ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने की कर्नाटक की अधिसूचना ने गेमिंग उद्योग को निराश और भ्रमित कर दिया है

ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने की कर्नाटक की अधिसूचना ने गेमिंग उद्योग को निराश और भ्रमित कर दिया है
ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने की कर्नाटक की अधिसूचना ने गेमिंग उद्योग को निराश और भ्रमित कर दिया है नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार की सभी कौशल खेलों पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना, जिसमें प्रवेश शुल्क शामिल है, ने उद्योग को भ्रमित और निराश कर दिया है। ऐसी स्थिति तब सामने आ रही है जब राज्य के गृह मंत्री ने कहा है कि राज्य नियमों को लगभग दो महीने में लागू करेगा।

इससे पहले, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा था कि सरकार पहले संशोधित कानूनों के तहत नियमों को अधिसूचित करेगी और फिर हितधारकों के सुझावों और आपत्तियों की जांच के बाद अंतिम अधिसूचना जारी करेगी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को उम्मीद है कि करीब दो महीने में नियम लागू हो जाएंगे।

हालांकि, अपनी स्थिति बदलते हुए, कर्नाटक सरकार ने 5 अक्टूबर को एक अधिसूचना जारी कर सभी कौशल गेमिंग एप पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें प्रवेश शुल्क शामिल है।

एआईजीएफ के सीईओ रोलैंड लैंडर्स ने कहा, कर्नाटक में कौशल गेमिंग के इस स्पष्ट झटके से इंडस्ट्री काफी निराश है। यह एक ऐसा राज्य जो हमेशा नवाचार और इज ऑफ बिजनेस के लिए खड़ा रहा है।

उन्होंने कहा, जो बात विशेष रूप से निराशाजनक है वह यह है कि उद्योग को उम्मीद तब दिखाई दी, जब राज्य के गृह मंत्री ने एक नए ई गेमिंग कानून के निर्माण पर एक उत्साहजनक बयान दिया था, जिसका हम बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। यह प्रतिबंध प्रभावी हो गया है और इसका परिणाम होगा गेम डेवलपर्स और प्रकाशकों सहित संपूर्ण रूप से उभरते हुए गेमिंग उद्योग के लिए झटका है।

विवादास्पद विधेयक का कई संगठनों ने विरोध किया है। ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (एआईजीएफ) और द फेडरेशन ऑफ इंडियन फैंटेसी स्पोर्ट्स (एफआईएफएस) जैसे प्रमुख उद्योग निकायों ने प्रतिबंध का विरोध किया था।

इंटरनेट और तकनीकी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली उद्योग संस्था आईएएमएआई ने कहा था कि यह विधेयक देश के स्टार्टअप हब के रूप में कर्नाटक की स्थिति को नुकसान पहुंचाएगा और इससे राज्य को नौकरियों और राजस्व का नुकसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक भ्रम और अनिश्चितता का माहौल पैदा करेगा। निवेशक अपना निवेश निकाल सकते हैं, जिससे कई मौजूदा कंपनियां राज्य से अपना आधार बदलने पर विचार कर सकती हैं।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, दुर्भाग्य से, कर्नाटक विधेयक कौशल के खेल(गेम ऑफ स्किल) और मौके के खेल(गेम ऑफ चांस) के बीच अंतर नहीं करता है। गेम ऑफ चांस शुद्ध जुआ है और इसे उचित रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। हालांकि, बिल के दायरे में गेम ऑफ स्किल को शामिल करके, यह न केवल स्थापित न्यायशास्त्र के खिलाफ है बल्कि संपन्न भारतीय गेमिंग स्टार्टअप क्षेत्र के लिए खतरा है।

--आईएएनएस

आरएचए/एएनएम

Share this story