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लेडी हिटलर मायावती पर संकट के बादल



लेडी हिटलर मायावती पर संकट के बादल

सुप्रीमो मायावती

 





 

 मायावती को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने एक ऐतिहसिक फैसला सुनाया है। इस फैसले में सीजेआई रंजन गोगोई ने यह कहा कि जनता के रुपयों से यदि कोई अपनी तारीफ और प्रशंसा के साथ अपनी पार्टी के लोगो हाथी का काम करवाता है तोउसे उस धन की भरपायी करनी चाहिये। मायावती के वकील से सुप्रीमकोर्ट कहा कि मायावती से कहिये कि वो 5919 करोड़ की रकम राजकोष में जमा करवाये।

 

इस मामले में अधिवक्ता रविकांत ने एक जनहित याचिका 2009 में सुप्रीमकोर्ट में डाली थी।मायावती ने 2007-12 के शासन काल में उत्तर प्रदेश के राजधानी लखनऊ कई शहरों में अपनी व पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी की कई प्रतिमाएं लगवायी थीं। इन सबमें लगभग सात सौ करोड़ रुपये की लागत आयी थी। इतना ही नहीं इन प्रतिमाओं की देखभाल करने के लिये काफी संख्या में कर्मचारी भी नियुक्त किये गये। इन प्रतिमाओं के कारण मायावती और बसपा दोनों ही देश विदेश में  चर्चा की विषय बनीं थी। दो जून 1995 का वह काला दिन मायावती शायद ही वो दिन कभी भुला पायेंगी। कभी मायावती के सहयोगी दल रहे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बहनजी से इस कदर खफा हुए कि सरकारी गेस्ट हाउस में उनकी इज्जत पर हमला कर बैठे। लेकिन यूपी के फर्रुखाबाद के भाजपा विधायक ब्रह्मदत्त द्विवदी ने ऐसे कठिन समय में मायावती की आबरू बचाने में मदद की थी।


बसपा सुप्रीमो मायावती गाहे बगाहे चर्चा में आ ही जाती हैं। अभी कुछ दिनों पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर लोकसभा के चुनाव लड़ने की घोषणा कर सबको चैंका दिया था। यह वही मायावती हैं लिये जिन्होंने सत्ता के लिये मुलायम सिंह से भी हाथ मिले थे यह बात और है कि यह गठबंधन ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाया था। हलात इतने बिगड़े कि मुलायम और मायावती ने एक दूसरे को गुण्डा गुण्डी तक कहह डाला था। इतना ही नहीं उन्होंने सत्ता पाने के लिये भारतीय जनता पार्टी से भी गठजोड़ किया था। भारतीय जनता पार्ट के दिग्गज नेता और वर्तमान बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन मायावती को अपनी बहन मानते हुए रक्षा बंधन के दिन राखी बंधवान उनके आवास पर जाते थे। लेकिन ये सिलसिला भी गठबंधन टूटते ही राजनीतिक रिश्ता बन कर ही रह गया। मायावती ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद कुछ दिनों तक सरकारी सकूल में अध्यापिका के पद पर काम भी किया। लेकिन बहुजन समाज
पार्टी के संस्थापक कांशीराम के संपर्क में आ कर राजनीति में सक्रिय हो गयी। 1995 में पहली वो पहली बार उप्र की मुख्यमंत्री बनी। मुख्यमंत्री बनवाने में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह ने अहम् भूमिका निभाई थी।


आज उप्र की राजनीति में मायावती एक बड़ी नेता के रूप में मानी जाती हैं। उनका नाम प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे चल रहा है। कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियां भी बसपा सुप्रीमो मायावती से खौफ खाती है। समाजवादी पार्टी और बसपा ने अपने गठबंधन में आम चुनाव में कांग्रेस को मात्र दो सीट दी हैं। इस पर खफा कांग्रेस ने यूपी में प्रियंका वाड्रा को महासचिव बना कर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी बना दिया है। हालात यह हो गये हैं कि प्रियंका का रायबरेली, अमेठी और सुलतानपुर क्षेत्र में अच्छा खासा प्रभाव हैं। यहां के लोग उनमें इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं। लोगों में ये चर्चा है कि प्रियंका के आने से कांग्रेस की स्थितिमें काफी सुधार आयेगा। सबसे बुरे हालात तो बीजेपी के होने वाले हैं ऐसा कुछ चुनावी सर्वे कह रहे हैं। कुछ असर तो सपा और बसपा पर भी होने का अंदेशा है।



 विनय गोयल



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