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महामृत्युंजय मंत्र जीवन में अनेक विघ्नों से रक्षा करता है



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डेस्क-महामृत्युंजय मंत्र चमत्कारी एवं शक्तिशाली मंत्र है। जीवन की अनेक समस्याओं को सुलझाने में यह सहायक है। किसी ग्रह का दोष जीवन में बाधा पहुंचा रहा है तो यह मंत्र उस दोष को दूर कर देता है।


महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का एक श्लोक है। शिव को मृत्युंजय के रूप में समर्पित ये महान मंत्र ऋग्वेद में पाया जाता है। शास्त्रों की मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र चमत्कारी एवं शक्तिशाली मंत्र है। जीवन की अनेक समस्याओं को सुलझाने में यह सहायक है। अगर मन में श्रद्धा हो तो क ठिन समस्याएं भी इससे सुलझ जाती हैं। यह ग्रहों की शांति में भी अहम भूमिका निभाता है। चूंकि हमारा जीवन नवग्रहों की चाल से प्रभावित होता है, इसलिए अगर किसी ग्रह का दोष जीवन में बाधा पहुंचा रहा है तो यह मंत्र उस दोष को दूर कर देता है।


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मंत्र जप की विधि


महा मृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण सवा लाख है और लघु मृत्युंजय मंत्र की 11 लाख है। इस मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला पर सोमवार से शुरू किया जाता है। जप सुबह १२ बजे से पहले होना चाहिए, क्योंकि ऐसी मान्यता है की दोपहर 12 बजे के बाद इस मंत्र के जप का फल नहीं प्राप्त होता है।



  • अंत में हवन हो सके तो श्रेष्ठ है। ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा, रोग, जमीन-जायदाद का विवाद

  • हानि की सम्भावना या धन-हानि हो रही हो, वर-वधू के मेलापक दोष, घर में कलह

  • सजा का भय या सजा होने पर,कोई धार्मिक अपराध होने

  • पर और अपने समस्त पापों के नाश के लिए महामृत्युंजय या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप किया या कराया जा सकता है

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