मवेशियों में लंपी स्किन रोग फैलने से रोकने के लिए मिशन मोड पर राजस्थान सरकार

मवेशियों में लंपी स्किन रोग फैलने से रोकने के लिए मिशन मोड पर राजस्थान सरकार
मवेशियों में लंपी स्किन रोग फैलने से रोकने के लिए मिशन मोड पर राजस्थान सरकार जयपुर, 4 अगस्त (आईएएनएस)। राजस्थान सरकार लंपी स्किन रोग के शिकार होने वाले मवेशियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अलर्ट मोड पर आ गई है और अधिकारियों को बीमारी की रोकथाम के लिए एक मिशन मोड पर काम करने का निर्देश दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, राज्य में इस बीमारी के कारण 4,000 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है और हजारों गायें संक्रमित हो चुकी हैं।

पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि आपातकालीन आवश्यक दवाएं खरीदने के लिए अजमेर, बीकानेर और जोधपुर में संभाग स्तर के कार्यालयों में 8-12 लाख रुपये की धनराशि वितरित की गई है। अन्य प्रभावित जिलों के लिए भी 2 से 8 लाख रुपये की राशि वितरित की गई है। आपात स्थिति को देखते हुए अन्य जिलों के दवा भंडारों में उपलब्ध दवाओं को प्रभावित जिलों में भेज दिया गया है।

मंत्री ने कहा कि राज्य के चिकित्सा दल और पड़ोसी जिलों से टीमों को अधिक प्रभावित जिलों में भेजा गया है। प्रभावित जिलों के लिए अन्य जिलों से 29 पशु चिकित्सक और 93 पशुधन सहायकों को तैनात किया गया है। बीमार पशुओं की प्रभावी निगरानी एवं उपचार के लिए 30 अतिरिक्त वाहनों की स्वीकृति जारी की गई है। निदेशालय से भेजे गए नोडल अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों से और स्टाफ भेजा जाएगा। पशुओं में फैल रही बीमारी पर लगातार नजर रखने के लिए प्रभावित जिलों के साथ-साथ जयपुर मुख्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।

लंपी स्किन रोग को 15 दिन में पूरी तरह से नियंत्रित करने के निर्देश देते हुए सचिव पी.सी. किशन ने कहा कि उच्च संक्रमण के कारण बाड़मेर, जालौर, जैसलमेर, जोधपुर और सिरोही जिलों में कड़ी निगरानी की जा रही है। गुजरात से सटे डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, राजसमंद समेत अन्य जिलों में भी सतर्कता बरती जा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली और राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल की टीमों ने जोधपुर और नागौर जिलों से बीमार पशुओं के नमूने एकत्र किए हैं।

किशन ने बताया कि इस बीमारी के प्रकोप से निपटने के लिए जिलों को पूर्ण अधिकार दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने के निर्देश दिए। साथ ही मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने कहा, जोधपुर संभाग में इस बीमारी का प्रकोप अधिक है। हालांकि मृत्यु दर अधिक नहीं है। बीमार होने वाले जानवरों में से एक से 1.5 प्रतिशत मर रहे हैं, जो बहुत कम है। पशु चिकित्सक रोगसूचक उपचार कर रहे हैं। स्वस्थ पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए, पशु मालिकों को सलाह दी गई है कि यदि बुखार और गांठ आदि जैसे लक्षण पाए जाते हैं, तो संक्रमित जानवर को पूरी तरह से अलग रखें।

कटारिया बुधवार को यहां पंत भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा कर रहे थे।

उन्होंने अधिकारियों को संक्रमण की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर बचाव के उपायों से लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव उषा शर्मा ने प्रदेश में फैल रहे लंपी स्किन रोग की स्थिति और इसे रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा के लिए पशुपालन विभाग के दस जिला कलेक्टरों और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक भी की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुओं में लंपी स्किन रोग फैलने के संबंध में राज्य सरकार सतर्कता एवं संवेदनशीलता के साथ सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

--आईएएनएस

एचके/एसकेपी

Share this story