हिंदी भाषा नहीं भावों की अभिव्यक्ति है, यह मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है।

 
 

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

 लखनऊ। हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि देववाणी है जो देश  के विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों को एकता के सूत्र में पिरोती है। देश को एकता के सूत्र में संजोकर रखने में हिंदी का बहुत बड़ा योगदान है। 14 सितंबर का दिन  मातृभाषा को समर्पित है। मातृभाषा की उन्नति के बिना किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है। अपनी भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना भी मुश्किल है।  आजादी मिलने के दो साल बाद 14 सितबंर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया था। इस निर्णय के बाद हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने  के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सम्पूर्ण भारत में हिंदी दिवस 14 सितम्बर मनाया जाने लगा।  14 सितंबर 1953 को पहली बार देश में हिंदी दिवस मनाया गया। दुबग्गा- लखनऊ मॉडल पब्लिक स्कूल फरीदीपुर में आज 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया गया इस अवसर पर निबंध लेखन, वादविवाद प्रतियोता का आयोजन किया गया जिसमें विद्यालय के सभी छात्र/छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर प्रबंधक अवधेश सिंह व प्रधानाचार्य गुन्जन खत्री, जूनियर व सीनियर कक्षाओं के इंचार्ज शुचि तिवारी एवम् राखी श्रीवास्तव, हिन्दी प्रवक्ता नरेन्द्र वर्मा , प्राची वर्मा, अर्पिता  व समस्त शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही प्रधानाचार्य ने अपने विचारों को प्रस्तुत किया कि "भारत में हर भाषा का सम्मान है, पर हिंदी ईश्वर का वरदान है।" इन्हीं शब्दों के साथ कार्यक्रम का समापन किया।