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जानिए क्यों देखें फिल्म "पद्मावत"...मेरे विचार/मेरे नजरिये से...



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निर्माताः वायकॉम18/संजय लीला भंसाली


निर्देशक : संजय लीला भंसाली

लेखक : संजय लीला भंसाली, प्रकाश कपाड़िया

सितारेः दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, शाहिद कपूर, जिम सरभ, अदिति राव हैदरी, रजा मुराद, अनुप्रिया गोयनका

रेटिंग : 5/5

 

प्रिय पाठकों/मित्रों,जिस तरह से फ़िल्म "पदमावत" राजपूत राजाओं को लगभग अतिमानव या सुपरह्यूमन का दर्जा देती है उससे राजपूतों को ख़ुश होना चाहिए | संजय लीला भंसाली ने इस फिल्म में राजपूतों को वचन के पक्के हीरो और मुसलमान आक्रांताओं को चालबाज़ और ख़ूँख़ार खलनायकों की तरह दिखाया है. पर ये दाँव उलटा पड़ गया और ख़ुद राजपूत ही हिंसा के बल पर फ़िल्म को रोकने की धमकी दे रहे हैं. फ़िल्म के अंत में राजपूतानियों को जौहर में जाते हुए दिखाया गया है और राजस्थान में ऐसे कई लोग मिल जाएँगे जो जौहर और सती प्रथा का अब भी गुणगान करते हैं.

 

गरजती रणभेरियों और तलवारों की खनक के साथ-साथ चलती है राजपूती आन-बान-शान की कहानी — राजपूत सिर कटा सकता है लेकिन झुका नहीं सकता.

राजपूत अपना वचन पूरा करने के लिए अपना सबकुछ दाँव पर लगाने को तैयार रहता है.

राजपूत किसी को एक बार मेहमान बना लेता है तो फिर उस पर तलवार नहीं चलाता.

राजपूत अपने दुश्मन की क़ैद में पड़ने के बावजूद समझौता नहीं करता.

राजपूत धोखेबाज़ दुश्मन से भी धोखा नहीं करता.

क्षत्राणी अपने शील और धर्म की रक्षा करने के लिए कंगन उतार कर तलवार उठाने में भी नहीं हिचकती.

क्षत्राणी विधर्मी के हाथों में पड़ने की बजाए जौहर करके ख़ुद को भस्म कर लेना उचित समझती है.

बहुत से लोगों को याद होगा कि तीस साल पहले जब राजस्थान में देवराला की रूपकुँवर को उसके पति की चिता में जला दिया गया था, तब बहुत से राजपूत संगठन सती प्रथा का गुणगान करते हुए लगभग करणी सेना के सुर में ही सती प्रथा का विरोध करने वालों की ईंट से ईंट बजाने की धमकी देते थे.

 

इस सबके बावजूद पता नहीं क्यों पद्मावत फ़िल्म से राजपूत करणी सेना की भावनाएँ आहत हो रही हैं?

 

 

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