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अखिलेश, सरकार हमारे ऊपर बंगला तोड़ने का अारोप लगाकर कर रही है बदनाम



अखिलेश, सरकार हमारे ऊपर बंगला तोड़ने का अारोप लगाकर कर रही है बदनाम

बंगला तोड़ने का अारोप

लखनऊ-पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर उनको बदनाम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुझे जैसा आवास मिला था मैने वैसा अावास सरकार को सौंपा था। हमारे घर छोड़ने के बाद कोई  एक व्यक्ति घर में खुली शर्ट पहनकर इनोवा गाड़ी से गया था उसी ने पूरी स्कि्प्ट रचा है। मैंने तो उस घर से केवल अपना समान ले गये हैं। 


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  • इसके पहले राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राजधानी के चार, विक्रमादित्य मार्ग पर आवंटित सरकारी आवास को खाली करने से पूर्व उसमें की गई तोडफ़ोड़ और क्षतिग्रस्त करने का मामला मीडिया तथा जनमानस में चर्चा का विषय है|

  • यह नितान्त अनुचित और गंभीर मामला है। पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित किये गए सरकारी आवास राज्य संपत्ति की श्रेणी में आते हैं।

  • इनका निर्माण व रखरखाव सामान्य नागरिकों के विभिन्न प्रकार के करों से होता है। लिहाजा राज्य संपत्ति को क्षति पहुंचाना ठीक नहीं।


मुख्यमंत्री को पत्र भेजने से पहले राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों को खाली कराने के प्रकरण की जानकारी लेने के लिए राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया। अधिकारियों ने बताया कि सभी बंगलों की वीडियोग्राफी कराई गई लेकिन, इनमें से केवल चार, विक्रमादित्य मार्ग वाले बंगले में तोडफ़ोड़ की बात सामने आयी है।


पीडब्लूडी भी करेगा नुकसान का आकलन


राज्य संपत्ति विभाग केपास अखिलेश यादव के बंगले पर हुए खर्च का हिसाब भी नहीं है। सूत्रों का कहना है इस बंगले के लिए अलग-अलग मदों में कुल 42 करोड़ रुपये जारी किये गए थे। इसमें राज्य संपत्ति विभाग की ओर से केवल 89.99 लाख रुपये खर्च करना ही विभागीय रिकार्ड में दर्ज है।


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  • राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्ला का कहना है कि बाकी धनराशि का पता लगाया जा रहा है।

  • इसके लिए लोक निर्माण विभाग की मदद ली जा रही है।

  • पीडब्लूडी से भी क्षति का आकलन करने को कहा गया है। रिपोर्ट जल्द ही तैयार की जाएगी।


अखिलेश ने आठ को सौंपी चाबी


सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगले खाली कराये जाने की अंतिम तारीख तीन जून थी। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश ने दो जून को ही बंगला खाली कर दिया लेकिन कुछ सामान रखा होने की बात कहकर उस समय चाबी राज्य संपत्ति विभाग को नहीं सौंपी। राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्ला के अनुसार उन्हें आठ जून को चार विक्रमादित्य मार्ग स्थित सरकारी आवास की चाबी मिली थी। 


 


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