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इतनी नफरत लाये कहाँ से अधीक्षक शर्मा जी, हटा डाला डॉ राजेन्द्र प्रसाद का नाम

इतनी नफरत लाये कहाँ से अधीक्षक शर्मा जी, हटा डाला डॉ राजेन्द्र प्रसाद का नाम
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देश रत्न डा राजेंद्र प्रसाद सदर अस्पताल बेगूसराय (बिहार) का नाम बदलना साजिशपूर्ण

National News Desk -लगता है कि चिकित्सा अधीक्षक के दिमाग पर कोरोना का कहर हो गया जिससे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया ।

बहुत दुःख के साथ कहना पड रहा है कि भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी, जो हमारे ही समाज के पुरोधा और स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण कड़ी रहे, आज उनका अपने ही राज्य बिहार (जिला बेगूसराय) में अपमान हो रहा है और हम सब चुप है।

एक पत्र लिख कर बिरोध नही कर सकते या समाज को इसकी जानकारी दे कर विरोध भी जता सकते हैं।

नेशनल कायस्थ एक्शन कमेटी के रास्ट्रीय सह संयोजक विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि बेगूसराय में भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति *“डॉ राजेन्द्र प्रसाद सदर अस्पताल”* का नाम परिवर्तित करके "सदर अस्पताल " किये जाने की तीव्र भर्तसना करता है।

विवेक श्रीवास्तव आज बिहार के स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडे को ट्विटर पर लिखकर मांग किया है कि *‘’डॉ राजेन्द्र प्रसाद सदर अस्पताल, बेगूसराय”* का नाम बदलकर कर सदर अस्पताल करने के लिए दोषी वहां के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ आनंद शर्मा को सेवा से अविलंब बर्खास्त किया जाये।

श्री अनुरंजन श्रीवास्तव ने कहा की उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ आनंद शर्मा इस मामले में षड्यंत्र रच रहे हैं ।

बिहार सरकार और पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर तत्तकालीन जिला पदाधिकारी ने सन् २००० में ही अस्पताल में *देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद* का प्रतिमा लगवाया था और शिलापट्ट लगवाया था, जिसे उप चिकित्सा अधीक्षक ने किस आदेश के तहत *डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सदर अस्पताल , बेगूसराय का नाम बदल कर सदर अस्पताल बेगूसराय कर दिया ।

माननीय स्वास्थय मंत्री श्री मंगल पाण्डेय जी से आग्रह है दोषी उप चिकित्सा पदाचधकारी को अविलंब बर्खास्त करते हुए पुन: डॉ राजेन्द्र प्रसाद सदर अस्पताल का नामकरण किया जाए एवं वहां बोर्ड लगाया जाए ।

हमारा मानना है कि जान बूझकर एक सोची समझी साज़िश के तहत एक पदाधिकारी द्वारा भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के अपमानित करने की साज़िश रची गयी है ।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय जी इस घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए अविलंब कार्यवाही नहीं करते हैं तो मजबूरन हम संगठनों कौ इसके लिए राज्यव्यापी आंदोलन चलाना पड़ेगा

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