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केदारनाथ इतिहास एवं जानिए धरती पर क्यों आए भगवान शिव



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डेस्क-केदारनाथ महादेव स्थान को महाभारत काल का भी बताया जाता है। इसके लिए एक कथा आती है। महाभारत युद्ध में विजयी होने के पश्चात पांडव भ्रात हत्या व अन्य हत्याओं से मुक्ति के लिए भगवान शिव शंकर का साक्षात आशीर्वाद चाहते थे पर शिव महादेव उनसे रुष्ट थे।



  • पांडव उनके दर्शन पाने के लिए काशी (वाराणसी) गए पर उन्हें पा नहीं सके। तब वे शिव शंकर को ढूंढते हुए||

  • हिमालय पहुंचे पर अपने निश्चित स्थान से शिव अंर्तध्यान होकर केदार में आ बसे क्योंकि वे पांडवों को दर्शन देना नहीं चाहते थे।

  • पांडव भी धुन के पक्के निकले। आस्था, श्रद्धा व लगनपूर्वक ढूंढते हुए केदार भी पहुंच गए।

  • तब शिव ने बसाहा बैल का रूप धारण किया और अन्य पशुओं में जा मिले।


पांडवों को शंका हो गई। तब भीमसेन ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पर्वतों पर अपने पैर फैला लिए। सभी गोवंश उनके पैरों के नीचे से निकल गए पर शंकर रूपी बैल नीचे से नहीं निकले, तब भीम बलपूर्वक झपटे और बैल को कसकर पकड़ लिया, तब बैल भूमि मेें समाने लगा।



  • तभी भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ (महादेव शरीर) का हिस्सा पकड़ लिया और नहीं छोड़ा।

  • तब भगवान शंकर ने पांडवों की श्रद्धा, भक्ति, आस्था से प्रसन्न होकर उन्हें प्रकटत: तत्काल दर्शन दिया और उन्हें पाप मुक्त कर दिया।

  • उसी समय से भगवान शिव शंकर रूपी बैल की पीठ (महादेव) की आकृति का पिंड श्री केदारनाथ के नाम से पूजित हुआ।

  • अन्य धर्मग्रंथों और पौराणिक कथाओं में प्रचीन काल से ही बद्रीनाथ को सबसे पवित्र स्थान के तौर पर माना जाता रहा है।

  • यह पवित्र तीर्थ स्थान गढ़वाल की लहरदार पहाडिय़ों में अलकनंदा नदी के किनारे नर-नारायण पर्वत पर स्थित है।

  • कहते हैं भागवान विष्णु जी ने इसे अपने निवास स्थान के रूप में चुना है।

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