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हिन्दुओ के सोलह Sanskar का अर्थ उद्देश्य जानिए



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जिससे वह समाज का श्रेष्ठ आचारवान्‌ नागरिक बन सके


डेस्क-Sanskar  शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों में किया जाता है। संस्कृत वाङ्‌मय में इसका प्रयोग शिक्षा, संस्कृति, प्रशिक्षण, सौजन्य पूर्णता, व्याकरण संबंधी शुद्धि, संस्करण, परिष्करण, शोभा आभूषण, प्रभाव, स्वरूप, स्वभाव, क्रिया, फलशक्ति, शुद्धि क्रिया, धार्मिक विधि विधान, अभिषेक, विचार भावना, धारणा, कार्य का परिणाम, क्रिया की विशेषता आदि व्यापक अर्थों में किया जाता है।


Sanskar शब्द अपने विशिष्ट अर्थ समूह को व्यक्त करता और उक्त सम्पूर्ण अर्थ इस शब्द में समाहित हो गये हैं। संस्कार, शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक शुद्धि के लिए किये जाने वाले अनुष्ठानों का श्रेष्ठ आचार है। इस अनुष्ठान प्रक्रिया से मनुष्य की बाह्याभ्यन्तर शुद्धि होती है जिससे वह समाज का श्रेष्ठ आचारवान्‌ नागरिक बन सके।


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हिन्दू Sanskar में अनेक वैचारिक और धार्मिक विधियां सन्निविष्ट कर दी गयी हैं जिससे बाह्य परिष्कार के साथ ही व्यक्ति में सदाचार की पूर्णता का भी विकास हो सके। सविधि संस्कारों के अनुष्ठान से संस्कृत व्यक्ति में विलक्षण तथा अवर्णनीय गुणों का प्रादुर्भाव हो जाता हैङ्क



Sanskar  की संखया-संस्कारों के शास्त्रीय प्रयोग के सम्बन्ध में गृह्यसूत्रों को ही प्रमाण माना गया है। प्राचीन गृह्य सूत्रों में पारस्कर गृह्य सूत्र, अश्वलायन गृह्य सूत्र,बोधायन गृह्य सूत्र विशेष रूप से प्रामाणिक रूप से Sanskar के अनुष्ठानों का विवरण, महत्त्व और मंत्रों का विवरण प्रस्तुत करते हैं। इनके अतिरिक्त पुराण सहित्य और विभिन्न स्मृतियां भी संस्कारों के आचार के संबंध तथा उनके महत्त्व का प्रतिपादन करती हैं। धर्म सूत्रों और धर्मशास्त्राों में भी इनके समन्वित रूपों का प्रतिपादन किया गया है। विभिन्न गृह्यसूत्रों एवं स्मृतियों में Sanskar की संखया में मतैक्य नहीं हैं तदपि परवर्ती काल में संस्कारों की संखया का निर्धारण कर दिया गया। इन Sanskar में जन्मपूर्व सलेकर बाल्यकाल के 10 संस्कार और शेष 6 शैक्षणिक तथा अन्त्येष्टि पर्यन्त के संस्कार परिगणित हैं।


1. गर्भाधान                2. पुंसवन


3. सीमन्तोन्नयन         4. जात कर्म


5. नामकरण               6. निष्क्रमण


7. अन्नप्राशन             8. चूड़ाकरण


9. कर्णवेध                10. विद्यारम्भ


11. उपनयन             12. वेदारंभ


13. केशान्त             14. समावर्तन


15. विवाह               16. अन्त्येष्टि

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