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पप्पू से पापा बने राहुल गांधी  मोदी बनाम राहुल-जनता किसके साथ



पप्पू से पापा बने राहुल गांधी  मोदी बनाम राहुल-जनता किसके साथ

राहुल गांधी 

न तो अब कांग्रेस 2014 वाली रही है और न ही राहुल गांधी। 2014 से पहले कांग्रेस देश की राजनीति से अनजान रही। उसका खामियाजा कांग्रेस को 2014 में आमचुनाव के दौरान मतदाताओं ने दिया भी।






 

Delhi-लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद भी उन्हें कई प्रदेशों में जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल में लगातार कांग्रेस को हार का सामना पड़ा। बीजेपी के नेता और पीएम नरेंद्र मोदी आमसभाओं में सार्वजनिक रूप से बड़े घमंड से यह कहते कि देश को कांग्रेसमुक्त करके ही रहेंगे। कई प्रदेशों से सत्ता कांग्रेस के हाथों से बीजेपी के हाथें में चली गयी। अब कांग्रेस को अपनी गल्तियों का एहसास हो चुका था कि उन्होंने प्दिले आम चुनाव में बीजेपी और एनडीए को बहुत हल्के में लिया जिसका नतीजा भुगतना पड़ा है। इसी खामी को दूर करने के लिये राहुल गांधी ने पिछले एक डेढ़ साल से सियासी दौरों को जारी रखा हैं।

इसी बीच राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया। अध्यक्ष बनते ही राहुल को जहां गुजरात, गोआ, मणिपुर और उत्तराखंड में हार का सामना करना पड़ा। केवल पंजाब ही ऐसा प्रदेश रहा जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस के घावों पर मरहम लगाया। वहीं अकाली और बीजेपी को गहरे जख्म दिये। लेकिन एक बात साफ नजर आ रहा था कि राहुल गांधी के बोलने की शैली
उतनी बचकाना नहीं रही। उनके बयानों को विपक्षी नेताओं के अलावा बीजेपी भी सीरियसली लेने लगी। राहुल गांधी को समझ में आने लगा कि लोगों को अपने से कैसे जोड़ा जाये। पहले कांग्रेस बचाव के तरीके ढूंढती थी लेकिन राहुल अब सीधे सीधे बीजेपी के नेतृत्व और पीएम पर तीखे हमले करते। अब बचाव की बारी बीजेपी की थी।

राहुल गांधी पिछले एक साल से राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय, अनिल अंबानी और पीएम मोदी पर प्रभावी हमले किये। राफेल डील को उन्होंने तीन प्रदेशों के चुनाव में जमकर इस्तेमाल किया। इसके अलावा उन्होंने किसानों के आन्दोलन, बेरोजगारी, महंगाई और अर्थव्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। जो भाजपायी कल तक राहुल गांधी को पप्पू कह कर मजाक उड़ाया करते थे। उनके बयानों पर सरकार और मोदी के बचाव में पार्टी प्रवक्ताओं के साथ पूरी पूरी कैबिनेट उतर जाती है। इससे साफ जाहिर होता है कि कल का पप्पू आज सत्ताधारी दल का पापा बन चुका है। भक्त इस बात को लेकर परेशान हैं कि देश जनता भी राहुल की बातों को ध्यान से सुनने लगी है। यही वजह है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को उन्हीं के गढ़ में घुस कर करारी हार का मुंह दिखाया है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को सीधी टक्कर देने
के लिये राहुल गांधी ने तीन प्रमुख मुद्दों को प्रमुखता से लिया है।


उसमें मुस्लिम समाज से जुड़ा तीन तलाक का मुद्दा है। देश में मुसलमानों की 16 फीसद आबादी है जो 21 प्रदेशों में चुनावों को प्रभावित करते हैं। आज भी मुसलमान भाजपा के साथ खड़े नहीं दिखायी देते है।  भाजपा ने उप्र असेंबली में इस मुद्दे को भुनाया। अब उसे राहुल यह कह कर भुनाने जा रहे हैं कि यदि कांग्रेस की सरकार केन्द्र बनी तो तीन तलाक कानून को रद करेंगे। दूसरा मुद्दा आदिवासियों का है जिनकी नाराजगी की वजह से रमन सिंह सरकार रसातल में चली गयी। तीसरा और महत्वपूर्ण महिलाओं को लेकर राहुल गांधी काफी मुखर हैं वो है 33 फीसद आरक्षण राजनीति में करने की घोषणा।

अगर राहुल ने किसी सभा में कोई टिप्पणी मोदी सरकार या मोदी के खिलाफ की है तो प्रवक्ताओं की फौज समेत कैबिनेट मंत्री तुरंत अपनी प्रतिक्रिया प्रेसवार्ता कर तुरंत हमलावर हो जाते हैं। मोदी भी अपने पूरे भाषण में या तो कांग्रेस को कोसते हैं या राहुल, सोनिया, प्रियंका और राबर्ट वाड्रा पर देश को लूटने का आरोप लगाते हैं। लेकिन आज जब आम चुनाव सिर पर है तो जनता और मतदाता पांच साल में सरकार का काम काज जानना चाहती है।
 

 



 



 





विनय गोयल




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