गरीब महिलाओं के हक, बच्चों की स्वास्थ्य एवं शिक्षा की आवाज 'लक्ष्मी' | Difference Between Rural And Urban Women's Conditionions | Importance Of Female Education

महिलाओं के हक़ की आवाज़ लक्ष्मी

Livelihood Initiatives For Empowerment: रोजगार के लिए प्रदान की ट्रेनिंग। 

Institutional Delivery And Home Delivery Difference: अस्पताओं में डिलीवरी को दिया बढ़ावा। 

Child Education: बच्चों की शिक्षा को लेकर चलाये जागरूकता अभियान। 

Motivational Story In Hindi: समाज कार्यकर्ताओं (Social Worker) की अगर बात की जाए तो ये वो लोग हैं जो समाज में व्याप्त समस्याओं (social problems awareness) की जड़ तक जाने के साथ ही उस पर व्यापक रूप से काम करते हुए परिस्थितियों में बदलाव लाने का काम करते हैं। आप की खबर ने बात की ऐसी ही एक समाज कार्यकत्री से जोकि 40 से समाजकार्यकर्ता के तौर पर काम कर रही हैं। जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत की एक ngo के साथ की, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि ये क्षेत्र काम करने के लिए काफी विस्तृत है। ऐसे में इसमें बंध कर या किसी विषय विशेष को ध्यान में रखकर काम करना मुश्किल है। 

जिसके बाद 1889 में लक्ष्मी जी ने अपनी संस्था वीमेन एंड चाइल्ड वेलफेयर (Women And Child Welfare) की स्थापना की। इस पूरी जर्नी की कई कहानियां उन्होंने हमारे साथ साझा की, साथ ही समय के साथ हुए बदलावों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था के शुरूआती दौर में पाया कि गरीबी और स्वास्थ दो सबसे बड़ी समस्याएं थीं। जिनके कारण कई बच्चे टिटनेस जैसी बीमारियों की चपेट में आकर बिना इलाज के काल की भेट चढ़ जाते थे। दूसरी ओर महिलाओं के स्वास्थ्य की ओर तो तब तक किसी का ध्यान ही नहीं जाता था, जब तक कोई महिला पूरी तरह से बिस्तर न पकड़ ले। इस पर भी सबसे बड़ी बात ये कि महिलाओं को खुद अपनी स्थिति और अपने साथ होने वाले इस दुर्भाव का कोई ज्ञान नहीं होता था क्योंकि उनके दिमाग को बचपन से विकसित ही इस प्रकार से किया जाता था। 

Poverty and hunger: गरीबी के चलते छोटे बच्चे शिक्षा छोड़ काम करने को मजबूर 


लक्ष्मी जी ने गांव और शहर में महिलाओं की स्थिति की भिन्नता और परिवार की गरीबी (education and poverty) पर भी बात की। उन्होंने बताया कि आज तो स्थितियां काफी बेहतर हैं लेकिन एक समय ऐसा भी था जब शहरी महिलाओं की स्वास्थ्य की स्थिति ग्रामीण महिलाओं से कहीं अधिक खराब थी। क्योंकि गांव में तो लोग एक-दूसरे के लिए आगे आकर खाने-पीने का इंतजाम कर देते थे, लेकिन शहरी महिलाओं में गरीबी और पर्याप्त खाना न होने के कारण कमजोरी की समस्या आम थी। कई महिलाओं का उनकी टीम ने ले जाकर इलाज कराया जो खुद से इलाज कराने में सक्षम नहीं थीं। उन्होंने इस विषय पर एक स्लम में तीन साल की एक स्टडी भी की जिसमें उन्होंने पाया कि परिवारों में खाने के फाके होना बहुत आम था। साथ ही महिलायें और बहुत कम उम्र के बच्चे एक बंद कमरे में बैठ कर ज़रदोजी का काम करते थे, जिससे उनमें दिखाई देना, टीबी जैसे कई हेल्थ समस्याएं बहुत कॉमन होती थीं। लेकिन वहीं गांव की महिला की अगर बात की जाये तो कम से कम उसे पेट भर खाना तो मिल ही जाता था। 

womans empoerment in rural areas

Why institutional delivery is important: घर में प्रसव से जच्चा और बच्चा दोनों की जान को होता है खतरा 

लक्ष्मी कक्कड़ से इंस्टीटूशन डिलीवरी पर बात करते हुए बताया कि काम की शुरुआत के समय तो लगभग सभी प्रसव घर में ही कराये जाते थे। उस समय रेयर ही होता था कि कोई अस्पताल में जाकर डिलीवरी कराये, जिसका कारण था अज्ञानता, सड़कों की खराब स्थिति, साधन की कमी। उनकी संस्था ने हरदोई के कुछ क्षेत्रों में जब प्रसव के पूर्व एवं बाद की देखभाल पर काम करना शुरू किया तो पाया उस समय डेथ रेट मां और बच्चे की बहुत ज्यादा थी, स्टिल बर्थ काफी ज्यादा थे। जिसके बाद उन्होंने 7 - 8 इस क्षेत्र में काम किया जिसमे उनको साथ मिला सरकार की ओर लागू हुई JSY (जननी सुरक्षा योजना) का। इन योजना के तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर महिला को 5000 रुपये दिया जाता था, जिसने लोगों में अस्पताल में प्रसव कराने को बहुत अधिक बढ़ावा दिया। इसके साथ ही आशा बहुओं और आंगनवाड़ी कार्यकत्री ने भी इसमें महत्वपूर्ण रोल अदा किया। 

Child education sponsorship | MTP Act India: बच्चों की पढाई को किया स्पोंसर और कन्या भूणहत्या पर लड़ी लड़ाई

लक्ष्मी कक्कड़ की संस्था ने कई बच्चों की शिक्षा को स्पोंसर करने का भी काम किया जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने कई लड़कियों को पढ़ाया-लिखाया (girls education) और जिसमें एक लड़की नर्स बनी। उन्होंने डाउन डिंड्रोम (down syndrome) से पीड़ित एक बच्चे की पढाई को भी स्पोंसर किया हुआ है। वहीं जल्दी में उनके द्वारा स्पोंसर एक बच्चे का चयन IIT में हुआ। लक्ष्मी कक्कड़ सरकार द्वारा संचालित कई कमेटी की मेंबर भी रही हैं। वर्तमान में वो MTP Act कमेटी की मेंबर हैं। उन्होंने कन्या भूणहत्या पर एक कहानी शेयर करते हुए बताया कि उनके घर पर काम करने वाली एक महिला जो अक्सर ही ब्लीडिंग की समस्या से पीड़ित रहती थी। जिसे कई बार वो डॉक्टर के पास ले गयीं लेकिन बाद में बता चला कि उसका पति गर्भ में बच्चे के लिंग की जांच कराकर, लड़की होने पर उसे दवा खिला देता था। उनकी एडवोकेसी के बाद आज उस कपल के एक लड़की है और वे उसे लेकर काफी खुश भी हैं। 

child empowerment by laksmi

Importance of family planning: परिवार नियोजन में पुरुष काउन्सलिन है महत्वपूर्ण

परिवार नियोजन पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि यह विषय बहुत बड़ा है। इसपर यदि काबू पाना है तो महिला की कॉउंसलिंग के साथ ही पुरुष की कॉउंसलिंग की ओर भी ध्यान देने की जरुरत है। पुरुष का परिवार में स्थान आज भी निर्णायक का होता है ऐसे में उसे परिवार नियोजन का महत्त्व पता होना सबसे ज्यादा जरुरी है। 

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