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Startup India -The Achiveres Forum Of India ने डॉ. निरुपमा सिंह दर को किया सम्मानित



Startup India -The Achiveres Forum Of India ने डॉ. निरुपमा सिंह दर को किया सम्मानित

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Startup Ideas -इंडियन अचीवर्स फोरम ने डॉ. निरुपमा सिंह दर को किया सम्मानित

 

Lifestyle Desk -भारत की पहली फैशन फोरकास्टर(Fashion Industry) व फैशन ग्लैमज़ॉन  की फाउंडर डॉ. निरुपमा सिंह दर को 2020 का सबसे शानदार स्टार्टअप शुरु करने के लिए  प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया |

"द इंडियन अचीवर्स फोरम" द्वारा आयोजित एक समारोह में, डॉ. निरुपमा सिंह दर के काम की सराहना की गई, और उन्हें फैशन इन्डस्ट्री में भारत में पहली पीएचडी महिला होने के लिए  सम्मानित किया गया |

फैशन फोरकास्टर(Fashion Industry In India) व फैशन ग्लैमज़ॉन (Fashion Glamour ) की फाउंडर डॉ. निरुपमा सिंह दर ने कहा कि 'मैं लाखों महिलाओं जो कि चिकनकारी (Chikankari ) और हाथ करघा बुनकरी का काम  करती है उनको खरीददारों के समक्ष लाना चाहती हूँ जिससे उन्हें अपने काम की असली कीमत का पता चले | फैशन ग्लैमज़ॉन" की बात करें तो मै चाहती हूँ कि हैंडलूम बुनकरों और कढ़ाई करने वालों को इतनी ताक़त मिले की वो खुद अपने काम की कीमत लगा सके और मार्केट में अपनी पकड़ बना सके। 

 

" फैशन ग्लैमज़ॉन एक ऐसा ईकोसिस्टम Startup Bussiness Ideas  है जहां एक ही समय में एकरूपता, पर्यावरण नैतिकता और स्थिरता के मुद्दों से निपटा जा सकता है, फैशन उद्योग दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित उद्योग है और प्रदूषण की इस समस्या से निपटने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है बुनकरों द्वारा  हाथ से बुनकर तैयार किए गए कपड़े व  हाथ से कढ़ाई किये गए कपड़ो का उपयोग करना।

 

आज भारत एकमात्र ऐसा Fashion Industry India देश है जहाँ हाथ की बुनाई और हाथ की कढ़ाई अभी भी जीवित है। हालाँकि, Startup Ideas भारत में  प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि चीन की मशीन से बने कपड़ों ने भारतीय बुनकरों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है क्योंकि मशीन से निर्मित कपड़े बाजार में काफी कम कीमत पर उपलब्ध है। परिणामस्वरूप हजारों बुनकरों ने मजबूरन नौकरियां जैसे मजदूरी, रिक्शा चलाना इत्यादि की ओर रुख कर लिया है। इस फैशन स्टार्ट-अप (Fashion Startup Company)को शुरू करने का मकसद ही यह सुनिश्चित करना है कि भारत के कारीगरों को अपने काम की बेहतर कीमत मिल जाए और वे बुनाई की अपनी पारंपरिक कला को न छोड़ें।

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