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सुप्रीम कोर्ट ने कहा समानता के अधिकार पर पति के बराबर पत्नी का भी अधिकार है



सुप्रीम कोर्ट ने कहा समानता के अधिकार पर पति के बराबर पत्नी का भी अधिकार है

Supreme Cour

डेस्क-आईपीसी की धारा-497 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कानून का समर्थन किया है। सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से एएसजी पिंकी आंनद ने कहा था कि अपने समाज में हो रहे विकास और बदलाव को लेकर कानून को देखना चाहिए न कि पश्चिमी समाज के नजरिए से।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्नी का मालिक पति नहीं होता है। मुख्य न्यायाधीश अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पति पत्नी के रिश्ते की खूबसूरती होती है मैं, तुम और हम। समानता के अधिकार के तहत पति पत्नी को बराबर का अधिकार है।






मौलिक अधिकारों के पैरामीटर में महिलाओं के अधिकार शामिल होना चाहिए। एक पवित्र समाज में व्यक्तिगत गरिमा महत्वपूर्ण है। सिस्टम महिलाओं को असमान रूप से इलाज नहीं कर सकता है। महिलाओं को यह सोचने के लिए नहीं कहा जा सकता कि समाज क्या चाहता है सीजेआई ने धारा 497 (व्यभिचार) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाया।






जब तक यह आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उत्थान) के दायरे को आकर्षित नहीं करता है, तब तक व्यभिचार एक अपराध नहीं हो सकता है सीजेआई दीपक मिश्रा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 497 (व्यभिचार) की वैधता पर फैसले पढ़ने का फैसला सुनाया |






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