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जिला अस्पताल में लावारिस मुर्दो से फ़ैल रहा प्रदूषण



जिला अस्पताल में लावारिस मुर्दो से फ़ैल रहा प्रदूषण

लावारिस मुर्दो

रायबरेली-सरकार ने सरकारी चिकित्सालयों को इसलिए बनवाया की गरीब अमीर हर तबके का आदमी जाकर अपनी बीमारी का इलाज आसानी से चिकित्सालय में करवा सके लेकिन उन अस्पतालों के संचालन की जिम्मेदारी जिन को दी गई वह अपनी जिम्मेदारी से अक्षर मुंह करते नजर आते हैं इसका नतीजा अस्पताल में आने जाने वाले मरीज उनके तीमारदारों और पूरा स्टाफ को भुगतना पड़ता है ऐसा ही मामला हम आज आपको दिखाएंगे उत्तर प्रदेश की VIP जिले रायबरेली के जिला चिकित्सालय का जहां सबों से उठने वाली दुर्गंध से पूरे चिकित्सालय में महामारी फैलने की स्थिति बनी हुई ।


जी हां यह हम नहीं बल्कि यह तस्वीरें हालात खुद ही बयां कर रही तस्वीरों में आप देख सकते हैं अस्पताल में आने जाने वाले तीमारदार और मरीज किस तरह से नाक पर कपड़ा से ढककर निकल रहे हैं यही नहीं वार्ड में लेटे हुए मरीज भी इस दुर्गंध का शिकार यह तस्वीर रायबरेली जिले के जिला चिकित्सालय की है जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज आते हैं और सैकड़ों की संख्या में मरीज यहां पर भर्ती भी रहते हैं मरीज जहां भर्ती होते हैं उन वार्ड से सटी हुई एक मरचुरी बनाई बनाई गई जिसमें कि सब को रखा जाता है लेकिन उन सबको रखने के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे कि उनमें सड़न न पैदा हो और दुर्गंध ना फैले ।


दुर्गंध चिकित्सालय में फैली हुई है यह उन समोसे आ रही है जो Laawaris हैं और लाकर जिला चिकित्सालय की मोर्चरी में डाल दिए गए हैं क्योंकि लावारिस शव को 72 घंटे तक सुरक्षित रखना होता है जिससे कि शायद उनकी शिनाख्त हो जाए लेकिन इसके साथ-साथ एक सवाल यह भी उठता है कि गर्मी के 45 डिग्री के तापमान में क्या यह सब 3 दिन तक सुरक्षित रह पाएंगे और इन में सड़न होने पर जो दुर्गंध फैलेगी विशाल खेलेंगे क्या उनसे अस्पताल का स्टाफ और वहां आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों बच पाएंगे।


इस पूरे मामले पर जब जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से बात की गई तो उन्होंने बताया की हमारे यहां केवल अस्पताल में होने वाली मौतों और जिन मौतों में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता है वही सो रखे जाते हैं और उनकी भी एक निर्धारित अवधि है उसमें पंचनामा भरवा के पुलिस को तत्काल पोस्टमार्टम के लिए भिजवा ना होता है क्योंकि चिकित्सालय में एक ही रेफ्रिजरेटर है और उसमें एक से अधिक से नहीं रखे जा सकते यह जिम्मेदारी पुलिस की होती है इस तरह के जो भी सब हैं उनको पोस्टमार्टम हाउस की मरचुरी में रखवाया जाए लेकिन पुलिस की तरफ से ऐसा कभी भी नहीं किया गया जबकि पुलिस के उच्चाधिकारियों को इससे होने वाली समस्याओं को के बारे में कई बार अवगत कराया जा चुका


इस पूरे मामले पर जब पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मामले को को गंभीर बताते हुए उसकी जांच कराकर निस्तारण कराने की बात कहते हुए कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया सवाल यह उठता है एक तरफ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि उन्होंने पुलिस के अधिकारियों से कई बार शिकायत की लेकिन कोई निस्तारण नहीं हुआ वहीं दूसरी तरफ पुलिस अधीक्षक का कहना है कि जल्द से जल्द निस्तारण कराया जाएगा ऐसे में जिस समस्या का समाधान पिछले काफी समय से नहीं हुआ क्या इस बार हो पाएगा या यूं ही अस्पताल में आने वाले मरीज दिमागदार के साथ-साथ अस्पताल के स्टाफ को इन समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा ।



- mahtab ahmad



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