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क्या है अमिताभ नाम का मतलब -जन्मदिन विशेष



क्या है अमिताभ नाम का मतलब -जन्मदिन विशेष

अमिताभ बच्चन

हिन्दी सिनेमा के शहंशाह को जन्मदिन की शुभकामनाएं, 'बिग-बी तुम जियो हजारों साल'


अपने सांवले रंग और लंबे कद से दुनिया को अपना दीवाना बनाने वाले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का जन्मदिन सबके लिए खास है। उन्होंने कई दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया है।


उनकी कड़ी मेहनत और उत्साह ने उन्हें आज उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां पहुंचने का सपना उन्होंने कभी संजोया न था। इलाहाबादी अमिताभ संघर्ष कर बॉलीवुड का शहंशाह बनने का जीता-जागता उदाहरण हैं।


अमिताभ बच्चन के संघर्ष और सफलता की कहानी जितनी आश्चर्यजनक है, उतनी ही रोमांचक भी, जितनी अविश्वसनीय है, उतनी ही सम्मोहक भी। अमिताभ आज 76 साल के हो गए हैं, लेकिन आज भी उनमें काम करने की लगन वही देखी जा सकती है। वह आज भी काम को लेकर उतने ही उत्साहित हैं।


अमिताभ का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहबाद में हुआ। बच्चन कायस्थ परिवार से संबंध रखते हैं। प्रसिद्ध हिंदी कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन उनके पिता थे। उनकी मां तेजी बच्चन को थिएटर में गहरी रुचि थी, फिर भी उन्होंने घर संभालना ही पसंद किया। साल 2003 में अमिताभ के सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि उनकी मां ने 21 दिसंबर 2007 को उन्हें अलविदा कहा। उनका मां के प्रति हमेशा से गहरा लगाव रहा।


आज 11 अक्टूबर को बिग बी 76 साल के हो गए हें। इस बार का जन्मदिन उन्होंने सादगी से मनाने के पीछे कारण कृष्णा कपूर के निधन को बताया है। हाल ही में राज कपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का निधन हुआ है और रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी वजह से बिग बी अपने बर्थडे पर कोई शोर-शराबा नहीं चाह रहे हैं।


वैसे बिग-बी अक्सर अपने जन्मदिन पर इस तरह के फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं. बीते साल उनकी बहू ऐश्वर्या राय के पिता कृष्णाराज राय का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। इसी के चलते उन्होंने फेसुबक पर खासतौर पर ये जानकारी शेयर की थी कि वह इस साल न ही जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे ना ही धूम-धड़ाके से दीवाली मनाएंगे।


अमिताभ का अर्थ है 'कभी न बुझने वाली लौ' और उन्होंने अपने नाम का अर्थ सार्थक कर दिखाया। अमिताभ ऐसा नाम है, जिन्हें आज की युवा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियां अपना आदर्श मान सकती हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा के इतिहास में प्रमुख व्यक्ति बनने के लिए संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ा।


उन्हें अपने करियर की शुरुआत में कई उपहास सहने पड़े। उन्हें कुछ फिल्मों से तो सिर्फ उनके लंबे कद की वजह से हाथ धोना पड़ा। उनकी अवाज को लेकर भी मजाक उड़ाया गया। 'जब-जब जग उस पर हंसा है, तब तब इतिहास रचा है' उन्होंने यह सच कर दिखाया। लंबा कद और बुलंद आवाज उन्हें सबसे खास बनाती है। उन्होंने बॉलीवुड में 'बाबुल' जैसी फिल्म में किसी दूसरे को अपनी आवाज भी दी है।



कहते हैं कि कागज अपनी किस्मत से उड़ता है, लेकिन पतंग अपनी काबलियत से उड़ती है। दोस्तों अमिताभ जी को पतंग कहा जा सकता है, क्योंकि उन्होंने अपनी कामयाबी से दुनिया को जीत लिया। अमिताभ बच्चन की शादी अभिनेत्री जया भादुड़ी से हुई। उनसे उनकी पहली मुलाकात पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में हुई थी। अमिताभ की एक बेटी श्वेता नंदा और बेटा अभिषेक बच्चन हैं। दोनों की शादी हो गई है। अमिताभ का एक नाती, एक नातिन और एक पोती आराध्या भी है।


अभिताभ ने हिंदी सिनेमा में 'जंजीर', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'खुदा गवाह', 'कुली', 'कुंवारा बाप', 'फरार', 'शोले', 'चुपके चुपके', 'कसमें वादे', 'त्रिशूल', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'मि. नटवरलाल', 'काला पत्थर', 'दोस्ताना', 'सिलसिला', 'शान', 'लावारिस' और 'शक्ति' जैसी मशहूर फिल्मों में काम किया। इसके अलावा उन्होंने 'कौन बनेगा करोड़पति' जैसे कई रियलिटी शो से भी दर्शकों को अपना दिवाना बनाया। अमिताभ ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।


अमिताभ को चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने 15 फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीते हैं.अमिताभ पद्म श्री (1984) , पद्म भूषण (2001), पद्म विभूषण (2015) भी प्राप्त कर चुके हैं. इन दिनों वह छोटे पर्दे पर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेजबानी करते नजर आ रहे हैं।


उन्होंने अपने जीवनकाल में खूब सुर्खियां बटोरीं। वह अभिनेत्री रेखा के साथ रिश्ते को लेकर भी चर्चा में रहे। बताया जाता है कि रेखा दिल ही दिल में अमिताभ को चाहती थीं, लेकिन अमिताभ कभी इस रिश्ते को लेकर आगे नहीं बढ़े।


युवा उनके आदर्शों को लेकर जीवन में आगे बढ़ने के सपने संजो सकते हैं, क्योंकि वक्त कब, कहां, किसका कैसे बदल जाए यह कोई नहीं बता सकता। जिस तरह अमिताभ ने अपने जीवन के कांटों को पार कर ऐसी जगह जा पहुंचे, जिससे वह सभी की आंखों का तारा बन गए हैं, वैसे ही हमें भी जीवन में उनके उदाहरण लेकर कठिन से कठिन राह को चुनकर उसे पार करना चाहिए।


पहले ज्यादातर क‍मर्शियल फिल्में जवान किरदार को ध्यान में रखकर ही लिखी जाती थीं। जब अमिताभ उस उम्र को पार कर गए तो फिल्मकारों ने उनकी उम्र को ध्यान में रखकर फिल्म बनाना शुरू कर दिया। कहानी के हिसाब से कलाकारों का चयन नहीं बल्कि कलाकार को ध्यान में रखकर कहानी चुनी या लिखी गई।


कई लोगों का मानना है कि करियर और अभिनय के लिहाज से यह अमिताभ का श्रेष्ठ समय है। ‘जंजीर’ के बाद वे टाइप्ड हो गए थे। स्टार जरूर वे बन गए थे, लेकिन अभिनेता के रूप में उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था।


वर्तमान में अभिनेता अमिताभ को विविध तरह की भूमिकाएँ निभाने को मिल रही हैं। ‘सरकार राज’, ‘चीनी कम’, ‘द लास्ट लियर’, ‘नि:शब्द’, ‘ब्लैक’ जैसी कई फिल्मों में बिग-बी ने अलग-अलग किरदारों को कुशलतापूर्वक निभाया है। जवान अभिषेक से बूढ़े अमिताभ अभिनय और स्टार वैल्यू में मीलों आगे हैं।


इतने लंबे समय तक लोकप्रियता शायद ही किसी दूसरे बॉलीवुड के कलाकार को मिली हो। दुनिया के हर कोने में उनके प्रशंसक मौजूद हैं। कितने ही स्टार यह दावा कर ले कि वे नंबर वन हैं, लेकिन अमिताभ जिस ऊँचाई पर हैं, वे उस ऊँचाई का आधा भी नहीं पहुँचे हैं।


बिग-बी, आप इसी तरह करोड़ों लोगों का अपने अभिनय के जरिए मनोरंजन करते रहें। आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
पंडित दयानंद शास्त्री


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