भोपाल के बीआरटीएस को बनाने में खर्च हुए सैकड़ों करोड़, अब हटाया जाएगा

भोपाल के बीआरटीएस को बनाने में खर्च हुए सैकड़ों करोड़, अब हटाया जाएगा
भोपाल के बीआरटीएस को बनाने में खर्च हुए सैकड़ों करोड़, अब हटाया जाएगा भोपाल, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के पर्यटन विभाग का एक स्लोगन काफी चर्चा में रहा, एमपी अजब है सबसे गजब है, यह स्लोगन बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) के मामले में सौ फीसदी सटीक बैठता नजर आता है, क्योंकि लगभग डेढ़ दशक पहले इसे बनाने और अब तक के रखरखाव पर साढ़े चार सौ करोड़ खर्च हुए और सरकार अब इसे हटाने जा रही है।

राज्य में लगभग डेढ़ दशक पहले शहरवासियों को बेहतर लोक परिवहन मुहैया कराने के लिए बीआरटीएस को अमली जामा पहनाया गया। मुख्य सड़क के बीच से एक लेन बनाई गई जिस पर सिर्फ सिटी बस चलाई गई। राजधानी में बीते रोज एक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें सरकार के प्रतिनिधियों ने इस बीआरटीएस को जनता के लिए मुसीबत बताया और यहां तक कह दिया कि यह फैसला ही गलत था लिहाजा इस रोड को हटाया जाएगा।

यहां बता दें कि राजधानी में मुख्य सड़क के बीच में एक विशेष परिवहन के लिए 24 किलोमीटर लंबा बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम विकसित किया गया था, इस कॉरिडोर पर सिर्फ सिटी बसें चलती हैं। जब यह कॉरिडोर बनाएगा था तब भी यही कहा गया था कि इस परियोजना से जनता को आसानी से परिवहन मिलेगा और लोग ज्यादा से ज्यादा लोक परिवहन सुविधा का उपयोग करेंगे।

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह का कहना है कि भोपाल और इंदौर की सड़कों से कॉरिडोर हटाने की मांग समय-समय पर होती रही है, सरकार के संज्ञान में भी है। इस पर काम किया जा रहा है, बीआरटीएस कॉरिडोर की व्यवस्था गड़बड़ है इससे सुविधा की बजाय लोगों को परेशानी हो रही है। भोपाल में जब तक इसे हटाने का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक बहुत ही विभाग व जरूरत वाले क्षेत्रों में जनता के लिए पांच-पांच घंटे के लिए खोला जाएगा।

इसी तरह चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने भी कहा है कि बीआरटीएस कॉरिडोर दिक्कतें खड़ी कर रहा है इससे भोपाल से उखाड़ फेंक देना चाहिए। दोनों मंत्रियों की बात पर अमल हुआ तो सरकार ने जो लगभग साढ़े चार सौ करोड़ रुपए खर्च किए थे वह पानी में बह जाना जैसा होगा।

ज्ञात हो कि बीआरटीएस 2009 में बनना शुरू हुआ था और यह 2011 में लालघाटी चौराहे से वीर सावरकर सेतु और बोर्ड ऑफ चौराहे तक बना। 2009 में इस पर लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च हुए, उसके बाद 10 वर्ष में दो सौ करोड़ से ज्यादा इसके रखरखाव पर अब तक खर्च किए जा चुके हैं। कुल मिलाकर साढ़े चार सौ करोड़ रुपए सरकार ने इस परियोजना पर खर्च किए हैं। अब सरकार ही इस फैसले पर सवाल उठा रही है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अब्बास हफीज का कहना है कि सरकार के मंत्रियों का बयान यह बताता है कि बीआरटीएस का फैसला अदूरदर्शी था, यह तो जनता के टैक्स से मिली राशि की बर्बादी है, सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए कि आखिर यह परियोजना किन अधिकारियों ने और मंत्रियों ने बनाई थी।

--आईएएनएस

एसएनपी/एएनएम

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