और फिर

एक दिन

धरती को

'प्रेम' हुआ

एक तेजस्वी

शौर्यवान

धर्मवीर से

और फिर एक दिन धरती को 'प्रेम' हुआ एक तेजस्वी शौर्यवान धर्मवीर से
 

'धरती'

आरंभ में

हज़ारों साल तक

जलती रही

अनवरत...

समय के साथ

वो किशोर हुई

उसके आसपास

भावनाएँ

वायु रूप में

हिलोरे लेने लगीं।

एक दिन

खूब वर्षा हुई

कौमारी धरती

के गर्भ में

भर आया

अगाध जल

और प्रारंभ हुआ

धरती का

जलचक्र।

और फिर

एक दिन

धरती को

'प्रेम' हुआ

एक तेजस्वी

शौर्यवान

धर्मवीर से!

जो चुपके से

आकर अम्बर

नीला करता था।

धरती ने

महसूस किया

अपनी देह पर

सूर्य का

कोमल स्पर्श...

और फिर

अस्तित्व में आया

जीवन!

धरती 'माँ' बनी

असंख्य संतानों की।

लेकिन वो

हर दिन झेलती रही

प्रेम में संयोग

और वियोग!

अंधकार

चाहे जितना

क्रूर हुआ,

'सूर्य'

हर सुबह

आकर

धरती को

आश्वस्त कर देता

सब ठीक है!

मैं यहीं हूँ...

सूर्य के

इस आश्वासन ने

शाश्वत कर दिया

सूर्य और धरती

का प्रेम।

- जया मिश्रा 'अन्जानी'

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