तीन कॉलेज, 750 छात्रों संग शुरू हुआ था डीयू, आज हैं 90 कॉलेज और 6 लाख से ज्यादा छात्र

तीन कॉलेज, 750 छात्रों संग शुरू हुआ था डीयू, आज हैं 90 कॉलेज और 6 लाख से ज्यादा छात्र
तीन कॉलेज, 750 छात्रों संग शुरू हुआ था डीयू, आज हैं 90 कॉलेज और 6 लाख से ज्यादा छात्र नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। मात्र 750 छात्रों के साथ शुरू किया गया दिल्ली विश्वविद्यालय आज 6 लाख 6 हजार 228 छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय आज से 100 साल पहले एक मई 1922 को सिर्फ तीन कॉलेजों के साथ शुरू किया गया था। हालांकि, आज दिल्ली विश्वविद्यालय में 90 कॉलेज 16 फैकल्टी और हजारों शिक्षक हैं। यही कारण है कि 100 वर्ष का हो चुका दिल्ली विश्वविद्यालय न केवल दिल्ली, बल्कि पूरे भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में शुमार है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय का अपना अलग है ऐतिहासिक महत्व भी है। शहीद भगत सिंह ने एक रात इस संस्थान में गुजारी थी, तो महात्मा गांधी इसके सेंट स्टीफन कॉलेज में रहे थे।

आज से 100 वर्ष पूर्व जब दिल्ली विश्वविद्यालय से शुरू किया गया था। तब इसका बजट केवल 40 हजार रुपये था। वहीं, आज दिल्ली विश्वविद्यालय का बजट 838 करोड़ से अधिक जा चुका है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरा होने पर डीयू की उपलब्धियां गिनवाते हुए बताया कि इन 100 वर्षो में दिल्ली विश्वविद्यालय देश के हर घर और हर मन तक पहुंच चुका है।

गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थापना एक मई 1922 को हुई थी और एक मई 2022 को विश्वविद्यालय की स्थापना के शताब्दी समारोह का आयोजन डीयू परिसर में किया गया।शताब्दी समारोह का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एम. वेंकैया नायडू ने दीप प्रज्वलित करके किया।

समारोह के विशिष्ट अतिथि के तौर पर आए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने अपने संबोधन में दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने पर कुलपति, सभी पूर्व कुलपतियों, पूर्व शिक्षकों, वर्तमान शिक्षकों, विद्यार्थियों व डीयू से जुड़े सभी गैर शिक्षक कर्मचारियों सहित डीयू की कैंटीनों में काम करने वाले लोगों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के निर्माण व 100 वर्ष की सफल विकास यात्रा में इन सभी लोगों का अहम योगदान है।

उन्होंने कहा कि पुरातन विश्वविद्यालयों के तो नाम ही हमारे सामने हैं, लेकिन देश में 100 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके बहुत कम संस्थान मौजूद हैं, जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय भी एक है। उन्होंने डीयू को जीवंत विश्वविद्यालय की संज्ञा देते हुए कहा कि हमारी आजादी का इतिहास इस संस्थान से जुड़ा रहा है। शहीद भगत ने एक रात इस संस्थान में गुजारी। महात्मा गांधी इसके सेंट स्टीफन कालेज में रहे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा, भविष्य में हमें रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनना होगा और दिल्ली विश्वविद्यालय का इसमें अहम योगदान होगा। उन्होंने कहा कि देश के अमृतकाल में डीयू अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। जब देश अपनी आजादी के 100 वर्ष मनाएगा तो डीयू अपनी स्थापना के 125 वर्ष मना रहा होगा। अगले 25 वर्षों में डीयू को शोध के क्षेत्र में बहुत कुछ करना होगा।

उन्होंने डीयू की सराहना करते हुए कहा कि देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को डीयू ने सबसे पहले अपनाया है और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए एकल प्रवेश परीक्षा को लागू करने में भी पहल की है। इसके लिए उन्होंने डीयू को भी बधाई दी। उन्होंने देश में नए पाठ्यक्रम के लिए भी डीयू से योगदान का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की शिक्षा को जड़ों से जोड़ेगी और वैश्विक स्तर पर शिक्षा का भारतीय मॉडल स्थापित करेगी। अपने संबोधन के अंत में उन्होने डीयू के शताब्दी समारोह के आयोजन को लेकर सभी को बधाई दी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने डीयू की स्थापना को लेकर कानूनी प्रक्रियाओं से लेकर इसके 100 वर्षो के स्वर्णिम इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि अगले 25 वर्षो में डीयू को बहुत कुछ करना होगा। शताब्दी समारोह से पूर्व सुबह कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने डीयू परिसर में नए स्थापित हुए 165 फुट ऊंचे राष्ट्र ध्वज को भी फहराकर उद्घााटन किया।

--आईएएनएस

जीसीबी/एसजीके

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