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कार्तिक पूर्णिमा को ये उपाय करने से मां लक्ष्मी होगी प्रसन्न



कार्तिक पूर्णिमा को ये उपाय करने से मां लक्ष्मी होगी प्रसन्न

कार्तिक पूर्णिमा

 


कार्तिक के पूरे माह में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके तुलसी को जल चढ़ाने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है|


डेस्क-ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की कार्तिक मास में शुद्ध घी, तिलों के तेल और सरसों के तेल का दीपक जलाने से अश्वतमेघ यज्ञ जितना पुण्य प्राप्त होता है। इस माह में दीपदान करने से भगवान विष्णुक भी प्रसन्नन होते हैं।


हिंदू धर्म शास्त्रों में भी कहा गया है कि – मित्राण्यमित्रतां यान्ति यस्य न स्यु: कपर्दका:।



अर्थात किसी व्यक्ति के पास धन-संपत्ति का अभाव होने पर उसके मित्र भी उसका साथ छोड़ देते है। प्राचीन मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जी को ऐश्वर्य और वैभव की देवी कहा गया है। परंतु व्यक्ति को वैभव, ऐश्वर्य के साथ आनंद और सुख तभी मिलता है जब वह पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ धन कमाता है।



  • इस महीने में लक्ष्मी जी के समक्ष दीप जलाने का भी अत्यधिक महत्व है।

  • यह दीप जीवन के अंधकार को दूर कर, आशा की रोशनी देने का प्रतीक माना जाता है।

  • कार्तिक माह में घर के मंदिर, नदी के तट एवं शयन कक्ष में दीप जलाने का महत्व पाया गया है।

  • यमुना जी पर कार्तिक स्नान का समापन करके भगवान श्री कृष्ण जी का राधा जी सहित पूजन करके दीपदान करना चाहिए।

  • ऐसा करने से श्री कृष्ण जी की भक्ति प्राप्त होती है।

  • इस प्रकार कार्तिक पूर्णिमा के महापर्व का लाभ उठाएं। इस पुनीत अवसर पर श्रद्धा तथा विश्वास पूर्वक पूजा पाठ और हवन इत्यादि करें।

  • कार्तिक के पूरे माह में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके तुलसी को जल चढ़ाने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

  • इस माह में तुलसी के पौधे को दान करना भी शुभ माना गया है।

  • माँ लक्ष्मी को गन्ना, अनार व सीताफल चढ़ाएँ। सम्भव हो तो इस दिन मंदिर में भंडारा करवाएं। दीपदान संध्याकाल में ही करें।



 कार्तिक माह में तुलसी का पूजन



  • कार्तिक माह में तुलसी का पूजन और सेवन करने से घर में सदा सुख-शांति बनी रहती है।

  • तुलसी की कृपा से आपके घर से नकारात्मसक शक्ति दूर रहती है।

  • इन दिनों दरिद्रता के नाश के लिए पीपल के पत्ते पर दीपक जलाकर नदी में प्रवाहित करें।

  • शाम के समय ‘वसंतबान्धव विभो शीतांशो स्वस्ति न: कुरू’ मंत्र बोलते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान श्रेष्ठ कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के

  • संबंध में ऋषि अंगिरा ने लिखा है कि इस दिन सबसे पहले हाथ-पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें। 

  • यदि स्नान में कुश और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फलों से सम्पूर्ण पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है।

  • ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की दान देते समय जातक हाथ में जल लेकर ही दान करें।

  • स्नान करने से असीम पुण्य मिलता है गृहस्थ व्यक्ति को तिल व आंवले का चूर्ण लगाकर स्नान करने से असीम पुण्य मिलता है। 


 इन  मन्त्रों का करे जप 



  • विधवा तथा सन्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मिट्टी को लगाकर स्नान करना चाहिए।

  • इस दौरान भगवान विष्णु के ऊं अच्युताय नम:, ऊं केशवाय नम:, ऊॅ अनंताय नम: मन्त्रों का जाप करना चाहिए। 

  • पूर्णिमा मां लक्ष्मी को अत्यन्त प्रिय है। इस दिन मां लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में खुशियों की कमी नहीं रहती है।

  • पूर्णिमा को प्रात: 5 बजे से 10:30 मिनट तक मां लक्ष्मी का पीपल के वृक्ष पर निवास रहता है।


मां लक्ष्मी को कैसे करे प्रसन्न



  • इस दिन जो भी जातक मीठे जल में दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाता है उस पर मां लक्ष्मीप्रसन्न होती है। 

  • प्रातः काल उठकर व्रत रहने का संकल्प लें। 

  • गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कीजिए। 

  • श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। 

  • श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें। 


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कार्तिक पूर्णिमा को घर के मुख्यद्वार पर आम के पत्तों से बनाया हुआ तोरण  लगाना चाहिए



  • इस पवित्र दिन पर चंद्रोदय के समय शिवा, सम्भूति, प्रीति, अनुसुइया तथा छमा इन 6 कृतिकाओं का पूजन करें।
    कार्तिक पूर्णिमा के गरीबों को चावल दान करने से चन्द्र ग्रह शुभ फल देता है।

  • दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, शहद व गंगाजल मिलकार चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते है। 

  • ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की कार्तिक पूर्णिमा को घर के मुख्यद्वार पर आम के पत्तों से बनाया हुआ तोरण अवश्य बांधे।

  • वैवाहिक व्यक्ति पूर्णिमा के दिन भूलकर भी अपनी पत्नी या अन्य किसी से शारीरिक सम्बन्ध न बनाएं, अन्यथा चन्द्रमा के दुष्प्रभाव आपको व्यथित करेंगे। 

  • आज के दिन चन्द्रमा के उदय होने के बाद खीर में मिश्री व गंगा जल मिलाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें। 



जानिए Karthik Purnima 2018 कब है? कार्तिक महीने का महत्व और उसे जुडी महत्वपूर्ण बाते


 


पंडित दयानन्द शास्त्री


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