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सरकार का फर्मान पूर्व -सीबीआई निदेशक आलोक कुमार को दोबारा ज्वाइन करना ही होगा



सरकार का फर्मान पूर्व -सीबीआई निदेशक आलोक कुमार को दोबारा ज्वाइन करना ही होगा

आलोक कुमार

 




आलोक वर्मा की इस हिमाकत पर होम विभाग ने इसे अपने आदेश की तौहीन समझी।

नयी दिल्ली। पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की परेशानियां कम होती नहीं दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आलोक वर्मा को सरकार ने सीबीआई के निदेशक पद पर ज्वाइन तो करा लिया लेकिन ठीक दो दिन बाद ही उनका तबादला फायर व होमगार्ड विभाग में कर दिया। 

 

इस पर तिलमिलाये आलोक वर्मा ने नयी तैनाती पर ज्वाइन करने के बजाय होम विभाग के डीओपीटी को अपना इस्तीफा भेज दिया। आलोक वर्मा की इस हिमाकत पर होम विभाग ने इसे अपने आदेश की तौहीन समझी। उन्होंने आलोक वर्मा के इस्तीफे को नामंजूर करते हुए यह आदेश किया कि आलोक वर्मा को तैनाती वाले पद पर ज्वाइन करना ही होगा भले एक दिन के लिये ही क्यों नहीं।


 

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डाइरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच आरोप प्रत्यारोपों का दौर काफी समय से चल रहा था। दोनों ही एक दूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगा रहे थे। इससे सीबीआई की देश विदेश में काफी फजीहत हो रही थी। इस पर होम डिपार्टमेंट ने दोनों को ही फोर्सलीव पर भेज दिया था। उनकी जगह पर आईपीएस एन नागेश्वर राव को सीबीआई का कार्यवाहक निदेशक बना दिया। सरकार के इस फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा कोर्ट चले गये। कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को गलत बताते हुए आलोक वर्मा के पक्ष में निर्णय दे दिया।

 

कोर्ट ने यह कहा कि चूंकि सीबीआई निदेशक के पद पर नियुक्ति या तबादले पर सुप्रीमकोर्ट के जज पीएम और लोकसभा नेता की सहमति जरूरी होती है जबकि आलोक वर्मा का तबादला पीएमओ के आदेश पर रात के 2 बजे किया गया था। इस पर राजनीतिक गलियारे में काफी चर्चा रही। मोदी सरकार की सीबीआई विभाग में हो रही अनियमितताओं को लेकर काफी किरकिरी हो रही थी। अपने तबादले की खबर पा कर आलोक वर्मा ने डीओपीटी को अपने पत्र में लिखा कि उनका कार्यकाल 2017 में ही खत्म हो गया था। कार्यकाल बढ़ने की दशा में मैं 31 जनवरी को सेवा मुक्त हो रहा हूं। अतः दो चार दिनों के लिये मेरा तबादला किया जाना तर्कसंगत नहीं है। ऐसा लग रहा है कि मेरे प्रति दुर्भावना के चलते सीबीआई से होमगार्ड एवं फायर विभाग में किया गया। अतः मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। लेकिन गृह विभाग इतनी आसानी से आलोक वर्मा को पदमुक्त नहीं करना चाह रहा है। विभागीय पत्र में यह लिखा है कि आलोक वर्मा ने सर्विस लाॅ के तहत तबादले की जगह ज्वाइन न करके नियम का उल्लंघन किया है अतः उन्हें आदेश दिया जाता है कि वो तत्काल नयी जगह पर ज्वाइनिंग करें अन्यथा उनकी पेंशन व अन्य सुविधायें रोकी जा सकती हैं।

 



 

विनय गोयल 

 


 



 

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