आईएएनएस-सीवोटर नेशनल मूड ट्रैकर : हिजाब की मांग के खिलाफ है भारतीयों का बड़ा समूह

आईएएनएस-सीवोटर नेशनल मूड ट्रैकर : हिजाब की मांग के खिलाफ है भारतीयों का बड़ा समूह
आईएएनएस-सीवोटर नेशनल मूड ट्रैकर : हिजाब की मांग के खिलाफ है भारतीयों का बड़ा समूह नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। देश के हिजाब कानून का कथित रूप से उल्लंघन करने के आरोप में ईरान की नैतिक पुलिस द्वारा हिरासत में ली गई 22 वर्षीय एक युवती की हिरासत में मौत के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, युवा कार्यकर्ता की हिरासत में मौत के विरोध में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई।

विशेष रूप से, पिछले कुछ हफ्तों में ईरान में कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को महिलाओं से अपील करते हुए देखा गया कि वे अपने सिर को ढंकने के इस्लामी ड्रेस कोड का उल्लंघन करें और देश के कट्टरपंथी शासकों की तरफ से कार्रवाई को आमंत्रित करें।

ईरान की स्थिति के विपरीत, कर्नाटक में कुछ मुस्लिम लड़कियों ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और मांग की है कि उन्हें स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनने की अनुमति दी जाए।

सीवोटर-इंडियाट्रैकर ने आईएएनएस की ओर से एक राष्ट्रव्यापी जनमत सर्वेक्षण कराया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हिजाब पहनने की कर्नाटक की मुस्लिम लड़कियों की मांग के बारे में लोग क्या सोचते हैं।

सर्वेक्षण में पाया गया कि जहां 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं के एक बड़े अनुपात ने मांग को स्वीकार नहीं किया, वहीं 36 प्रतिशत के एक बड़े अनुपात ने मांग को उचित ठहराया। वहीं, 18 फीसदी उत्तरदाताओं की इस मुद्दे पर कोई राय नहीं थी।

महिला उत्तरदाताओं के उत्तरों में भी इसी तरह की भावना देखी गई थी। सर्वेक्षण के दौरान, जबकि 43 प्रतिशत महिला उत्तरदाताओं ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में हिजाब की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, सर्वेक्षण में 38 प्रतिशत महिला प्रतिभागियों के एक अच्छे अनुपात ने युवा मुस्लिम लड़कियों की मांग का समर्थन किया।

सर्वेक्षण से पता चला कि 19 प्रतिशत महिला उत्तरदाताओं को इस मुद्दे पर जानकारी नहीं थी।

दिलचस्प बात यह है कि सर्वेक्षण के दौरान, अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकांश उत्तरदाताओं - मुस्लिम, सिख और ईसाई ने शैक्षणिक संस्थानों में कर्नाटक की मुस्लिम लड़कियों को सिर ढकने की मांग का समर्थन किया।

सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, 83 फीसदी मुस्लिम, 60 फीसदी सिख और 57 फीसदी ईसाई उत्तरदाताओं ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की मांग जायज है।

हालांकि, साथ ही, उच्च जाति वाले हिंदुओं के 58 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के 54 प्रतिशत ने मांग का विरोध किया।

सर्वेक्षण ने कुछ दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दीं। सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, युवा उत्तरदाताओं का सबसे बड़ा अनुपात 18-24 वर्ष की आयु वर्ग में 45 प्रतिशत का मानना है कि मुस्लिम लड़कियों की मांग उचित है, जबकि इस आयु वर्ग के 38 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इससे असहमति जताई। 17 प्रतिशत युवा उत्तरदाताओं की कोई राय नहीं थी।

सर्वेक्षण में आगे पता चला कि अधिक शहरी उत्तरदाताओं - 38 प्रतिशत का मानना है कि स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए, जबकि ग्रामीण उत्तरदाताओं के 35 प्रतिशत ने इसी तरह की तर्ज पर जवाब दिया।

--आईएएनएस

एसजीके

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