अर्थराइटिस या गठिया रोग किसकी कमी के कारण होता है? | Symptoms Of Arthritis In Hindi

अर्थराइटिस या गठिया रोग किसकी कमी के कारण होता है? | Symptoms Of Arthritis In Hindi

अर्थराइटिस की समस्या क्या है?

अर्थराइटिस क्यों होता है?

अर्थराइटिस के लक्षण और उपचार

Health News In Hindi: उम्र बढ़ने के साथ हमारे शरीर की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं जिससे जोड़ो में दर्द और सूजन की समस्या भी बढ़ने लगती है, जिसे अर्थराइटिस यानी गठिया कहा जाता है। इस बिमारी में घुटने, कोहनी, उंगलियां यानी शरीर के वो हिस्से जहां दो हड्डियां मिलकर जोड़ने का काम करती हैं वहां पर दर्द और सूजन आने लगती है। गठिया कई प्रकार का होता है। कई बार इससे जोड़ों के अलावा  आंखें, हृदय व त्वचा भी प्रभावित होने लगती है। जैसे जैसे हमारा इम्यून सिस्टम गड़बड़ाने लगता है वैसे-वैसे ये बिमारी शरीर को और ज्यादा अपनी चपेट में लेने लगती है। ज्यादातर गठिया यानी अर्थराइटिस की समस्या 40 की उम्र के बाद सामने आने लगती है। इससे लोगों को उंगलियों और पैरों के जॉइंट में ऐंठन, दर्द और सूजन का का एहसास होने लगता है जो कई बार बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता है और असहनीय हो जाता है। 

गठिया रोग की पहचान

गठिया रोग की पहचान

गठिया के मुख्य लक्षण में जोड़ो में जलन, उसमें सूजन के साथ वहां पर गर्म महसूस होना। जोड़ के ऊपर की त्वचा देखने में लाल या बैंगनी दिखना। इसके साथ ही जहां समस्या है वहां की स्किन कसी हुई और चमकदार दिखना। पहली बार दर्द भरी जलन उठने पर आम तौर पर केवल एक जोड़ ही प्रभावित होता है। यह दर्द कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक रहता है।

What Is Arthritis In Hindi 

अर्थराइटिस जोड़ों के ऊतकों की जलन और क्षति के कारण होता है।अर्थराइटिस या गठिया आज की बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान के तौर तरीके और उनकी वजह से बढ़ता मोटापा आदि कई कारण हैं जिस कारण ये रोग अब केवल बुजुर्गो तक हीं सीमित नहीं रह गया है बल्कि बहुत तेजी से युवा भी इसका शिकार होते जा रहे है। गठिया का सबसे ज्यादा प्रभाव घुटने और कुल्हे की हड्डियों में दिखाई देता है। आपने भी कई बार लोगों को समय-समय पर अपने बदन में दर्द और जोड़ो में अकड़न और सूजन की समस्या के बारे में कहते सुना होगा, कई बार इसका मुख्य कारण गठिया होता है। गठिया के कारण हाथों, कंधों और घुटनों में भी सूजन और दर्द रहती है। साथ ही इन अंगों को हिलाने में भी तकलीफ होती है। 

What Is Arthritis In Hindi 

गठिया का क्या कारण है?

कार्टिलेज जोड़ो का एक नर्म और लचीला ऊतक या पदार्थ है। जब आप चलते हैं और जोड़ों पर दबाव डालते हैं तो यही कार्टिलेज प्रेशर और शॉक को अवशोषित या एब्जॉर्ब करके आपके जोड़ों को बचाता है। जब कार्टिलेज ऊतकों की मात्रा में कमी आने लगती है तो गठिया की समस्या आने लगती है। कम उम्र के लोगों में चोटें और मोटापा इसका कारण बनते हैं। इसके अलावा गठिया विटामिन सी, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी भी इसका कारण हो सकता है। इनकी कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और ये अंदर से खोखली होने लगती हैं। जिससे ज्वाइंट्स के बीच घर्षण बढ़ने लगता है। गठिया के मुख्य कारण इस प्रकार हैं-

  • मोटापा: जब शरीर का वज़न बढ़ने लगता है तो उसका प्रभाव जोड़ों पर पड़ने लगता है। इसके चलते जोड़ों में दर्द और ऐंठन की समस्या बनी रहती है। मोटापे का असर जोड़ों के कार्टिलेज़ पर भी पड़ता है।  
  • जेनेटिक: यदि आपके परिवार में किसी सदस्य यानी माता-पिता आदि में अर्थराइटिस की हिस्ट्री रही है तो यह जेनेटिकली ट्रांसफर हो सकती है। 
  • खराब खान पान: आज कल का खराब खान-पान, पैकेज वाला खाना और फास्ट फूड शरीर में पोषक तत्वों की कमी का कारण बनता है, जिसका असर हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम पर पड़ता है।
  • बढ़ती उम्र: तकरीबन 60 की उम्र के बाद लोग इस समस्या के शिकार होने लगते हैं क्योंकि कार्टिलेज की मात्रा में कमी आने लगती है। 
  • चोट लगना: अगर आपके जोड़ो यानी घुटने, कोहनी आदि में चोट लग जाती है तो इससे कार्टिलेज का स्तर घटने लगता है। 

गठिया का क्या कारण है?

अगर आपको ऑर्थराइटिस या गठिया की समस्या होती है तो इसके लिए डॉक्टर के पास जाकर प्रॉपर इलाज कराना चाहिए। इसके लिए फिजिओथेरेपी कराने की भी सलाह दी जाती है। लेकिन आप इससे बचाव और इसके असर को कम करने के लिए कुछ घरेलू उपाय कर सकते हैं -

  • एक्सरसाइज़:  व्यायाम करने से बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर बनता है। एक्सरसाइज़ करने से हमारे बॉडी का इम्यून सिस्टम भी बेहतर होता है साथ ही इससे आपका वजन भी नहीं बढ़ता। 
  • शरीर को हाइड्रेटेड रखें: अपने शरीर में फ्लूइड के लेवल को बना कर रखें। इसके लिए अपनी डाइट में पानी के अलावा अन्य प्रकार के तरल पदार्थों को भी शामिल करें। इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति होती है।
  • मोटापे से बचें: आपके शरीर का वजन जोड़ों में होने वाली तकलीफ का मुख्य कारण बन सकता है। ऐसे में अपने वजन को मेनटेन करके रखें।
  •  पौष्टिक आहार लें: यदि आप पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार लेते हैं तो यह आपके शरीर को कई तरह की बिमारियों से बचा कर रखता है। 

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