जानिये पेट और दिमाग के बीच क्या है कनेक्शन | Gut And Brain Connection | How Is The Gut And Brain Connected?

Gut And Brain Connection

How Are The Brain And Stomach Connected: मस्तिष्क और पेट कैसे जुड़ा है?
Can Gut Problems Affect The Brain?  क्या पेट की समस्या डिप्रेशन का कारण बन सकती है?
Brain-Gut Connection Anxiety: क्या ज्यादा सोचने से पाचन प्रभावित होता है?

आपने कहावत तो सुनी होगी कि दिल का रास्ता पेट से होकर जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे दिमाग का रास्ता भी पेट से होकर गुजरता है। हमारे पेट का सीधा कनेक्शन मानसिक स्वास्थ्य से होता है जिसे अंग्रेजी में गट-ब्रेन कनेक्शन कहते हैं। हमारी आंतों में मौजूद अच्छे और बुरे बैक्टीरिया की स्थिति को गट हेल्थ कहा जाता है। जब आंतों में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं तो उसे अच्छी गट हेल्थ कहा जाता है वहीं जब बैड बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं तो इसका गट हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। गुड बैक्टीरिया आंत में आने वाले फाइबर फूड को तेजी से पचाने में मदद करते हैं। यदि आंतों में गुड बैक्टीरिया कम होने तो इससे फाइबर भी नहीं पचेगा जिससे शरीर को जरुरी पोषण तत्व नहीं मिलेगा, साथ ही कब्ज की समस्या भी बढ़ जाती है। लेकिन इसका असर सिर्फ पेट की हेल्थ तक सीमित नहीं रहता है यह हमारे दिमाग को भी प्रभावित करता है। 

How Are The Brain And Stomach Connected

आंत बैक्टीरिया मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करता है?

हॉवर्ड के एक रिसर्च के अनुसार आंत का सीधा संबंध दिमाग से होता है। अगर हमारी आंत में बैड बैक्टीरिया ज्यादा हो जाते हैं तो दिमाग की कई कोशिकाएं या हिस्से इससे प्रभावित होने लगते हैं। हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार हमारी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट यानी आंत बहुत ही ज्यादा संवेदनशील होती है यदि इसमें किसी तरह की समस्या आती है तो इसका असर सीधे दिमाग पर भी पड़ता है यानी यह भावनाओं को प्रभावित करती है। हमारा शरीर हार्मोन्स के जरिये पेट और मस्तिष्क के बीच संचार करता है जिसका तात्पर्य है कि इस प्रक्रिया के जरिये एक दूसरे को आवश्यक जानकारी भेजता है। 

Brain-Gut Connection Anxiety

आंत स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच क्या संबंध है?

हॉवर्ड की रिपोर्ट के अनुसार अगर पेट में कुछ खराबी या परेशानी है तो इसका प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है जिससे एंग्जाइटी, डिप्रेशन, चिंता, गुस्सा जैसी मानसिक समस्याएं होने लगती हैं। वहीं दूसरी तरफ इसके उल्टा भी होता है कि अगर कोई व्यक्ति मानसिक समस्या या तनाव से जूझ रहा है तो वो पेट से जुडी बिमारी जैसे कब्ज, लूज़ मोशन आदि से परेशान रहता है। मतलब पेट अगर सही नहीं है तो हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है जिस कारण मानसिक स्वास्थ्य में समस्या होने पर अच्छा फाइबर युक्त भोजन जिसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन, प्रोटीन जैसे पोषण तत्व हो लेने की सलाह दी जाती है। 

ओवर ईटिंग का क्या कारण है

ओवर ईटिंग का क्या कारण है?

इसके अलावा हमारे पेट और दिमाग का एक कनेक्शन खाने को लेकर भी है। अब आप सोचेंगे कि खाना तो पेट में जाता है दिमाग से क्या कनेक्शन ? लेकिन क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि पेट तो भर गया लेकिन मन नहीं भरता जिस कारण हम ओवरईटिंग कर लेते हैं।  सोचिये हमे कैसे पता चलता है कि हमे कब भूख लगी, कितना खाना खाना है और ये अहसास कि अब पेट भर गया है ये कहां से आता है। तो बता दें कि ये सारे सिंग्नल हमे हमारे ब्रेन से ही मिलते हैं। हार्वर्ड मेडिकल स्‍कूल की एक स्‍टडी कहती है कि खाना खाने के बाद हार्मोन्स के जरिये दिमाग में मैसेज जाने में करीब 20 मिनट का समय लगता है। ऐसे में अगर आप जल्दी जल्दी खाना खाते हैं तो खाना खाने के बाद भी आपको भूख का अहसास बना रहे गया। शायद यही कारण है कि हमे हमारे बड़े धीरे-धीरे और अच्छे से चबा कर खाना खाने की सलाह देते हैं। 

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