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बस रह गई एक कसक काश यह एक काम और कर पाई होती भाजपा कश्मीर घाटी में



बस रह गई एक कसक काश यह एक काम और कर पाई होती भाजपा कश्मीर घाटी में

राजीव संपादक aapkikhabar

सम्पादकीय ( राजीव ) जम्म काश्मीर में भाजपा के समर्थन से सत्ता में काबिज पीडीपी को सत्ता से बेदखल होना पड़ा लेकिन कुल मिलकर भाजपा ने तीन साल तक देश हित में तो काम किया ही साथ ही काश्मीर के युवाओं को रोज़गार देने के मामले में भी काम किया जो युवा कल तक आतंकी बन रहे थे वही युवाओं को सेना में भर्ती होने का मौका मिला | भाजपा ने सेना में काश्मीर के युवाओं कि बड़े पैमाने पर भर्ती कि और उन्हें आतंकियों से लोहा लेने को तैयार किया |


भाजपा और पीडीपी कि सरकार जब बनी थी तो बड़े मुद्दे थे पीडीपी चाहती थी AFSPA को घाटी से हटाना वहीँ भाजपा चाहती थी कि घाटी से धारा 370 को हटाया जाना लेकिन जब सरकार बनी तब दोनों दलों ने इन डॉन मागों पर साफ्ट कार्नर कर लिया |


यह मोदी सरकार ही थी जिसने बंटवारे के समय भारत में आये तीन लाख हिन्दुओं को मताधिकार दिलाया और उन्हें मुआवजे के तौर पर 2 लाख रूपये भी दिए साथ ही अधिनिवास प्रमाण पत्र भी जारी किये जो आजादी के बाद अब तक कोई भी सरकार नहीं कर पायी थी | वहीँ दूसरी तरफ पश्चिमी पाकिस्तान से आये रोहिंगिया मुसलमानों को मताधिकार प्रयोग करने की इजाजत दी गई थी | हालाकि इस कदम का घाटी में प्रबल विरोध हुआ था |


भाजपा द्वारा जम्मू काश्मीर में शामिल होकर लिए गए बड़े निर्णय



  • सेना के लिए सैनिक कालोनी बनाए गए जो कि पहले नहीं हुआ करते थे |

  • जम्मू काश्मीर के लोकल पुलिस को आपरेशन आल आउट में लगाया |

  • लोकल इंटेलीजेंस आर्मी और लोकल पुलिस को मिलकर संयुक्त प्रयास करके आतंकवाद पर जबरदस्त प्रहार किया |

  • लोकल पुलिस कि भूमिका को बढाया और स्थानीय लोगों द्वारा आतंक का समर्थन करने वालों पर लागम लगे गई |

  • पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को पालने पोषने वाले जिलानी जैसे अलगाववादी नेताओं पर बड़ी कारवाई की

  • भाजपा जो बड़ा कदम नहीं उठा पाई उसमे सबसे बड़ा कदम था घाटी  के परिसीमन का |

  • भाजपा चाहती थी कि घटी का परिसीमन फिर से किया जाए और उसके आधार पर विधानसभा के सीटों का फिर से निर्धारण किया जाए लेकिन पीडीपी के विरोध के चलते यह सफल नहीं हो पाया |


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