अमेरिका के दो तिहाई लोगों का मानना, 9/11 के हमलों ने अमेरिका के जीने का तरीका बदल दिया : सर्वे

अमेरिका के दो तिहाई लोगों का मानना, 9/11 के हमलों ने अमेरिका के जीने का तरीका बदल दिया : सर्वे
अमेरिका के दो तिहाई लोगों का मानना, 9/11 के हमलों ने अमेरिका के जीने का तरीका बदल दिया : सर्वे नई दिल्ली, 11 सितम्बर (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में हाल की घटनाओं से पहले किए गए फॉक्स न्यूज के सर्वे में पाया गया है कि अमेरिका में पंजीकृत मतदाताओं में से दो-तिहाई (64 फीसदी) का मानना है कि 20 साल पहले 9/11 के आतंकवादी हमलों ने अमेरिका में जीवन के तरीके को स्थायी रूप से बदल दिया है।

उत्तरदाताओं में एक चौथाई ने कहा कि हमला अस्थायी परिवर्तन (24 प्रतिशत) का कारण बना, जबकि केवल 9 प्रतिशत ने महसूस किया कि जीवन बिल्कुल नहीं बदला है।

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के हटने के पहले पन्ने की खबर बनने से कुछ दिन पहले 7 से 10 अगस्त के बीच सर्वे के लिए लोगों की राय ली गई थी।

सर्वेक्षण के अनुसार, मतदाताओं ने 9/11 के हमलों को कोरोनावायरस महामारी की तुलना में अधिक परिणामी के रूप में देखा है, क्योंकि आधे (50 प्रतिशत) ने पहले के एक सर्वेक्षण में कहा कि महामारी ने अमेरिका में जीवन में स्थायी परिवर्तन किया है।

बहुमत (65 फीसदी) का मानना है कि हमलों के बाद लागू की गई नीतियों ने अमेरिका को सुरक्षित बना दिया, वहीं 17 फीसदी ने महसूस किया कि इसने अमेरिका को कम सुरक्षित बनाया है, जबकि 13 फीसदी ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि नीतियों से कोई फर्क पड़ा है।

लगभग दोगुने, हालांकि अभी भी एक कम संख्या के साथ लोगों ने कहा कि वाटरबोडिर्ंग (38 प्रतिशत) और इराक के खिलाफ सैन्य कार्रवाई (31 प्रतिशत) जैसी पूछताछ तकनीक एक अतिरंजना (ओवर-रिएक्शन) थी।

अगस्त की शुरूआत में, एक-चौथाई (25 प्रतिशत) ने कहा कि अमेरिका की ओर से 9/11 के बाद अफगानिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई ओवर-रिएक्शन थी, जबकि आधे (49 प्रतिशत) का मानना है कि यह सही कार्रवाई थी।

फॉक्स न्यूज ने कहा कि जब मतदाताओं से कई मुद्दों पर उनकी चिंता के स्तर के बारे में पूछा गया, तो इस्लामिक आतंकवादियों के हमले सबसे अंत में उनकी सूची में दिखाई दिए - हालांकि यह अफगानिस्तान में होने वाली घटनाओं से पहले था।

सर्वेक्षण के अनुसार, 58 प्रतिशत ऐसे हमलों के बारे में अत्यंत या बहुत चिंतित थे, जबकि महंगाई (86 प्रतिशत), राजनीतिक विभाजन (83 प्रतिशत), हिंसक अपराध (81 प्रतिशत), स्वास्थ्य सेवा ( 78 फीसदी), चीन की बढ़ती ताकत (73 फीसदी), बेरोजगारी (71 फीसदी), संघीय घाटा (70 फीसदी), कोरोनावायरस (69 फीसदी), ओपिओइड की लत (69 फीसदी), अवैध आव्रजन (66 फीसदी) और नस्लवाद (66 प्रतिशत) को अधिक चिंता के रूप में उद्धृत किया गया।

जलवायु परिवर्तन लगभग समान स्तर की चिंता (60 प्रतिशत) पर देखने को मिला।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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