महामारी ने सिखाया जिंदगी का असली महत्व : नारायण सिन्हा

महामारी ने सिखाया जिंदगी का असली महत्व : नारायण सिन्हा
महामारी ने सिखाया जिंदगी का असली महत्व : नारायण सिन्हा नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। वह एक औद्योगिक वातावरण में पले-बढ़े और उनके पिता के पास ऑटोमोबाइल फैक्ट्रियां थीं। धूल भरे, कर्कश वातावरण में, कलाकार नारायण सिन्हा ने मैकेनिकल माध्यमों से जिंदगी में रंग भरा।

27 अप्रैल को इंडिया हैबिटेट सेंटर में उनकी लेटेस्ट सोलो एक्जीबिशन इम्ब्यू लगाई गई है। इसमें पुनर्नवीनीकरण सामग्री से बने विविध धातु और पत्थर के मूर्तिकला रूपों को प्रदर्शित किया गया है।

नारायण सिन्हा ने आईएएनएस से कहा, मेरी फायरलाइट सीरीज के बाद, जिसमें नकारात्मक रंग थे। मैं इसके माध्यम से जीवन को जीना चाहता था, क्योंकि महामारी ने मुझे जिंदगी का असली महत्व सिखाया था। यह प्रदर्शनी उसी भावना का परिणाम है।

नारायण सिन्हा की पिछली प्रदर्शनी फायरलाइट को क्वींस पार्क में एक पुरानी कोलकाता हवेली में आयोजित किया गया था। कलाकार का कहना है कि कला जीवन को बेहद आगे ले जाती है।

सिन्हा ने कहा, उनका काम हमेशा प्रकृति के विविध रूपों को प्रदर्शित करता रहेगा। मेरी मूर्तियां हमेशा आम आदमी से संबंधित रहेंगी, इसलिए मेरी प्रदर्शनी में प्रकृति में पाई जाने वाली और पुनर्नवीनीकरण सामग्रियों को प्रमुखता मिलती रहेगी। आम आदमी मेरी प्रदर्शनी से जुड़ाव महसूस करते हैं।

पिछले दो वर्षों के बारे में बात करते हुए, सिन्हा कहते हैं कि महामारी ने उन्हें विनम्रता सिखाई और उन्हें इस हकीकत से परिचित कराया कि वास्तव में हमारा चीजों पर नियंत्रण नहीं है।

उन्होंने कहा, हर पल को जीना और जो हम हैं, उसमें खुश रहना महत्वपूर्ण है। जब महामारी ने हम पर हमला किया तो हम अनजान थे। मैं अपनी बेटी के साथ पश्चिम बंगाल के नलहाटी गांव में था और वहां कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी। हम सभी वायरस की चपेट में आ गए थे और एकमात्र उपचार प्रकृति ही थी। मेरी बेटी के लिए, मेरे पास सूरज की रोशनी का प्राकृतिक विटामिन डी, तुलसी के पत्ते और शहद थे

सिन्हा को कहना है कि यह राज्य निकायों को सशक्त बनाने का भी सही समय है।

--आईएएनएस

पीके/एसकेपी

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