एनडीईएआर का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में लचीलापन लाना : शिक्षा मंत्रालय

एनडीईएआर का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में लचीलापन लाना : शिक्षा मंत्रालय
एनडीईएआर का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में लचीलापन लाना : शिक्षा मंत्रालय दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। 7 नेशनल डिजिटल एजुकेशनल आर्किटेक्चर (एनडीईएआर) पर बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा एक वेबिनार आयोजित किया गया। डिजिटल साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त करने को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की स्कूल शिक्षा सचिव अनिता करवाल ने कहा कि नेशनल डिजिटल एजुकेशनल आर्किटेक्चर, एनईपी की सिफारिश पर आधारित उत्पाद है। इसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा में लचीलापन लाना है।

उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एनईपी 2020 के कार्यान्वयन के उद्देश्य से शिक्षा के क्षेत्र में 5 प्रमुख पहल शुरू की हैं और अपने संबोधन के दौरान प्रधान मंत्री ने शिक्षा में एनडीईएआर के महत्व पर प्रकाश डाला है और इसकी तुलना यूपीआई द्वारा लाई गई क्रांति से की है।

इस अवसर पर बोलते हुए अनीता करवाल ने कहा कि 8 सितंबर को यूनेस्को द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया गया था ताकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को व्यक्तियों, समुदायों और समाजों के लिए साक्षरता के महत्व और अधिक साक्षर समाजों के लिए गहन प्रयासों की आवश्यकता की याद दिलाई जा सके।

करवाल ने बताया कि वर्ष 2021 के लिए विश्व साक्षरता दिवस का विषय मानव-केंद्रित पुनप्र्राप्ति के लिए साक्षरता डिजिटल विभाजन को कम करना है। करवाल ने इस बात पर जोर दिया कि आज की कनेक्टेड दुनिया डिजिटल तकनीक से संचालित है, इसलिए साक्षरता की परिभाषा में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता और जीवन में आसानी के लिए ऐसे अन्य जीवन कौशल शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा लक्ष्य नागरिकों की शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल करना होना चाहिए।

दरअसल शिक्षा मंत्रालय 5 से 17 सितंबर 2021 के दौरान शिक्षक पर्व के उत्सव के हिस्से के रूप में विभिन्न विषयों पर 9-दिवसीय वेबिनार का आयोजन कर रहा है। बुधवार के वेबिनार का विषय शिक्षा में प्रौद्योगिकी एनडीईएआर था।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल, राजेंद्र सेठी, उप महानिदेशक (डीडीजी), एनआईसी मौजूद रहे।

अपने परिचयात्मक भाषण के दौरान, राजेंद्र सेठी ने एनडीईएआर के बारे में एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि दी। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में चुनौतियां विविध, जटिल हैं और इसके लिए विविध ²ष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता सार्वभौमिक शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रौद्योगिकी को एक सक्षम के रूप में जाना जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि महामारी ने दिखाया है कि तकनीकी समाधान स्केलेबल और हितधारक हैं। छात्र, शिक्षक, माता-पिता कम समय में प्रौद्योगिकी के अनुकूल होने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न हितधारकों को भाग लेने और समाधान तैयार करने की अनुमति देने के लिए एक प्रौद्योगिकी ढांचे, वास्तुकला और एक पारिस्थितिकी तंत्र ²ष्टिकोण की आवश्यकता है।

रजनीश कुमार, निदेशक, डिजिटल शिक्षा, शिक्षा मंत्रालय ने उल्लेख किया कि एनडीईएआर शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को सक्रिय और उत्प्रेरित करने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचा बनाने के ²ष्टिकोण के साथ आता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि शिक्षार्थियों और शिक्षकों को समाधान प्रदान करके सीखने के परिणामों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएनएम

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