हिस्सों में प्रकृतिक आपदा से क्षति होगी। 

 

चैत्र से वैशाख के मध्य भारत का अन्तर्राष्ट्रीय जगत में सम्मान व दबदबा बढ़ेगा। पर भारत को उन से ज़्यादा कुछ हासिल इस साल भी नहीं होगा। सड़कों पर गाड़ी पर नियंत्रण में चूक से वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जायेंगे। पटरियों पर ट्रेनें भी लड़खड़ाएगी। लिहाज़ा जान माल की क्षति होगी। 

 

पाकिस्तान पर वर्तमान वर्ष 2018-19 में मार्केश की महादशा चंद्र राहु का ग्रहण होने के कारण उसे सर्वाधिक नुक्सान होगा। 

 

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र अपने महानायकों को स्मरण करता है । हजारों-लाखों लोगों की कुर्बानियों के बाद देश को आजादी मिली अंगे फिर राष्ट्र गणतंत्र बना । स्वतंत्रता हमें भीख में नहीं मिली । कइयों ने इसके लिए अपनी जान गँवायी । महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, लाला लाजपतराय, बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने जान की बाजी लगा दी । इन्होंने देशवासियों क सामने जीवन-मूल्य रखे । हमारा गणतंत्र इन्हीं जीवन-मूल्यों पर आधारित है । अत: इनकी रक्षा की जानी चाहिए । समय, व्यक्ति की गरिमा, विश्व बंधुत्व, सर्वधर्म-समभाव, सर्वधर्म-समभाव, धर्मनिरपेक्षता गणतंत्र के मूलतत्व हैं । अपने गणतंत्र को फलता-फूलता देखने के लिए हमें इन्हें हृदय में धारण करना होगा ।

 


 












पंडित दयानन्द शास्त्री,


(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)













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