कोविड प्रकोप के कारण बच्चों में सीखने की हानि हुई : डॉ. के. कस्तूरीरंगन

कोविड प्रकोप के कारण बच्चों में सीखने की हानि हुई : डॉ. के. कस्तूरीरंगन
कोविड प्रकोप के कारण बच्चों में सीखने की हानि हुई : डॉ. के. कस्तूरीरंगन नई दिल्ली, 8 सितम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति समिति के अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन का मानना है कि कोविड 19 के प्रकोप के कारण कुछ व्यवधानों के साथ-साथ बच्चों में सीखने की हानि हुई।

डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने बताया कि कोविड 19 के प्रकोप के कारण कुछ व्यवधानों के साथ-साथ बच्चों में सीखने की हानि हुई और उम्मीद है कि शिक्षक पर्व सम्मेलन के दौरान इनमें से कई मुद्दों और चुनौतियों का समाधान किया जाएगा।

उन्होंने इस संबंध में चार मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया। पहला, मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता एनईपी 2020 में उल्लिखित एक महत्वपूर्ण पहलू है। दूसरे, सभी बच्चों को स्कूल में बनाए रखने के लिए सामुदायिक जुड़ाव और समर्थन की भी आवश्यकता है।

तीसरा बिंदु पाठ्यचर्या परिवर्तन है जिसके संबंध में एनईपी बोझ को कम करने पर ध्यान केंद्रित करता है, ताकि सीखने के अन्य रूपों के लिए अधिक गुंजाइश हो। चौथा मुद्दा उन शिक्षकों से संबंधित है जो शिक्षा प्रणाली के केंद्र में हैं और सीखने के नुकसान की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के अलावा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बहाल करना और स्थिरता बनाए रखना दो प्रमुख चुनौतियां हैं।

शिक्षक पर्व के अवसर 7 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शिक्षकों छात्रों अभिभावकों एवं अन्य हित धारकों को संबोधित किया था। इसके उपरांत अब पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा एक तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया है। इसका शीर्षक गुणवत्ता और सतत स्कूल, भारत में स्कूलों से सीखना रहा। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति समिति के अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन, प्रो. जे.एस. राजपूत पूर्व निदेशक, एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

इस अवसर पर बोलते हुए श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि राष्ट्र का विकास शिक्षा पर निर्भर है क्योंकि शिक्षा राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इसलिए बच्चों का क्षमता निर्माण जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि छात्रों को स्थानीय कौशल भी सीखना चाहिए और वर्तमान समय में शिक्षा को अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए अनुभव आधारित शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गुणवत्ता और स्थिरता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अन्नपूर्णा देवी ने आशा व्यक्त की कि इस सम्मेलन से जो विचार-विमर्श और विचार सामने आएंगे, वे हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के हमारे प्रधान मंत्री के ²ष्टिकोण को साकार करने में मदद करेंगे।

डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के आयोजन में शिक्षा मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की, जिसमें प्रधानमंत्री ने आगामी सत्रों के लिए विचार-विमर्श का स्वर स्थापित किया और एनईपी 2020 के ²ष्टिकोण को साकार करने के लिए की गई पहलों की भी सराहना की। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री का इतने कम समय में एनईपी के लक्ष्यों को साकार करने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों के लिए धन्यवाद किया।

प्रो. जे.एस. राजपूत ने कहा कि शिक्षकों के सम्मान को बहाल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, शिक्षकों को यह भी याद रखना चाहिए कि उन्हें पहले बच्चे को जानना चाहिए, बच्चे के मन को समझना चाहिए और याद रखना चाहिए कि कुछ भी नहीं सिखाया जा सकता है लेकिन सीखा जा सकता है। सीखना भीतर का खजाना है, शिक्षक, छात्रों को भीतर के खजाने का एहसास करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

प्रो. राजपूत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्कूल के प्रति अपनेपन की भावना को महसूस करना माता-पिता, प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और समुदाय की सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महामारी ने हमें सरकारी स्कूलों के वातावरण में पहुंच, सुरक्षा और शिक्षण की गुणवत्ता, शिक्षक छात्र अनुपात आदि के मामले में सुधार करने का मौका दिया है।

एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर श्रीधर श्रीवास्तव ने कॉन्क्लेव के समापन सत्र में प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने ऑनलाइन मोड में शिक्षा का समर्थन करके, वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर, प्रज्ञाता दिशानिर्देश और सहायक शिक्षकों के लिए निष्ठा 2.0 ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल जैसे शिक्षण संसाधनों को विकसित करके महामारी की स्थिति के दौरान एनसीईआरटी द्वारा निभाई गई सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष का शिक्षक पर्व संपूर्ण-विद्यालय ²ष्टिकोण अपनाता है।

उन्होंने बताया कि शिक्षक पर्व के दौरान आगामी नौ राष्ट्रीय वेबिनार विभिन्न विषयों पर केंद्रित होंगे जो पर्व से जुड़े सभी लोगों को स्कूलों और शिक्षकों को सीखने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी स्कूलों से मिली सीख को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) में शामिल करेगा, जो वर्तमान में विकास के अधीन है।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएनएम

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