आईआईटी दिल्ली में स्पॉन्सर्ड रिसर्च, 700 करोड़ रुपए के प्रस्ताव हैं उपलब्ध

आईआईटी दिल्ली में स्पॉन्सर्ड रिसर्च, 700 करोड़ रुपए के प्रस्ताव हैं उपलब्ध
आईआईटी दिल्ली में स्पॉन्सर्ड रिसर्च, 700 करोड़ रुपए के प्रस्ताव हैं उपलब्ध नई दिल्ली,, 21 नवंबर (आईएएनएस)। देश में काम कर रही निजी कंपनियों को अब अपने उत्पाद बेहतर और विकसित करने के लिए आईआईटी दिल्ली का साथ मिलेगा। आईआईटी दिल्ली इन निजी कंपनियों के लिए विशेष स्पॉन्सर्ड रिसर्च पार्क शुरू करने जा रही है। आईआईटी इस प्रकार की प्रायोजित (स्पॉन्सर्ड) रिसर्च और कोलैबोरेटिव अनुसंधान पर जोर देगी। संस्थान के पास इस फिलहाल प्रकार की स्पॉन्सर्ड रिसर्च के लिए निजी कंपनियों से 700 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव हैं।
देश के कई बड़े उद्योग व कंपनियां रिसर्च के लिए न केवल आईआईटी की मदद लेंगी बल्कि स्वयं आईआईटी के साथ मिलकर रिसर्च भी करेंगी। कई सरकारी संस्थान तो पहले से ही व्यापक पैमाने पर आईआईटी दिल्ली के साथ कोलैबोरेटिव रिसर्च कर रहे हैं। रक्षा उपकरणों को विकसित करने वाला डीआरडीओ, आईआईटी दिल्ली में इसके लिए 500 करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है।

स्पॉन्सर्ड रिसर्च के लिए आईआईटी में विशेष रिसर्च पार्क भी बनाया जा रहा है। आईआईटी दिल्ली के इस रिसर्च पार्क में देश की कई बड़ी गैर सरकारी संस्थाओं की भागीदारी होगी।

आईआईटी परिसर में 100 से अधिक उद्योगों के लिए यह रिसर्च पार्क होगा। संस्थान ने इस पहल के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं और सहायक बुनियादी ढांचे की स्थापना की है। आईआईटी दिल्ली के निदेशक वी.राम गोपाल राव के मुताबिक 100 से अधिक कंपनियों ने कैंपस में इस प्रकार की स्पॉन्सर्ड रिसर्च को लेकर दिलचस्पी दिखाई है। इनमें से कई कंपनियों ने इसमें निवेश भी किया है। टाटा समूह ने स्पॉन्सर्ड रिसर्च के तहत आईआईटी दिल्ली को 50 करोड़ दिए हैं।

आईआईटी के निदेशक वी. रामगोपाल राव ने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर इस प्रकार का एक एडवांस सेंटर आईआईटी दिल्ली में बनाया गया है।

डीआरडीओ रक्षा उपकरण विकसित करने वाला सरकारी संस्थान है। डीआरडीओ अभी तक विभिन्न परियोजनाओं, रिसर्च एवं उपकरणों के विकास हेतु आईआईटी दिल्ली को 265 करोड रुपए दे चुका है। आईआईटी दिल्ली के निदेशक ने बताया कि 100 से अधिक विशेषज्ञ फैकेल्टी मेंबर डीआरडीओ की समस्याओं का समाधान जुटाने के लिए रिसर्च वर्क में लगे हैं।

डीआरडीओ के साथ मिलकर की जा रही इस रिसर्च का एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि अभी तक बड़ी तादाद में डीआरडीओ को उपकरणों का आयात विदेशों से करना पड़ता था लेकिन अब इस रिसर्च के चलते आयात में भारी कमी आई है। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से डीआरडीओ के बेहतरीन उपकरण देश में ही तैयार किए जा रहे हैं।

डीआरडीओ भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का आर एंड डी विंग है, जो अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कार्य करता है।

इसके अलावा भारतीय नौसेना, अशोक विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली (एनएलयूडी), इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईआईटीडी), भारतीय पेट्रोलियम और ऊर्जा संस्थान, विशाखापत्तनम (आईआईपीई) भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स आदि ने आईआईटी दिल्ली के साथ एमओयू किए हैं।

वहीं आईआईटी दिल्ली के एक पूर्व छात्र अनंत यार्डी आईआईटी दिल्ली को 10 मिलियन अमरीकी डालर यानी करीब का योगदान दिया है। यार्डी यह योगदान आईआईटी दिल्ली में अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और नए स्थापित किए गए स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं। अनंत फिलहाल अमेरिका में रह रहे हैं। 60 के दशक में वह आईआईटी दिल्ली के छात्र थे।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक का कहना है कि इस प्रकार के योगदान से दिल्ली आईआईटी की क्षमता का विकास हो सकेगा एवं नए शोध किए जा सकेंगे।

--आईएएनएस

जीसीबी/आरजेएस

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