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सती अनुसूइया के सामने क्यों बने त्रिदेव बालक जानिए



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एक दिन देव ऋषि नारद जी बारी-बारी से विष्णुजी


डेस्क-सती अनुसूइया महर्षि अत्री की पत्नी थी। जो अपने पतिव्रता धर्म के कारण सुविख्यात थी। एक दिन देव ऋषि नारद जी बारी-बारी से विष्णुजी, शिव जी और ब्रह्मा जी की अनुपस्थिति में विष्णु लोक, शिवलोक तथा ब्रह्मलोक पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने लक्ष्मी जी, पार्वती जी और सावित्री जी के सामने अनुसुइया के पतिव्रत धर्म की बढ़ चढ़ के प्रशंसा की तथा कहां की समस्त सृष्टि में उससे बढ़ कर कोई पतिव्रता नहीं है। नारद जी की बाते सुनकर तीनो देवियां सोचने लगी की आखिर अनुसुइया के पतिव्रता धर्म में ऐसी क्या बात है जो उसकी चर्चा स्वर्गलोक तक हो रही है तीनों देवीयों को अनुसुइया से ईर्ष्या होने लगी।



  • नारद जी के वहां से चले जाने के बाद सावित्री, लक्ष्मी तथा पार्वती एक जगह इक्ट्ठी हुई ||

  • अनुसूइया के पतिव्रता धर्म को खंडित कराने के बारे में सोचने लगी।

  • उन्होंने निश्चय किया की हम अपने पतियों को वहां भेज कर अनुसूईया का पतिव्रता धर्म खंडित कराएंगे।

  • ब्रह्मा, विष्णु और शिव जब अपने अपने स्थान पर पहुंचे तो तीनों देवियों ने उनसे अनुसूइया का पतिव्रता धर्म खंडित कराने की जिद्द की।

  • तीनों देवों ने बहुत समझाया कि यह पाप हमसे मत करवाओ।

  • परंतु तीनों देवियों ने उनकी एक ना सुनी और अंत में तीनो देवो को इसके लिए राज़ी होना पड़ा।

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