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232 अध्यापकों के सृजित पद पर 32 के सहारे चल रहे स्कूल



232 अध्यापकों के सृजित पद पर 32 के सहारे चल रहे स्कूल

माध्यमिक विद्यालय

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को सभी विषयों की तालीम बना दिवास्वप्न


 


बलरामपुर -एक तरफ जहां प्रदेश सरकार राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के भवनों पर अरबो रुपए खर्च कर चुकी है। लेकिन दूसरी तरफ शिक्षकों के अकाल होने से राजकीय विद्यालयों का संचालन सिर्फ खानापूर्ति के सिवा कुछ नहीं रह गया है। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों को सभी विषयों की तालीम मिलना आसान नहीं रहा है। जिले के कई राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुखिया विहीन बने हुए सरकार के सबको शिक्षित करने के दावे को मुंह चिढ़ा रहे हैं।


14 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुखिया विहीन



जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग से 18 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय व 4 राजकीय इंटर कॉलेज संचालित है इंटर कॉलेजों में तो शिक्षकों की कमी थी ही कितने विषय हैं उतने शिक्षक किसी भी राजकीय इंटर कॉलेज में तैनात नहीं है इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। बच्चों को विषयवार शिक्षा मिलने का दावा कितना सही है। राजकीय इंटर कॉलेज की तो हाल तो कुछ हद तक सही है जिले में 18 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित है। इनमें 14 विद्यालय उधारी के शिक्षक से चल रहे हैं यह उधारी शिक्षक राजकीय इंटर कॉलेज के है। जो प्रत्येक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक एक अध्यापक के रूप में संबंध होकर स्कूलों का संचालन कर रहे हैं यह सभी स्कूल मुखिया विहीन के साथ साथ संबद्धता वाले अध्यापकों के सहारे चल रहे हैं वहीं 8 विद्यालयों के राजकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में शासन से एक-एक शिक्षक तैनात है शिक्षकों की भारी कमी के चलते राजकीय स्कूलों की पढ़ाई राम भरोसे कहा जाना अतिशयोक्ति नहीं होगा माध्यमिक शिक्षा महकमा सिर्फ विद्यालयों का संचालन के सिवाय उत्तम तालीम देने में विफल साबित हो रहा है ।



जीआईसी व राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में तीन हजार से अधिक छात्रों का भविष्य एकल अध्यापकों के सहारे


जिले में चार राजकीय इंटर कॉलेज व 18 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित है। राजकीय इंटर कॉलेज छठवीं कक्षा से इंटरमीडिएट तक चल रहे हैं ।वही राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैं सिर्फ नौवीं और दसवीं के छात्र को तालीम दी जा रही है। प्रत्येक विद्यालय में प्रिंसिपल लेकर कम से कम 8 अध्यापक होने चाहिए आलम यह है कि जिले के 22 विद्यालयों में चार राजकीय इंटर कॉलेज को छोड़कर 18 में शिक्षकों का ही अकाल है सिर्फ एक शिक्षक के सहारे सारे स्कूल चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को सभी विषयों की तालीम देने का दावा सिर्फ हवा हवाई साबित हो रहा है।



32 अध्यापकों के सहारे चल रहे जिले के 22 राजकीय विद्यालय


इसे शासन की लापरवाही कहा जाए या विभागीय उदासीनता जो बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है जिले में संचालित 22 राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों का 232 पद सृजित है। इन पदों के सापेक्ष मात्र 32 अध्यापक 22 स्कूलों में कार्य करके बच्चों को सिर्फ शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं शिक्षकों का भारी अकाल होने के बाद भी जनप्रतिनिधियों सहित जिला प्रशासन कान में तेल डाले मूकदर्शक बना हुआ है ।


अधिकारी बोले


डीआइओएस महेंद्र नाथ का कहनअ है कि जिले के राजकीय इंटर कॉलेज व राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है इस कमी को दूर करने के लिए शासन स्तर पर कई बार लिखा पढ़ी की गई है इतना ही नहीं कई राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुखिया विहीन व शिक्षक विहीन होने के कारण राजकीय इंटर कॉलेज के शिक्षक के संबद्धता से संचालित है समस्या के संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को अवगत कराया जा चुका है ।



रिपोर्ट अविनाश पाण्डेय


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