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ODF के नाम पर हो रहा खेल अभी भी जारी है खुले में शौच



ODF के नाम पर हो रहा खेल अभी भी जारी है खुले में शौच

ODF

ओडीएफ का दावा खोखला ,नहीं हो पाई घोषणा


 पीलीभीत (सौरभ दीक्षित) भले ही प्रधानमंत्री हर घर मे शौचालय बनवाने का सपना देख रहे हो पर जिला पीलीभीत की सच्चाई कुछ और ही बयां करती है पीलीभीत में ओडीएफ के वादे की जमीनी हकीकत कुछ और ही है।


आज भी ग्रामीण खुले में शौच करने पर मजबूर हैं जिसे देख कर साफ जाहिर है की ओडीएफ के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई ही चल रही है। पीलीभीत में ओडीएफ जिला होने की घोषणा 2 अक्टूबर को होनी थी जिसका डर था वही हुआ, दो अक्टूबर पर दिन के दिन काम पूरा नहीं हो सका और अब तारीख आगे बढ़ा दी गई है।


शौचालयों का निर्माण अधूरा होने पर अपना जिला ओडीएफ घोषित होने से दूर रह गया। अधिकारी 20 दिन में काम पूरा कराने के दावे कर जिला ओडीएफ घोषित करने की बात कह रहे हैं। कहीं ना कहीं जिला पीलीभीत ओडीएफ घोषित ना हो पाना अधिकारियों की लापरवाही को बयां करता है।



सूत्रों की माने तो जिले में काफी संख्या में शौचालयों का निर्माण अधूरा है। कुछ लाभार्थियों के खाते में अभी तक धनराशि ही नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में जिला पीलीभीत कैसे ओडीएफ हो पाएगा जिला प्रशासन पीलीभीत में ऑडियो घोषणा की तारीख 2 अक्टूबर रखी थी।पर मंगलवार को जिला ओडीएफ घोषित नहीं हो सका। दो अक्टूबर तक जिला ओडीएफ घोषित करने के दावे खोखले साबित हुए।


समय से ओडीएफ कराने को लेकर शासन ने भले ही सख्त निर्देश दिए हो , पर जिले के अधिकारियों पर इसका असर नहीं हुआ । यही वजह रही कि समय पूरा होने के बाद भी जिला पीलीभीत ओडीएफ घोषित होने से रह गया। भले ही खुले में शौच मुक्त को भारत लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने बड़ा अभियान चला रखा हो पर यह अभियान जिला पीलीभीत में फेल होता नजर आ रहा है ।


जिले में अभी भी शौचालय अधूरे हैं। कई लाभार्थियों के खाते में धनराशि नहीं पहुंच पाई है। लक्ष्य पूरा होने पर जिला ओडीएफ घोषित हो जाता पर मंगलवार तक यही लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।


चार हजार लाभार्थियों के खातों में नहीं पहुंची धनराशि


शौचालयों का निर्माण कर समय से पूरा कराने के लिए शासनस्तर से जिले को भरपूर धनराशि भेजी गई। पर कहीं ना कहीं अधिकारियों की लापरवाही के चलते करीब चार हजार लाभार्थियों के खाते में शौचालय की धनराशि नहीं पहुंची। जबकि विभाग से यह धनराशि भेज दी गई है। अब सवाल यह उठता है कि जब विभाग से धनराशि भेजी तो वह गई कहां।



डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि ओडीएफ अभियान को लेकर प्रशासन गंभीर है, अभी कुछ शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका। यही वजह रही कि दो अक्टूबर को अपना जिला ओडीएफ घोषित नहीं हो सका। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही कार्य पूरा हो। हालांकि अन्य जिलों की अपेक्षा अपने जिले में शौचालय निर्माण की प्रगति काफी अच्छी है।


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