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रोड किनारे बैठे couple पर गलती से पड़ गई लाईट ,बदले में मिली मौत



रोड किनारे बैठे couple पर गलती से पड़ गई लाईट ,बदले में मिली मौत

mumbai police torcher

Mumbai News- पुलिस अपनी आदत से बाज नहीं आ सकती है यह पुलिस चाहे यूपी बिहार की हो या फिर मुंबई(Mumbai) की एक शिकायत जिसकी पहले पुलिस को जांच करनी चाहिए थी उसके बाद यदि सही पाई जाती तो लीगल एक्शन लिया जा सकता था लेकिन आखिर पुलिस को यह किसने अधिकार दे दिया की वह किसी आरोपी की इतनी पिटाई कर दे कि उसकी मौत हो जाए|


अब पुलिस दागदार हुई है मुंबई में जहाँ एक महिला ने मुंबई के विजय सिंह को केवल एक महिला की शिकायत पर पुलिस ने अरेस्ट करके इतना टॉर्चर किया, जिससे उसकी मौत हो गई। क्या बिना जांच के पुलिस का ऐसा व्यवहार उचित था?


मुंबई (Mumbai)पुलिस अपने इस काले कारनामे के चलते troll हो रही है |#RisingFakeCases के नाम से चलाये जा रहे मुहीम में मुंबई पुलिस लोगों के निशाने पर है |


 


मुंबई(Mumbai) में एक निर्दोष युवक से एक महिला पर लाइट पड़ गई तो उस महिला ने छेड़खानी का केस कर दिया।पुलिस ने arrest कर खूब पिटाई की और युवक की मौत हो गई।ऐसे कानून का क्या लाभ जिससे निर्दोषों की मौत हो।इसलिये रेप के कानून में संशोधन जरूरी है।


घटना मुंबई के वडाला ट्रक टर्मिनल की घटना है | जिस तरह  से मुंबई की मीडिया में ख़बरें आई हैं उसमे यह घटना अक्टूबर 27 की रात 11 बजे की बताई जा रही है जिसमे कहा जा रहा है कि विजय सिंह  MR in Pharma Company) जो सायन कोलीवाड़ा का रहने वाला है, अपने दो चचेरे भाईयों के साथ खाने के बाद टहलने के लिए और अपनी होने वाली पत्नी से बात करने के लिए घर से कुछ दूर (वडाला ट्रक टर्मिनल ) आया। जब उसने अपनी बाइक खड़ी की तो सामने एक कपल बैठा हुआ था और उनके ऊपर इसकी बाइक की लाइट चली गयी । लाइट चेहरे पर जाने के बाद कपल में से लड़के ने विजय सिंह को गाली दी और थोड़ी बहस चालू हो गयी । उसने अपने 2 दोस्तों को बुला लिया और बात आगे बढ़ गयी यहाँ तक कि हाथापाई पर आ गयी।
जब वहा पुलिस पहुँची तो लड़की ने बस ये बोल दिया कि ये तीनो लड़के ( विजय और उसके चचेरे दो भाई ) मुझे छेड़ रहे थे और पुलिस ने बिना किसी पूछताछ के विजय ओर उसके दोस्तों को मारा । यहाँ तक कि उस वक्त भी लड़की और उसके साथ के लड़के ने इन तीनो पर हाथ उठाया ।
पुलिस मारते मारते विजय सिंह और उसके साथ वाले दो भाइयों को पुलिस चौकी ले गयी। तीनों को बिना किसी पूछताछ के अलग अलग लॉकअप में डाल दिया । विजय सिंह को हाथ पैर और छाती पर भी मारा जब कि सामने पक्ष वालो का स्वागत किया । उनमे से एक लड़के ने पुलिस चौकी में ये तक कहा कि तुम लोग को इधर ही खत्म कर दूंगा लेकिन इसपर भी पुलिस ने कोई प्रतिक्रिया नही दी।
रात्रि 2:30 बजे विजय सिंह ने पुलिस स्टाफ से कहा कि मुजे सीने में दर्द हो रहा है और पानी दे दो पीने के लिए लेकिन पुलिस ने पानी नही दिया बल्कि जब विजय की माँ ने पानी देने की कोशिस की तो उसे भी डाटा। विजय का एक छोटा कजिन जब पानी देने गया तो उससे भी बहोत बुरा व्यवहार किया । घरवालो से भी बहोत गाली गलौच की । विजय ने पुलिस स्टाफ से कहा कि अपने बेटे जैसा समझ के पानी पिला दो लेकिन इंसानियत मर चुकी थी इन लोगो में शायद।
विजय ने ये भी कहा कि मुजे घुटन सी हो रही है, पंखा चला सकते है क्या लेकिन फिर वही गली गलौज वाली भाषा । जब वो बेहोश हो गया तो उसे लोकप से बाहर निकाला गया और लिटाया गया । जब उसे घरवालो को सौपा गया तो विजय दम तोड़ चुका था ।
शायद आपको ये जान के और धक्का लगे कांस्टेबल ने ये कहा कि हमारे पास गाड़ी नही है, Ola बुक करके जाओ
विजय के पापा ने एक Ola वाले को रिक्वेस्ट कर के जब गाड़ी रुकवायी तब उस ड्राइवर ने उसकी साँसे चेक कर के कहा कि यर मार चुका है । आप शायद ही उसके बाप की हालत समझ पाएंगे।
सवाल ये है की क्या सिर्फ उस लड़की का ही बयान मायने रखता है? बिना जुर्म साबित हुए पुलिस ने विजय ओर उसके भाइयो को क्यों मारा? पानी पिलाना जुर्म हो गया है क्या? एक बाप को उसके बेटे की लाश दे के ये कहना जरूरी है क्या की ola करके जाओ?


source twitter


 


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