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Astrology:जानिए क्यों और कैसे करें राशि  के अनुसार रुद्राक्ष धारण



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Astrology:कैरियर में सफलता के लिए न्यायाधीशों तथा वकीलों को दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।


Astrology:हिंदू धर्म शास्‍त्र में रुद्राक्ष को बहुत महत्‍वपूर्ण और पवित्र माना गया है। इसे स्‍वयं भगवान शिव के अश्रुओं के रूप में पूजा जाता है। रुद्र और अक्ष जैसे दो शब्‍दों से मिलकर बना रुद्राक्ष शब्‍द बहुत शक्‍तिशाली होता है। मान्‍यता है कि शिव के अश्रुओं से ही रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्‍पत्ति हुई थी।पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जा से बचाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ तपस्वियों के लिए ही नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन में रह रहे लोगों के लिए भी किया जाता है। इसलिए यदि आप अपनी राशि के अनुसार रुद्राक्ष को पहनते है तो यह आपके जीवन में काफी बदलाव लाता है, मानसिक तनाव भी दूर करता है। रुद्राक्ष की विशेषता यह है कि इसमें एक अनोखे तरह का स्पदंन होता है। जो आपके लिए आप की ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं।



ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि जिस प्रकार उचित रत्न धारण करने से ग्रहों के कुप्रभावों को कम अथवा समाप्त किया जा सकता है, उसी तरह रुद्राक्ष भी किसी भी मनुष्य के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने में पूर्णरूप से सक्षम होते हैं। आप अपने भाग्य के बंद द्वारों को खोलना चाहते हैं तो अपनी राशि के अनुसार रुद्राक्ष धारण करें और उसका प्रभाव देखें।
रुद्राक्ष को हिन्दू शास्त्रों में बहुत ज्यादा पवित्र माना जाता है। रूद्र और अक्ष इन दो शब्दों से मिलकर रुद्राक्ष शब्द बना है। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि शिव के आंसुओं से ही रुद्राक्ष के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि अगर रुद्राक्ष राशि के अनुसार के हिसाब से धारण किया जाए तो यह हमारे जीवन में बहुत परिवर्तन लाता है।रुद्राक्ष धारण एक सरल एवं सस्ता उपाय है, इसे धारण करने से व्यक्ति उन सभी इच्छाओं की पूर्ति कर लेता है जो उसकी सार्थकता के लिए पूर्ण होती है. रुद्राक्ष धारण से कोई नुकसान नहीं होता यह किसी न किसी रूप में व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति कराता है।


रुद्राक्ष एक बहुत ही पवित्र चीज़ है और इसका अर्थ "रूद्र का हिस्सा" है। रूद्र भगवान शिव का दूसरा नाम है। ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसू की बूंदो से हुई है। प्राचीन समय में, रूद्राक्ष को आभूषण, संरक्षण, ग्रहों की शांति और आध्यात्मिक लाभ के रूप में प्रयोग किया जाता है। कुल 17 प्रकार के रूद्राक्ष होते हैं लेकिन इनमें से केवल 11 प्रकार के रूद्राक्ष का उपयोग ही विशेष प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए किया जाता है।


ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार रुद्राक्ष का उपयोग करने से अद्भुत परिणाम प्राप्त होते है और इसका प्रभाव अचूक होता है। लेकिन यह केवल तभी संभव है जब इसे सोच समझकर और कुछ नियमों का पालन करते हुए पहना जाता है।


कई बार कुंडली में शुभ-योग मौजूद होने के उपरांत भी उन योगों से संबंधित ग्रहों के रत्न धारण करना लग्नानुसार उचित नहीं होता इसलिए इन योगों के अचित एवं शुभ प्रभाव में वृद्धि के लिए इन ग्रहों से संबंधित रुद्राक्ष धारण किए जा सकते हैं और यह रुद्राक्ष व्यक्ति के इन योगों में अपनी उपस्थित दर्ज कराकर उनके प्रभावों को की गुणा बढा़ देते हैं. अर्थात गजकेसरी योग के लिए दो और पांच मुखी, लक्ष्मी योग के लिए दो और तीन मुखी रुद्राक्ष लाभकारी होता है।


 


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