Top
Aap Ki Khabar

ज्योतिष की माने तो राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार भी पड़ सकती है खतरे में

ज्योतिष की माने तो राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार भी पड़ सकती है खतरे में
X

श्री अशोक गहलोत (मुख्य मंत्री-राजस्थान)

(नोट:-जन्म की तारीख गूगल सर्च से जैसी प्राप्त हुई है.उसी के अनुसार कुंडली का निर्माण किया है। मेरा उद्दयेश्य सिर्फ़ इतना ही है कि सफल लोगो की कुंडली के शुभ योगों की चर्चा करना है)

जन्म तारीख- 03.05.1951

समय 09.30 बजे सुबह

स्थान-जोधपुर

वार-गुरवार

लग्न-मिथुन

राशी-मीन

नक्षत्र-उत्तराभाद्रपद

राजस्थान के मुख्य मन्त्री श्री अशोक गहलोत जी की कुंडली का विश्लेषण---

(मंगलवार - 10 मार्च 2020 की शाम को 8 बजे लिखा गया)..

आज की स्थिति अनुसार अभी कांग्रेस में उठाव पटक चल रही है ।

अशोक जी गहलोत की कुंडली में वर्तमान में राहु की महादशा 12 नवम्बर 2019 से प्रारंभ हुई है ।

अभी राहु महादशा में राहु अंतर्दशा में गुरु की प्रत्यन्तर चल रहा है जो 18 अगस्त 2020 तक रहेगा ।।

उसके बाद राहु में राहु में शनि का प्रत्यंतर शुरू होगा।

उसके बाद अशोक गहलोत की राजनीतिक यात्रा में तकलीफ का दौर प्रारंभ होने शुरू हो जाएगा क्योंकि इनकी कुंडली में शनि चौथे भाव में वक्री है व बुध जो 11 वे भाव में मेष का वक्री है जो जनवरी 2021 तक रहेगा।

इस दोनों प्रत्यंतर में अशोक गहलोत को अपनी राजनीतिक पारी बचाना मुश्किल जो जाएगा ।

इनके लिए यह समय बहुत ही मुश्किल समय होगा इनके अपने कई मित्र भी इनका साथ छोड़ सकते है । इनके साथी इनको धोखा दे रहे है जो सामने आ जाएंगे ।

मार्च में शनि भी 8थे भाव में व गुरु जो इनकी कुंडली में 10 भाव का स्वामी है जो गोचर में 8th भाव में आकर नीच का हो जाएगा ।

यह समय अशोक गहलोत के लिए कठिन समय रहेगा इनको संभल कर चलना चाहिए अगर इनकी तरफ से थोड़ी भी चूक महंगी पड़ेगी । क्यों कि राहु अचानक परिवर्तन भी करता है और जब अच्छा होता है तो बहुत अच्छा अगर खराब होता है तो बहुत बुरा रहेगा ।

श्री अशोक गहलोत को 18 अगस्त 2020 से 22 जनवरी 2021 तक का समय बहुत ही बुरा समय रहेगा ।

हो सकता है इनको इस समय में इस्तीफा देना पड़ सकता है या इनकी सरकार पर आंच आ सकती है ।

समझें अशोक गहलोत की जन्म कुंडली के शुभ योग --

अशोक गहलोत का जन्म 03 मई सन् 1951 को सुबह 9:30 मि. पर जोधपुर में हुआ था। उस काल में क्षितिज पर मिथुन लग्न उदित हो रही थी। मिथुन राशि एक द्विस्वभाव राशि है, जिसके फलस्वरूप गहलोत के स्वभाव में दोहरापन पाया जायेगा, कभी धीर गम्भीर तो कभी चंचल और वाचाल रहेंगे। आपके सोचने का तरीका वैज्ञानिक व तर्कसंगत होगा।

इस समय आपकी कुण्डली में मंगल की दशा में राहु की अन्तर एंव केतु की प्रत्यन्तर दशा चल रही है। षष्ठेश और लाभेश होकर मंगल अपनी मेष राशि में लाभ भाव में राजा सूर्य के साथ संग्रस्थ है। मंगल और सूर्य की सप्तम नजर जनता के कारक पंचम भाव पर पड़ रही है। यह स्थिति शुभ कही जा सकती है। राहु भाग्य भाव में स्वराशि का होकर गुरू के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद पर कब्जा किये हुये है। गुरू सप्तमेश होकर दशम भाव में बैठा है। सप्तम भाव परिवर्तन का कारक एंव दशम स्थान राज्य का संकेतक है।

(1)गुरु और चन्द्रमा 10 वे भाव मे युति=गज केशरी योग-अदभुत योग है,जातक यशस्वी,धनवान,सरकार का मुखिया,समाज द्वारा पूजित होगा।

(2)लग्नेश बुध11 वे भाव मे सूर्य के साथ है,यह बुधादित्य योग का निर्माण कर रहा है।जातक की वाणी प्रभावशाली होगी ओर कई विद्याओ का जानकर होगा।

(3)गुरु केंद्र(10वे भाव मे) में है। यह बहुत शुभ योग है।शास्त्र बताते है कि केंद्र में गुरु कुंडली के 1000 दोष दूर करता है।

(4)शुक्र 12 वे भाव मे स्वराशिस्थ-जातक घर से अधिक बाहर विकास करेगा ओर अतुलनीय सुख प्राप्त पड़ेगा।

(5)गुरु केंद्र में स्वयं की राशि मे-"हंस योग" का निर्माण कर रहा है। जातक विद्ववान ओर अवार्ड प्राप्त करने वाला होगा.

(6)राहु 9 वे भाव मे है- अपनी चतुरता से लोगो को प्रभावित करेगा।

(7)केतु 3 रे भाव(पराक्रम भाव) मे है अपने समस्त शत्रुओ का नाश करेगा।

षष्ठेश और लाभेश होकर मंगल अपनी मेष राशि में लाभ भाव में राजा सूर्य के साथ संग्रस्थ है। मंगल और सूर्य की सप्तम नजर जनता के कारक पंचम भाव पर पड़ रही है।

यह स्थिति शुभ कही जा सकती है। राहु भाग्य भाव में स्वराशि का होकर गुरू के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद पर कब्जा किये हुये है। गुरू सप्तमेश होकर दशम भाव में बैठा है। सप्तम भाव परिवर्तन का कारक एंव दशम स्थान राज्य का संकेतक है।

मंगल लाभेश होकर लाभ भाव में बैठकर सप्तम नजर से पंचम भाव को देख रहा है।

सूर्य तृतीयेश होकर लाभ पर कब्जा जमाकर पंचम भाव को देख रहा है। सूर्य व मंगल दोनों की जनता के संकेतक भाव पर दृष्टि पड़ रही है।

महादशा राहु की :- 12 नवम्बर 2019 से 12.11.2037 तक समय शानदार है।

वर्तमान में इसका प्रबल राजयोग बन रहा है । शनिदेव के प्रबल गजकेसरी योग से गुरु का केंद्र में होने से छठे स्थान पर राहु तीसरे स्थान पर केतु होना चाहिए,जो अद्भुत योग बनता है ।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री का, जिन्होंने वर्ष 1997 में भी गहलोत के मुख्यमंत्री बनने को लेकर भविष्यवाणी की थी और वह भविष्यवाणी भी सही साबित हुई थी।

श्री अशोक गहलोत का लग्न मिथुन, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, मीन राशि हैं।

12 नवम्बर 2019 से 2037 तक अशोक गहलोत की जन्म कुंडली में राहु की महादशा के प्रबल योग हैं ।।राजनीति के हर क्षेत्र में माहिर तीसरा केतु होने से वाक चातुर्य से काम बनाने की क्षमता, शत्रुओं का नाश करने की कला, नवे राहु गुरु केंद्र में होने से सभी दोष भी माफ माने जाते हैं।

Next Story
Share it