छत्तीसगढ़ के जशपुर की नाशपाती का स्वाद दिल्ली को भाया

छत्तीसगढ़ के जशपुर की नाशपाती का स्वाद दिल्ली को भाया
छत्तीसगढ़ के जशपुर की नाशपाती का स्वाद दिल्ली को भाया रायपुर, 4 अगस्त (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के उत्पादों की मांग देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बढ़ रही है। जशपुर की नाशपाती ने दिल्ली से लेकर अन्य हिस्सों में न केवल अपनी पहुंच बनाई है बल्कि यहां इस नाशपाती की मांग भी बढ़ी है।

जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आदिवासी संस्कृति के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां के दूरस्थ अंचलों के किसान अपने खेतों में साग-सब्जी के अलावा नवीन पद्धति से चाय, काजू, टमाटर, मिर्च, आलू की भी अच्छी खेती कर रहे हैं। यहां के बगीचा विकासखंड के पठारी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाशपाती की खेती की जा रही है। इस खेती से अंचल के किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

बताया गया है कि जशपुर जिले में लगभग रकबा 750 हेक्टेयर में 660 मीट्रिक टन नाशपाती का उत्पादन हो रहा है, जिससे 17 सौ से भी अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। उनके जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आ रहा है।

कई किसानों ने उद्यान विभाग की नाशपाती क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लेते हुए अपने यहां नाशपाती का उत्पादन शुरू किया है। इन्हीं में से एक हैं बगीचा विकासखंड के किसान विरेन्द्र कुजूर जिन्होंने अपने उद्यान में नाशपाती के 250 पेड़ लगाए हैं। अब प्रतिवर्ष उन्हें फल संग्रहण कर विक्रय से लाखों रूपए की आय हो रही है। साथ ही उनके इस काम से स्थानीय लघु किसानों एवं कृषि मजदूरों को भी रोजगार मिला है।

विरेन्द्र बताते हैं कि वर्ष 2021-2022 में नाशपाती उत्पादन कार्य से उन्हें लगभग तीन लाख रूपए की आय हुई। उन्होंने बताया कि सरकार की योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उन्हें मिला है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञ अधिकारियों के मार्गदर्शन में वे लगातार काम कर रहे हैं, अब वह इस काम को और विस्तार देना चाहते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी के तहत गांवों में साग-सब्जियों एवं स्थानीय जलवायु के आधार पर फल के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव, ग्रामीणों और किसानों की आर्थिक स्थिति एवं जीवन स्तर में बदलाव लाने के उद्देश्य से ऐसी योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिनसे लोगों की जेबें भर रही हैं।

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में खेती के क्षेत्र में ज्यादा लाभ देने वाली फसलों को अपनाया जा रहा है। जशपुर जिले के बालाछापर में हो रही चाय की खेती और बस्तर के दरभा में हो रहे पपीते की खेती आज पूरे देश में सुर्खियां बंटोर रही है। प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में आया अभूतपूर्व बदलाव इस बात का सूचक है कि प्रदेश में कृषि अब सामान्य से बढ़कर व्यापक और नवाचारी परिवर्तन ला रहा है, जो लोगों को रोजगार, स्व-रोजगार से जोड़ रहा है।

--आईएएनएस

एसएनपी/एसकेपी

Share this story