टाइगर सफारी का बना रहे हैं प्लान, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान है बहुत ख़ास | How To Reach Ranthambore National Park | Travel News In Hindi

 How To Reach Ranthambore National Park | Travel News In Hindi

रणथंभौर में घूमने की जगह

रणथंभौर जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

रणथंबोर अभ्यारण किसके लिए प्रसिद्ध है

सर्दियों में जब भी घूमने की बात की जाती है तो उस लिस्ट में राजस्थान का नाम जरूर शामिल होता है। राजस्थान में कई ऐसी जगहें हैं जो घुमक्कों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं जिसमें जैसलमेर, उदयपुर, जयपुर आदि शामिल हैं।  राजस्थान के एक शहर सवाई माधोपुर से लगभग 13.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है रणथंभौर नेशनल पार्क। यह उद्यान भारत के बड़े नेशनल पार्क्स में से एक है। इस पार्क में ऐसी कई इमारतें हैं जो न सिर्फ आपका मन मोह लेती हैं बल्कि ये आपको पुराने समय में ले जाती हैं।

Ranthambore history in hindi | रणथंभौर टाइगर रिजर्व कब घोषित किया गया?

बॉलीवुड सितारों का फेवरेट वेकेशन डेस्टिनेशन 

पिछले कुछ समय से आपने कई सारे बॉलीवुड सितारों को भी रणथंभौर नेशनल पार्क में छुट्टियां बिताते हुए देखा होगा। दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, मलाइका अरोरा, अर्जुन कपूर, अक्षय कुमार, वरुण धवन, दिया मिर्ज़ा, अनन्या पांडे समेत कई बड़े सितारों को आपने रणथंबोर टाइगर रिज़र्व में सफारी करते देखा होगा। हालांकि राजस्थान बॉलीवुड से लेकर आम लोगों तक सबके लिए भारत में घूमने की प्रमुख जगहों में से एक हैं। यही कारण है कि देश ही नहीं दुनियाभर से भारी संख्या में पर्यटक हर साल राजस्थान जाते हैं। 

Ranthambore history in hindi | रणथंभौर टाइगर रिजर्व कब घोषित किया गया?

आपको बता दें कि पूर्व में सवाई माधोपुर खेल सेंचुरी के रूप में जाना जाता था जिसे बाद में सरकार द्वारा रणथंभौर नेशनल पार्क बनाया गया। साल 1973 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व के रूप में चुना गया। जिसके बाद 1 नवंबर 1980 को रणथंभौर एक राष्ट्रीय उद्यान बन गया। जिसके साल 1984 को आसपास स्थित जंगलों को सवाई मान सिंह सेंचुरी और केलादेवी सेंचुरी नाम दिया गया। 

Ranthambore history in hindi

Ranthambore tiger safari 

जंगली जीवों और पेड़ों के बीच में दूर-दूर से लोग यहां सफारी करने के लिए आते हैं। यहां कई तरह के जंगली जानवर आपको देखने को मिलेंगे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण यहां की टाइगर सफारी है। इसके अलावा यहां एक समान नीले रंग की तीन सुन्दर झीलें पदम तालाब (झील), मलिक तालाब और राज बाग भी देखने को मिलेंगी। ये झील जलीय पौधों जैसे डकवीड, लिली और कमल से भरे हुए हैं साथ ही ये जंगली जीवों का पानी पीने का मुख्य श्रोत भी हैं। इस पार्क की सबसे बड़ी झील का नाम पदम तालाब है। इस झील के किनारे, लाल बलुआ पत्थर से बना एक जोगी महल और एक विशाल बरगद का पेड़ है। इस पेड़ के बारे में दावा किया जाता है कि ये दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पेड़ है। 

रणथम्भौर दुर्ग की विशेषता

ये नेशनल पार्क करीब 500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जिसमें सवाई मान सिंह सेंचुरी भी शामिल है। इस पार्क में कई सरे जल निकाय मौजूद हैं जो जंगल के जानवरों को गर्मी के दिनों में आराम करने की जगह और पानी प्रदान करते हैं। इसके अलावा यहां बना रणथंभौर किला, गणेश मंदिर, राम मंदिर भी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। यहां ज्यादातर लोग ठंड के मौसम में आते हैं और जंगल में बॉन फायर का भी लुफ्त उठाते हैं। विभिन्न प्राचीन खंडहरों के कारण जंगल में वनस्पतियों, इतिहास और पर्यावरण का एक विशिष्ट, शानदार और अच्छी तरह से संतुलित स्वाद है।

रणथम्भौर दुर्ग की विशेषता

रणथंबोर क्यों प्रसिद्ध है?

यह पार्क दुनियाभर में बाघों के लिए सबसे प्रसिद्ध है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार रणथंभौर पार्क और इसके आसपास के क्षेत्र में करीब 86 बाघ हैं। भारत के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों के विपरीत यहां एक विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र और कई प्रकार के जानवर हैं जोकि सबसे ज्यादा यहां देखे जा सकते हैं। इस पार्क में आपको जंगली जीवों को देखने और तस्वीरें लेने के लिए एक घने जंगल के बीच जीप से यात्रा करने का अवसर, एक वन्यजीव सफारी द्वारा प्रदान किया जाता है। यहां कई घास के मैदान भी हैं जहां पर भारत के कुछ शानदार पक्षी भी देखे जा सकते हैं। बता दें, इस राष्ट्रीय उद्यान के शुष्क घास के मैदानों में वनस्पतियों और वन्यजीवों की 300 से अधिक विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं। पार्क के अंदर देखे जा सकने वाले किले के विस्तृत अवशेषों के कारण रणथंभौर को एक विरासत स्थल भी माना जाता है। सवाई माधोपुर से नौ किलोमीटर और रामसिंहपुरा के पास देश का चौथा क्षेत्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय है।

रणथंबोर क्यों प्रसिद्ध है?

अगर आप भी रणथंभौर जाने की तैयारी बना रहे हैं और सोच रहे हैं कि यहां कैसे पहुंचें और कहां रुकें तो हम आज इस आर्टिकल के माध्यम से आपको इसकी भी जानकारी देने वाले हैं। आपको बता दें कि यहां से सबसे पास जयपुर एक बड़ा शहर है जिसकी भारत के लगभग सभी बड़े शहरों से अच्छी कनेक्टिविटी है। रणथंभौर में कहां रुके, आसपास के घूमने वाले स्थान जैसी अन्य कई जानकारी आप https://www.ranthamboreforest.in/ से ले सकते हैं। 

  • प्लेन से: यदि आप हवाई मार्ग से जाते हैं तो जयपुर का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है। जंगल से इसकी दूरी लगभग 160 किलोमीटर है। यहां से कई इंटरनेशनल और घरेलू उड़ानें इसे अन्य भारतीय शहरों से जोड़ती हैं। जयपुर से रणथंभौर तक का सफर आप टैक्सी या बस के द्वारा तय कर सकते हैं। 
  • ट्रेन द्वारा: सवाई माधोपुर का रेलवे स्टेशन रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के निकट स्थित है। यह स्टेशन सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्टेशनों में से एक है जो भारत के प्रमुख शहरों से सीधे रेलवे के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इनमें मुंबई, दिल्ली और जयपुर शामिल हैं। स्टेशन तक की दूरी तय करने के लिए आप बस ले सकते हैं या टैक्सी किराये पर ले सकते हैं।
  • सड़क मार्ग: रणथंभौर के जंगल के पास से गुजरने वाली एक सीधी सड़क इसे कोटा, उदयपुर और जयपुर जैसे शहरों से जोड़ती है। यह भारत के प्रमुख शहरों को भी जोड़ता है। इसलिए, यदि आप दिल्ली, जयपुर या मुंबई से आ रहे हैं, तो आप बिना किसी परेशानी के आसानी से पहुंच सकते हैं। एक वाहन किराए पर लें या राज्य में बस सेवाओं में सवार हों।


 

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