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 SC से  मिली बड़ी राहत,CBI निदेशक पर बने रहेंगे आलोक वर्मा 



 SC से  मिली बड़ी राहत,CBI निदेशक पर बने रहेंगे आलोक वर्मा 

 आलोक वर्मा

 CBI के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने पूर्व जॉइंट डायरेक्टर राकेश अस्थाना के साथ विवाद के चलते शक्तियां छीने जाने और छुट्टी पर भेजने के खिलाफ याचिका दायर की थी।


डेस्क-सीबीआई बनाम सीबीआई के चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया ।जस्टिस संजय किशन कौल ने सरकार के आदेश के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि आलोक वर्मा को हटाने से पहले सलेक्ट कमेटी से सहमति लेना चाहिए।


कोर्ट ने केंद्र के फैसले को पलटते हुए आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का आदेश निरस्त किया। आलोक वर्मा को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है और वह CBI निदेशक पर पर बने रहेंगे। सुप्रीम फैसले के बाद आलोक वर्मा के वकील ने कहा- हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा था। इस फैसले ने यह साबित किया जब तक कोर्ट है तब तक किसी के साथ कुछ गलत नहीं होगा। यह फैसला संवैधानिक संस्थाओं की जीत है। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि आलोक वर्मा अभी नीतिगत फैसले नहीं लेंगे और अगर जरूरत हो तो उच्च स्तरीय कमिटी वर्मा के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।


 CBI के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने पूर्व जॉइंट डायरेक्टर राकेश अस्थाना के साथ विवाद के चलते शक्तियां छीने जाने और छुट्टी पर भेजने के खिलाफ याचिका दायर की थी। अस्थाना और वर्मा के बीच करप्शन को लेकर छिड़ी जंग के सार्वजनिक होने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था।


वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने पिछले साल 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेज दिया था। दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही केंद्र ने ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी के निदेशक का अस्थायी कार्यभार सौंप दिया था।


छह दिसंबर को याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई थी



  • मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, संजय किशन कौल और केएम जोसेफ की पीठ ने पिछले साल छह दिसंबर को याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी।

  • पीठ ने वर्मा, केंद्र सरकार, केंद्रीय सतर्कता आयोग और अन्य की दलील सुनने के बाद कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा।

  • कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की याचिका पर भी सुनवाई की थी। इस संगठन ने न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से राकेश अस्थाना सहित जांच ब्यूरो के तमाम

  • अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का अनुरोध किया था।

  • न्यायालय ने जांच ब्यूरो की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्रीय सतर्कता आयोग को कैबिनेट सचिव से मिले पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच दो सप्ताह के भीतर पूरी करके अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपने का निर्देश दिया था।

  • इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एके पटनायक को सीवीसी जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था|


 


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