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क्या आप जानते है गुरू सिद्धि नहीं शुद्धि देते



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आपकी पवित्र चरण रज की पूजा करके मैंने सब कुछ पा लिया


डेस्क-जो लोग गुरु के चरणों की रज को मस्तक पर धारण करते हैं, वे मानो समस्त ऐश्वर्य को अपने वश में कर लेते हैं। इसका अनुभव मेरे समान दूसरे किसी ने नहीं किया। आपकी पवित्र चरण रज की पूजा करके मैंने सब कुछ पा लिया॥


तुम्हारी पहचान तुम्हारे गुरू से होती है, तुम्हारे गुरू कौन है। जैसे ही तुम गुरू की ओर देखते हो तो देखते ही तुम्हारा अपने गुरू के साथ एक कनेक्शन हो जाता है, और जब कनेक्शन होता है तो गुरू के अंदर जो उर्जा होती है वह तुम्हारी ओर ट्रांसफर होना प्रारम्भ हो जाती है। और यदि गुरू पवित्र है तो गुरू का ध्यान करते ही तुम्हारे शरीर में, मन में और जीवन में पवित्रता बहना शुरू हो जाती है।



  • गुरू सिद्धि नहीं शुद्धि देगे । वह तुम्हें संस्कारों की शुद्धि देगे ।

  • वह तुम्हारे एक-एक बुरे कर्म को हटाकर तुम्हारी चेतना को उठाएगे।

  • वह यह कभी नहीं कहेगे , ’कि चलो आज मैं तुम्हें सिद्धि देता हॅू।

  • क्योंकि सब कुछ तुम्हारे ही भीतर समाया हुआ है। सब सिद्धियॉ भी तुम्हारे ही भीतर है|

  • सारे अविष्कार जो हो चुके हैं और जो आगे होने वाले हैं वो सभी तुम्हारे ही भीतर समाये हुऐ हैं।

  • तुम्हें बाहर से कुछ दिया ही नहीं जा सकता।

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